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CJI के बाद अब SC के जज ने उठाया काम के बोझ का मुद्दा, केंद्र सरकार को लपेटा

वित्त राज्यमंत्री की मौजूदगी में जस्टिस जेलमेश्वर ने कहा, 'विधायिका द्वारा नए कानून बनाने में जो उत्साह दिखाया जाता है, वह उत्साह उस वक्त नहीं दिखता जब बात कानून को अमल में लाने के लिए बुनियादी ढांचा बनाने की आती है।'

उच्चतम न्यायालय

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया टीएस ठाकुर द्वारा सरकार से न्यायिक बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने की अपील करने के कुछ दिनों बाद ही सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य जज जस्टिम जे चेलमेश्वर ने कोर्ट में लंबित मामलों के लिए आंशिक रूप से सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल नए कानूनों को लागू कर रही है, लेकिन उनसे निपटने के लिए न्यायिक बुनियादी ढांचे को अपग्रेड नहीं कर रही है, जिससे मामले लंबित पड़े हैं। जस्टिस जेलमेश्वर ने प्रवर्तन दिवस पर यह बात कही, उनके साथ मंच पर वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा भी मौजूद थे।

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जस्टिस ने कहा, ‘मामलों में देरी होने की कई वजह हैं। लेकिन उनमें से एक समस्या को केवल आप(सिन्हा को संबोधित करते हुए) ही संभाल सकते हैं। विधायिका द्वारा नए कानून बनाने में जो उत्साह दिखाया जाता है, वह उत्साह उस वक्त नहीं दिखता जब बात कानून को अमल में लाने के लिए बुनियादी ढांचा बनाने की आती है।’

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उन्होंने कहा कि नए कानून बनते जा रहे हैं और मैनपावर और बुनियादी ढांचे में हुए बढ़ोतरी नहीं हो रही है, ऐसे में कोर्ट में मामले इकट्ठे होते जा रहे हैं। नए कानूनों से निपटने के लिए सरकार से नए मंच की मांग करते हुए जस्टिस ने कहा, ”आप एक जज को एक महीने में 30 मामले दीजिए फिर दक्षता स्तर कुछ अलग ही होगा। आप उसे 300 मामले एक महीने में देते हैं, तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि फिर क्या होगा।’

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24 अप्रैल को चीफ जस्टिस ठाकुर ने भी मुख्यमंत्रियों और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिसों की ज्वाइंट कॉन्फ्रेंस में यह मुद्दा उठाया था। कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी, केंद्रीन कानून मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा भी मौजूद थे। जस्टिस ठाकुर जब जजों की संख्या
बढ़ाने की बात कर रहे थे, तब वे थोड़े भावुक भी हो गए थे।

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