दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यायाधीश के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित अपमानजनक पोस्ट किए जाने के मामले में आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और पार्टी के अन्य नेताओं को अवमानना का नोटिस जारी किया है।
अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सभी आरोपियों से जवाब मांगा है। हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य नेताओं को अपना पक्ष रखने और जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को निर्धारित की गई है।
केजरीवाल-सिसोदिया के अलावा आदमी पार्टी के नेताओं संजय सिहं, सौरभ भारद्वाज और विनय मिश्रा के खिलाफ भी अवमानना नोटिस जारी किया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और विनय मिश्रा की ओर से कोई भी अदालत में पेश नहीं हुआ।
मंगलवार को जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने आम आदमी पार्टी के सात नेताओं को नोटिस जारी करते हुए रजिस्ट्री को सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रकाशनों से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
अदालत ने यह भी कहा कि मामले में एक एमिकस क्यूरी नियुक्त किया जाएगा जो कोर्ट की सहायता करेगा। यह मामला जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ कथित अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा हुआ है जिसमें अदालत पहले ही संबंधित नेताओं को अवमानना नोटिस जारी कर चुकी है।
क्यों शुरू हुई अवमानना की कार्यवाही?
जज स्वर्णकांता शर्मा ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में 15 मई को सुनवाई करते हुए कहा कि उनके और न्यायिक संस्थान के खिलाफ किए गए हमलों को देखते हुए वह AAP नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करना चाहती हैं। कोर्ट के अनुसार सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक टिप्पणियां अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली थीं।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने AAP नेताओं पर आरोप लगाया कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक ‘बदनाम करने का सुनियोजित अभियान चला रहे थे जो सिर्फ उनके खिलाफ नहीं बल्कि पूरी न्यायपालिका और उसकी न्यायिक प्रक्रियाओं को निशाना बनाकर चलाया गया। जस्टिस शर्मा ने यह भी कहा कि इस अभियान में उनके परिवार के सदस्यों को भी निशाना बनाया गया।
जस्टिस शर्मा ने खुद को केस से किया अलग
इसके साथ ही जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि वो आबकारी नीति मामले में सीबीआई की अपील पर सुनवाई नहीं करेगी। उन्होंने अपने आप को इस मामले की सुनवाई से हटने का फैसला लिया। जज ने कहा कि चूंकि उन्होंने अदालत की अवमानना पर कार्यवाही शुरू की है इसलिए न्यायिक अनुशासन के लिहाज से उनके लिए यह मामला आगे सुनना ठीक नहीं रहेगा।
