कैश कांड मामले में फंसे इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। जस्टिस वर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेजा है। अपने घर में मिले कथित कैश मिलने के चलते उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद ट्रांसफर कर दिया गया था।

5 अप्रैल 2025 को जस्टिस यशवंत वर्मा ने शपथ ली थी और अभी उन पर इन-हाउस जांच चल रही है। उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को शपथ ली थी और वर्तमान में आरोपों के संबंध में उनके खिलाफ आंतरिक जांच चल रही है। जानकारी के मुताबिक, संसदीय कमेटी की जांच जो जल्द ही पूरी होने वाली है उसमें उन्हें हटाए जाने की संभावना थी।

जस्टिस वर्मा ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशंवत वर्मा ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में कहा है कि मैं उन कारणों की तह नहीं जाना चाहता जिन्होंने मुझे यह पत्र लिखने के लिए मजबूर किया है।

जस्टिस वर्मा ने पत्र में लिखा, ”अत्यंत दुख के साथ मैं इलाहाबाद हाई कोर्ट में जज के पद से अपना इस्तीफा तत्काल प्रभाव से दे रहा हूं। इस पद पर सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है।’

जस्टिस वर्मा ने 8 अगस्त 1992 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में वकालत के साथ अपना करियर शुरू किया था।

जस्टिस वर्मा के घर क्या हुआ था?

आपको बता दें कि 14 मार्च 2025 को जस्टिस वर्मा के घर में आग लगी थी और इसी दौरान दमकलकर्मियों को बेहिसाब नकदी मिली। हालांकि, घटना के वक्त जस्टिस वर्मा और उनकी पत्नी उस समय दिल्ली में नहीं थे और मध्य प्रदेश गए हुए थे। आग लगने के समय घर पर केवल उनकी बेटी और मां ही मौजूद थे। जले हुए कैश के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुए।

न्यायाधीश के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे। न्यायमूर्ति वर्मा ने आरोपों से इनकार किया लेकिन उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से उनके मूल न्यायालय इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया और आगे की कार्रवाई पर विचार किए जाने तक उनसे न्यायिक कार्य छीन लिया गया।

भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने आरोपों की आंतरिक जांच शुरू की और 22 मार्च को जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया।