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कामधेनु आयोग का सिलेबस, बीफ खाने से होती है दुर्गति, सोने की वजह से पीला होता है गौमूत्र

इस सिलेबस में लिखा गया है कि देसी गाय काफी चालाक होती है और वह गन्दी जगहों पर नहीं बैठती है। साथ ही यह भी कहा गया है कि देसी गाय जर्सी के मुकाबले काफी अच्छी होती है और वह मुश्किल मौसम में भी आसानी से रह सकती है।

cow , india , delhiप्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो क्रेडिट – एक्सप्रेस आर्काइव )

सरकार 25 फ़रवरी को गाय विज्ञान पर एक परीक्षा आयोजित कर रही है। यह परीक्षा राष्ट्रीय कामधेनु आयोग द्वारा ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा में लोग अपनी इच्छा के अनुसार बैठ सकते हैं  मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आयोग के द्वारा जारी किये गए सिलेबस में बताया गया है कि बीफ खाने से जीवन की दुर्गति शुरू हो जाती है और सोने की वजह से गौमूत्र पीला होता है। कामधेनु आयोग के अनुसार यह परीक्षा लोगो को गाय के बारे में जागरूक करने के मकसद से आयोजित की जा रही है।

दरअसल द क्विंट ने इस परीक्षा का 54 पेज वाला सिलेबस अपनी वेबसाइट पर जारी किया है। इस सिलेबस में लिखा गया है कि देसी गाय काफी चालाक होती है और वह गन्दी जगहों पर नहीं बैठती है। साथ ही यह भी कहा गया है कि देसी गाय जर्सी के मुकाबले काफी अच्छी होती है और वह मुश्किल मौसम में भी आसानी से रह सकती है। इतना ही नहीं इस सिलेबस में यह भी दावा किया गया है कि देशी गाय के दूध में सोने के तत्त्व रहते हैं जिसकी वजह से इसका रंग पीला होता है। देसी गाय का दूध पीने से बच्चे काफी स्वस्थ रहते हैं वहीँ जो बच्चे जर्सी गाय का दूध पीते हैं उन्हें अस्थमा और डायबिटीज़ जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है।

साथ ही सिलेबस में यह भी लिखा गया है कि देसी गाय के गोबर और गोमूत्र के इस्तेमाल से नकारात्मक एनर्जी दूर रहती है। इसके अलावा इसमें देसी गाय से जुड़े काफी फायदे भी बताए गए हैं।  

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अनुसार यह परीक्षा चार कैटेगरी में आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जायेंगे। परीक्षा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 14 जनवरी से 20 फरवरी तक खुला है। साथ ही इस परीक्षा के नतीजे 25 फ़रवरी तक घोषित कर दिए जायेंगे। यह हिंदी,अंग्रेजी के अलावा 12 क्षेत्रीय भाषाओँ में भी आयोजित की जाएगी। इसमें सफल होने वाले उम्मीदवारों को पुरस्कार और प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष डॉ वल्लभभाई कथेरिया ने कहा कि लोगों को गायों के वैज्ञानिक फ़ायदे के बारे में जागरूक करने के मकसद से ये परीक्षा आने वाले समय में हर साल आयोजित की जाएगी।

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