हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा की सांसद कंगना रनौत ने जिले में दिशा समिति की बैठक के दौरान सांसदों के स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत विकास कार्यों में कथित देरी को लेकर स्थानीय अधिकारियों को फटकार लगाई और उनके कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।
बैठक में मंडी सांसद कंगना ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा, “शर्म नहीं आती आप लोगों को। आप लोगों ने मजाक बना रखा है। मैं तो आप लोगों के खिलाफ नेशनल मीडिया पर कुछ बोल भी नहीं सकती।”
‘ये फालतू के जुमले मत देना’
कंगना रनौत ने कहा, “ये फालतू के जुमले मत देना। मुझे हर दिशा मीटिंग में जुमले मिल रहे हैं। पिछली बार मुझे दिशा मीटिंग में कहा गया कि हमारा 90 प्रतिशत पैसा जमीन पर लगाया गया है, कोई गड़बड़ी नहीं है, लेकिन उसकी सच्चाई क्या सामने आई। उसकी सच्चाई तब सामने आई जब बाहर की कंपनियों ने डिटेल्स सर्वे किए। मैंने दो महीने की लिस्ट मंगाई हुई है। आप लोगों ने विभाग से अनुमति लेकर कहा है कि हम ये बताएंगे, वो बताएंगे। नहीं मुझे ये सब नहीं चाहिए, मुझे काम चाहिए। बताने का समय गया, वो डेढ़-दो साल पुरानी चीजें हैं। अब मुझे काम चाहिए और मुझे बताएं कि यह काम हो गया।”
‘कंगना ने 11 करोड़ रुपये दिए हैं लेकिन एक भी काम नहीं हुआ’
आगे भाजपा सांसद ने कहा, “अब यह समय नहीं है कि हम बैठकर ये सोचेंगे कि हम ये काम भविष्य में करेंगे। मैं इससे बात करूंगा। ये लिस्ट में दूंगा। मीडिया में कहा जा रहा कि कंगना ने 11 करोड़ रुपये दिए हैं लेकिन एक भी काम नहीं हुआ। इतनी निठल्ली है, निकृष्ट है क्यों बोलीं मैं मीडिया के सामने कि ये सिर्फ यहां तनख्वाह खाने आते हैं। अपने प्रदेश के लोगों से क्या बोलूं मैं, वर्क एथिक्स के बारे में क्या बोलूं कि महाआलसी, महाफूहड़ किस्म के लोग हैं। इन्होंने कुर्सियां ली हुईं हैं। क्या बोलूं मैं अपनी लोकसभा के बारे में मीडिया से? और अपने पहाड़ी लोगों से क्या बोलूं।”
आगे कंगना रनौत ने कहा, “मैंने मार्च-अप्रैल में मुझे पता चला कि मंडी में एक करोड़ भी खर्च नहीं हुए, साढ़े 5 करोड़ में से 50-60 लाख भी खर्च नहीं हुए थे। मंत्रालय से मुझे इतने सारे पत्र भेजने पड़े। उनको और कोई काम नहीं है क्या। कई लोगों ने फंड को रोके हुए हैं उनके पास जमीन नहीं है, अनुमित नहीं है, झूठे एनओसी पर साइन करवाए हुए हैं, तो आप लोगों का दायित्व बनता है कि उनको समन भेजे और कहें कि पैसे वापस करें।”
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हिमाचल प्रदेश के टूरिज्म को चार चांद लगाने वाली कालका-शिमला टॉय ट्रेन सेवा को फिलहाल रोक दिया गया है। दरअसल, हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश की वजह से इस रेल सर्विस में रूकावट आई है। रेलवे अधिकारियों ने रविवार को बताया कि ट्रैक के एक हिस्से के नीचे की मिट्टी खिसक जाने की वजह से रेल सर्विस को रोक दिया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
