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CBI में कलह: पीएम मोदी, मल्लिकार्जुन खड़गे और जस्टिस सीकरी के बीच दूसरी बैठक में भी नहीं निकला हल

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के भविष्य का फैसला करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार समिति ने दूसरी बार बृहस्पतिवार को बैठक की।

Author नई दिल्ली | Updated: January 10, 2019 6:39 PM
सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के भविष्य का फैसला करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार समिति ने दूसरी बार बृहस्पतिवार को बैठक की। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को आलोक वर्मा को उनके पद पर बहाल कर दिया था। उन्हें सरकार ने करीब दो महीने पहले जबरन छुट्टी पर भेज दिया था। समिति के अन्य सदस्यों में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और न्यायमूर्ति ए के सीकरी हैं। न्यायमूर्ति सीकरी देश के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की तरफ से उपस्थित हुए हैं। आगे और विवरण दिए बिना अधिकारियों ने बताया कि पैनल की बुधवार को हुई बैठक बेनतीजा रही थी।

सीबीआई प्रमुख वर्मा औैर विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगााए थे जिसके बाद उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया था।
वर्मा ने बुधवार को पदभार पुन: संभालते हुए एम नागेश्वर राव द्वारा किये गये ज्यादातर तबादले रद्द कर दिये। राव वर्मा की अनुपस्थिति में अंतरिम सीबीआई प्रमुख नियुक्त किए गए थे। बैठक के पहले, खड़गे ने कहा कि उन्होंने मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग की जांच रिपोर्ट सहित विभिन्न दस्तावेज मांगे हैं।
उन्होंने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने मामले में सीवीसी की जांच रिपोर्ट सहित कुछ दस्तावेज देने के लिए कहा है।’’ उन्होंने कहा कि वर्मा को भी कमेटी के सामने उपस्थित होने का मौका मिलना चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका देना चाहिए । अहम बैठक से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सरकार पर हमला बोला और कहा कि राफेल मामले के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीबीआई प्रमुख अलोक वर्मा को हटाने की जल्दबाजी में हैं।

राहुल ने ट्वीट कर कहा, ” प्रधानमंत्री सीबीआई प्रमुख को हटाने की इतनी जल्दबाजी में क्यों हैं ? उन्होंने सीबीआई प्रमुख को चयन समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति क्यों नहीं दी?” उन्होंने कहा, ”जवाब है: राफेल।” उच्चतम न्यायालय ने सरकार से फैसले के एक हफ्ते के अंदर ही बैठक बुलाने को कहा था। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने 77 दिन बाद अपना कार्यभार बुधवार को संभाल लिया। वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच की लड़ाई सार्वजनिक होने के बाद केन्द्र सरकार ने अक्टूबर में आदेश जारी कर वर्मा के अधिकार वापस लेकर उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया था। आदेश को मंगलवार को उच्चतम न्यायालय ने रद्द कर दिया था जिसके बाद वर्मा ने कार्यभार संभाल लिया।

उच्चतम न्यायालय ने वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजने के केन्द्र के निर्णय को रद्द कर दिया। हालांकि वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीवीसी की जांच पूरी होने तक उन पर (वर्मा) कोई भी महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेने पर रोक लगाई गयी है। वर्मा ने सीबीआई से उन्हें हटाए जाने के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। अस्थाना ने भी कथित भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी को रद्द करवाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का रूख किया है। इस संबंध में फैसला उच्च न्यायालय में लंबित है । सीबीआई निदेशक के तौर पर वर्मा का दो साल का निर्धारित कार्यकाल 31 जनवरी को खत्म होने वाला है।

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