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मप्र में दोहरी रेल दुर्घटना में 25 मरे 50 घायल

मध्यप्रदेश के हरदा में मुंबई-वाराणसी कामायनी एक्सप्रेस के 6 डिब्बे, जबकि पटना से मुंबई जा रही जनता एक्सप्रेस के 4 डिब्बे और इंजन पटरी से उतर गए। इस हादसे में अभी तक 31 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।

Author August 5, 2015 10:29 PM
मुंबई से वाराणसी जा रही कामायनी एक्सप्रेस मध्य प्रदेश में हरदा के पास पटरी से उतर गयी।

 

मध्य प्रदेश के हरदा में बीती देर रात बाढ़ के पानी से घिरे एक रेल पुल को पार करते समय दो ट्रेनों के 17 डिब्बे और एक इंजन पटरी से उतरकर उफनती माचक नदी में गिर जाने से 25 लोगों की मौत हो गई और 50 अन्य घायल हुए।

कल देर रात करीब साढ़े ग्यारह बजे के आसपास हुए दोहरे ट्रेन हादसे में मुंबई से वाराणसी जा रही कामायनी एक्सप्रेस पहले हादसे का शिकार हुई और कुछ ही मिनट बाद पटना से चलकर मुंबई जाने वाली विपरीत दिशा से आ रही जनता एक्सप्रेस का इंजन और डिब्बे भी पटरी से उतरकर ठीक उसी जगह नदी में जा गिरे।

राज्य सरकार ने पहले बताया था कि हादसे में 29 लोगों की मौत हुई, लेकिन बाद में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रेलवे के महाप्रबंधक रमेश चंद्र की मौजूदगी में एक संवाददाता सम्मेलन में मरने वालों की तादाद 25 बताई, जिनमें 11 की पहचान हुई है, जबकि 14 की पहचान अभी नहीं हो पाई है। इस बात की भी आशंका जताई गई है कि मरने वाले सभी लोग शायद रेल यात्री नहीं थे। उनमें कुछ स्थानीय ग्रामीण भी हो सकते हैं।

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हादसा भोपाल से करीब 160 किलोमीटर दूर खिरकिया और भिरंगी स्टेशनों के बीच खंडवा-इटारसी खंड में हुआ। इलाके में भारी बारिश के कारण एक छोटे से रेल पुल पर बनी 500 मीटर पटरी अचानक चढ़े पानी में डूब गई।

भोपाल के प्रभागीय रेलवे प्रबंधक आलोक कुमार ने कहा, ‘‘हमें जनता एक्सप्रेस में 11 और कामायनी एक्सप्रेस में एक शव मिला है। अन्य के बारे में यह तय नहीं है कि वह रेल यात्री थे या आसपास के गांवों के लोग थे, जो अचानक आई बाढ़ में बह गए।’’

उन्होंने कहा कि जब सभी शवों की पहचान हो जाएगी तो रेलवे हताहतों की संख्या की समीक्षा करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘अगर उनके परिजन ने उन्हें पहचान लिया और यह पता चला कि वह आसपास के गांवों के रहने वाले थे और रेल यात्री नहीं थे।’’

रेलवे मंत्रालय ने दो रेलगाड़ियों के एक साथ पटरी से उतरने की इन दुखद घटनाओं की जांच का आदेश दिया है। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि 250 से ज्यादा यात्री बचाए गए हैं। हादसों में हताहतों की संख्या को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने संसद में बताया कि हादसे में 12 यात्रियों की मौत हुई है।

रेल मंत्री ने राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के शोर के बीच कहा, ‘‘प्रथमदृष्ट्या इस दुर्घटना की वजह भारी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ लगती है।’’

First Photo: मध्यप्रदेश में दोहरे ट्रेन हादसे में 24 लोगों की मौत

 

यात्रियों ने बताया कि वह झटका लगने पर अचानक जागे और बोगी का दरवाजा खोलकर देखा तो हर तरफ पानी था और पलक झपकते ही ट्रेन झूल गई। हम सभी उसमें फंस गए और तीन घंटे तक उसमें फंसे रहे। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, ‘‘पटरी पर जल स्तर लगभग कमर की ऊंचाई तक था।’’

