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हरियाणा: रॉबर्ट वाड्रा को बुलाया नहीं, हुडा बुलाने पर पहुंचे नहीं, फिर भी सरकार को सौंपने को तैयार है घोटाले की जांच रिपोर्ट

कमीशन ने हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को दो बार जरूर बुलाया था। लेकिन वे कमीशन के सामने एक बार भी हाजिर नहीं हुए।

Author June 24, 2016 22:42 pm
पिछली बार रॉबर्ट वाड्रा ने कहा था कि यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि एक अहंकारी शख्स के काल्पनिक ख्वाब पूरे हो सकें।

हरियाणा सरकार ने जस्टिस एसएन ढींगरा कमीशन का गठन पिछले साल मई में किया था। कमीशन को हरियाणा की पूर्व कांग्रेस सरकार द्वारा गुरुग्राम में कई रियल इस्टेट कंपनियों को बाटें गए लाइसेंस के मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कमीशन अगले सप्ताह अपनी रिपोर्ट सबमिट करने वाला है। कमीशन ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को तलब नहीं किया। वाड्रा की कंपनी स्काइलाइट होस्पिटैलिटी को भी गुरुग्राम में कॉलोनी के विकास का लाइसेंस दिया गया था।

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हालांकि, कमीशन ने हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को दो बार जरूर बुलाया था। लेकिन वे कमीशन के सामने एक बार भी हाजिर नहीं हुए।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए जस्टिस ढींगरा ने बताया कि हमने वाड्रा से लिखित में जवाब मांगा था। साथ ही कहा, ‘हमने सबूत के लिए प्राइवेट व्यक्तियों को तलब नहीं किया। केवल सरकारी अधिकारियों को तलब किया गया और पूछताछ की गई। कुछ अधिकारियों के रिकोर्ड पढ़ने के बाद हमने कुछ कंपनियों को उनकी टिप्पणियों के लिए पत्र लिखा।’

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कमीशन ने हुड्डा सहित 26 सरकारी अधिकारियों को तलब किया था। इसके साथ ही कमीशन ने मामले से संबंधित 250 फाइलों को अध्ययन किया। कमीशन के सामने हुड्डा के पेश नहीं होने पर ढींगरा ने कहा, ‘मैंने उन्हें मौका दिया था। अब मेरे पास फाइलें हैं। मै उपलब्ध रिकोर्ड्स के आधार पर काम करूंगा और इसका जिक्र मेरी रिपोर्ट में किया है।’

कमीशन उन परिस्थितियों की जांच के लिए बनाया गया था कि जिनके तहत गुरुग्राम के चार गांवों में कॉलोनियों के लिए लाइसेंस दिए गए थे। कमीशन को जांच करना था कि क्या ये कंपनियां लाइसेंस ले लिए कानून के तहत योग्य थीं। क्या ऑरिजिनल कंपनी द्वारा कुछ समय में ही इसे दूसरी कंपनी को ट्रांसफर कर देना कानून का उल्लंघन है।

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सूत्रों का कहना है कि इसकी प्रक्रिया में पाई गई कथित चूक के लिेए कमीशन टॉउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट के कुछ अधिकारियों पर आरोप लगा सकता है। कमीश न ने चार सीनियर आईएएस अधिकारियों से पूछताछ की थी। इनमें छत्तर सिंह(अब रिटायर हो चुके हैं), उस वक्त हूड्डा के प्रिंसिपल सेक्रेट्री रहे एसएस ढिल्लो, टीसी गुप्ता और अनुराग रस्तोगी शामिल हैं। यह डिर्पाटमेंट में अलग-अलग पदों पर कार्यरत थे।

राज्य सरकार ने १४ मई को कमीशन बनाया था और रिपोर्ट सबमिट करने की आखिरी तारीख ३० जून थी। पहले कमीशन को गुरुग्राम के सेक्टर ८३ में कॉलोनियों के विकास के लिए लाइसेंस देने के मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया था। इसमें वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट होस्पिटेलिटी भी शामिल थी। पिछले साल २८ अगस्त को कमीशन को शिकोहपुर, सिही, खेड़की ढोला और सिकंदरपुर बाधा गांव की कॉलोनियों की जांच भी सौंप दी गई।

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जस्टिस ढींगरा ने कहा कि मैंने इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का फैसला राज्य सरकार पर छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि सरकार मेरी रिपोर्ट पर काम करेगी या नहीं। आप इस बारे में सरकार से पूछे।’

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