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‘बाल दिवस’ पर 100 रुपए दे बोली कमल नाथ सरकार- जश्न मनाओ, BJP ने कहा- चाचा नेहरू के बर्थडे पर कांग्रेस ने कर दी बेइज्जती

सरकारी आदेश में कहा गया था कि प्रत्येक आंगनबाड़ी में 50 रुपए से बाल रंग मेला आयोजित किया जाए और बाकी के 50 रुपए दूसरी गतिविधियों में खर्च किए जाएं। विपक्ष ने पूछा, एक दर्जन बच्चों के लिए इतने कम पैसे में कैसे आयोजन हो सकता है।

बाल दिवस पर सजे बच्चे, प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो सोर्स -इंडियन एक्सप्रेस)

पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू (jawaharlal nehru) की जयंती बाल दिवस (children’s day) पर मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार ने प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को 100-100 रुपए जारी कर उत्सव मनाने का आदेश दिया था। प्रदेश की महिला बाल विकास विभाग ने 14 नवंबर को प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र पर बाल सभा, रैली, खेल, मास्टर क्लीन, मास्टर हेल्दी, क्विज आदि का आयोजन करने को कहा था। इसको लेकर बीजेपी नेता समेत कई लोगों ने सरकार की आलोचना की। उन्होंने पूछा कि एक आंगनबाड़ी केंद्र में 100 रुपए में कैसे उत्सव मनाया जा सकता है?

बीजेपी ने कहा, बच्चों का अपमान हुआ सरकारी आदेश में कहा गया था कि 100 में से 50 रुपए खर्च कर बाल रंग मेला आयोजित किया जाए और बाकी के 50 रुपए दूसरी गतिविधियों में खर्च किए जाएं। बीजेपी प्रवक्ता राहुल कोठारी ने कहा कि ”सरकार छोटे-छोटे बच्चों की भी बेइज्जती कर रही है। सौ रुपये में कहते हो आंगनबाड़ी में उत्सव हो जाए, ये कैसे संभव है, आज चाचा नेहरू का युग नहीं है, 2019 है, जिसमें 100 रुपए में गोली-बिस्कुट भी नहीं मिलती, हमें लगता है सरकार के लिए यह शर्मनाक बात है, जो बच्चों के उत्सव के लिए भी पैसे की व्यवस्था नहीं कर सकते।”

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कांग्रेस ने सरकार का किया बचाव राहुल कोठारी ने कहा, ” पं. नेहरू को कांग्रेस आधुनिक भारत का वास्तुकार बताती है और बच्चे उनके सबसे करीब रहे हैं।  प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में औसतन एक दर्जन से अधिक कुपोषित बच्चे हैं। सरकार ने उनके लिए सिर्फ 100 रुपए जारी कर उनका अपमान किया है। ” हालांकि कांग्रेस ने सरकार की कार्रवाई का बचाव करने की कोशिश की, कहा कि पिछली सरकार ने इसी तरह के आयोजनों के लिए सिर्फ 50 रुपए आवंटित किए थे।

संचालकों ने कहा, सरकार संवेदनशील बने बाल दिवस पर प्रदेश भर के कई आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चे तैयार होकर आए। संचालकों ने बच्चों के लिए पेटिंग, कुर्सी दौड़, मिट्टी के खिलौने बनाने जैसी प्रतियोगिताएं कराईं। मालवा में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रुखसार का मानना है कि इस राशि को कम से कम 300 रुपये कर दिया जाता तो आयोजन बेहतर तरीके से हो सकता था। वहीं की सविता वर्मा का कहना था कि सरकारी राशि में कुछ अपनी रकम मिलाकर वे लोग बच्चों के लिए इंतज़ाम किए हैं। भोपाल आंगनबाड़ी केंद्र के एक संचालक ने बताया, “सरकार को थोड़ा और संवेदनशील होना चाहिए था और कम से कम 500 रुपए जारी करना चाहिए था।”

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