महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल ने रविवार को तेलंगाना में समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की प्रतिमा के साथ तोड़-फोड़ करने के कृत्य की निंदा की और इसे सामाजिक समानता के मूल विचार पर हमला बताया। राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया और दोषियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई की मांग की।

यह घटना छह फरवरी को तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में घटी। भुजबल ने शाह को लिखे पत्र में कहा कि महात्मा फुले जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों को निशाना बनाकर की गई घटनाएं प्रगतिशील सामाजिक चिंतन पर हमला हैं और एक लोकतांत्रिक समाज में इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

इस घटना को समाज सुधार की विचारधारा पर जानबूझकर किया गया हमला बताते हुए भुजबल ने कहा कि सामाजिक न्याय, समानता और शोषितों के सशक्तिकरण में फुले का योगदान अमूल्य है और उनकी विरासत का अपमान करने के किसी भी प्रयास से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। राकांपा नेता ने कहा कि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति को रोकने और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए दोषियों को दंड दिया जाना चाहिए।

नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने घटना का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि तेलंगाना राज्य के संगारेड्डी ज़िले के तेल्लापुर गाँव में सामाजिक व शैक्षणिक क्रांति के अग्रदूत, राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले जी की प्रतिमा पर कानून-व्यवस्था के रखवालों की मौजूदगी में दिनदहाड़े किया गया हमला न केवल कायरतापूर्ण और आपराधिक है, बल्कि यह करोड़ों अनुयायियों तथा मानवतावादी विचारधारा में आस्था रखने वाले समाज की भावनाओं पर सीधा हमला है।

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि राष्ट्रपिता फुले जी वही महामानव हैं जिन्होंने-

  • 1848 में देश का पहला बालिका विद्यालय खोला- पहली महिला शिक्षिका, क्रांति ज्योति राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले को तैयार किया
  • सती प्रथा, बाल विवाह और विधवा उत्पीड़न के विरुद्ध संघर्ष किया
  • छूआछूत और जाति प्रथा को पाप बताते हुए शूद्रों की दासता के खिलाफ क्रांति का शंखनाद किया
  • सत्यशोधक समाज की स्थापना कर जातिविहीन समाज की नींव रखी
  • दलितों, महिलाओं, पिछड़ों, किसानों और मज़दूरों को संगठित कर चेतना दी
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उन्होंने कहा कि यह घटना स्पष्ट करती है कि पितृसत्तात्मक और जातिवादी सोच आज भी स्त्री-मुक्ति, शिक्षा और शूद्रोद्धार के प्रतीकों से भयभीत है। हम सवाल करते हैं-

क्या स्त्रियों को शिक्षित करना अपराध है?
क्या जातिवाद का विरोध गुनाह है?
क्या बहुजन इतिहास और महापुरुषों का सम्मान अब भी असहनीय है?

उन्होंने हम तेलंगाना CMO से मांग करते हैं-