मौके पर मौजूद पीटीआई भाषा के संवाददाता ने कुछ डिब्बों को एक तरफ गिरा हुआ देखा और कुछ अन्य डिब्बे कीचड़ में फंसे थे। पटरियां टूटकर उखड़ गईं और इधर उधर बिखर गईं और ट्रेन के एक पहिये को टूटा अलग पड़ा हुआ देखा गया।

मध्य प्रदेश सरकार ने कहा कि दो ट्रेनों के 21 डिब्बे पटरी से उतरे लेकिन आलोक कुमार ने कहा कि जनता एक्सप्रेस के इंजन के साथ सात डिब्बे और कामायनी एक्सप्रेस के दस डिब्बे पटरी से उतरे। चौहान ने कहा, ‘‘पहली नजर में ऐसा लगता है कि हादसे का कारण भारी बारिश है। मेरी हालिया याददाश्त में हरदा क्षेत्र में ऐसी बारिश कभी नहीं हुई। इस कारण पटरियों के नीचे का आधार खिसक गया और इंजन का ओवरहेड संपर्क टूट गया जिसके कारण ट्रेनें माचक नदी के पुल के ऊपर पटरियों पर फंस गईं।’’

रेल मंत्रालय ने ट्रेनों के पटरियों से उतरने के मामले की जांच के आदेश दिये हैं और मरने वालों के परिजनों के लिए दो दो लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की। रेलवे सुरक्षा (मध्य क्षेत्र) आयुक्त घटना की जांच करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो ट्रेनों के पटरियों से उतरने की घटना में कई यात्रियों की मौत पर दुख जताया और कहा कि अधिकारी मौके पर हरसंभव उपाय कर रहे हैं।

रेलवे के प्रवक्ता अनिल सक्सेना ने कहा कि हादसे से सिर्फ आठ मिनट पहले दो ट्रेनें उस संभाग से गुजरी थीं और उनके चालकों को कोई समस्या महसूस नहीं हुई।

हादसे के कारण 50 से अधिक ट्रेनों की सेवाएं बाधित हुईं और कई का रास्ता बदला गया तथा कई की उनके गंतव्य से पहले यात्रा समाप्त कर दी गई।

रेलवे के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि रेलवे द्वारा मॉनसून के दौरान जिन असुरक्षित संभागों की पहचान की गई थी उनमें हादसे वाली 500 मीटर की रेल पटरी शामिल नहीं थी।

रेलवे बोर्ड के प्रमुख एके मित्तल ने दिल्ली में कहा कि रेलवे हर वर्ष असुरक्षित संभाग में ऐहतियाती उपायों के तौर पर मॉनसून से पहले तैयारियां करता है और जिस जगह पर ट्रेन पटरी से उतरी वह पहचाने गये संभागों में शामिल नहीं था।

जलस्तर अचानक बढ़ने को हादसे का संभावित कारण मानते हुए मित्तल ने कहा, ‘‘कोई भी प्राकृतिक आपदा और अचानक आई बाढ़ से पटरियों को बहुत क्षति पहुंचने के कारण से इंकार नहीं कर सकता जिसके कारण ट्रेन पटरी से उतरी। वरना पटरी ठीक थी और दो ट्रेनें हादसे से केवल आठ मिनट पहले उसी पटरी से गुजरी थीं।’’

उन्होंने कहा कि पास के एक बांध से अधिक मात्रा में पानी बहने की खबरें हैं लेकिन जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही इसका पता चलेगा। पुल में किसी खामी को खारिज करते हुए मित्तल ने कहा कि संभाग में नियमित गश्त होती है और खामी वाले पुल से किसी ट्रेन को गुजारा नहीं जाता।

यह पूछे जाने पर कि क्या पटरियां टूटने में क्षेत्र की मिट्टी ने कोई भूमिका निभाई, मित्तल ने कहा कि आदर्श प्रक्रिया के तहत क्षेत्र की काली मृदा को पटरी बिछाने से पहले मजबूत किया गया था।

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