हमें चाहिए ईमानदार और काबिल जज- रिटायरमेंट के बाद बोले जस्टिस दीपक गुप्ता

न्यायपालिका में सुधार के बारे में क्या सलाह देना चाहेंगे के सवाल पर जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा, मेरे हिसाब से दो बड़ी समस्याएं (लंबित मामले और नियुक्तियों में देरी) हैं। यदि हमारे पास बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर होगा तो हम लंबित मामलों से निपट सकते हैं।

Justice Deepak Gupta 850
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस दीपक गुप्ता 6 मई को रिटायर हो गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में तीन साल की सेवा के बाद 6 मई, 2020 को रिटायर हुए जस्टिस दीपक गुप्ता ने द इंडियन एक्सप्रेस अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा है कि अगर सरकार द्वारा उन्हें अब कोई पद दिया जाता है तो स्वीकार नहीं करेंगे। उनकी राय में राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनयन (जैसा जस्टिस रंजन गोगोई का हुआ) भी सरकार द्वारा की गई पेशकश है। साथ ही, साफ किया कि वह राज्यसभा की सीट भी स्वीकार नहीं करेंगे। जस्टिस गुप्ता ने ये भी कहा कि भारी रकम से जुड़े मामले या नामी-गिरामी कानूनी फर्मों के मामले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने में प्राथमिकता पाते हैं।

जस्टिस गुप्ता से पूछा गया कि रिटायर होने से पहले सुप्रीम कोर्ट के कई जज इस बारे में मन बना लेते हैं कि आगे अगर सरकार उन्हें किसी पद की पेशकश करे तो स्वीकार करना है या नहीं, आपकी क्या राय है? जस्टिस ने साफ कहा- मैं ऐसा कोई पद स्वीकार नहीं करूंगा। कुछ ऐसे ट्रिब्यूनल होते हैं, जहां सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज को ही नियुक्त किए जाने का प्रावधान है, पर मैं ऐसी भी कोई जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करूंगा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनयन भी सरकार द्वारा रिटायरमेंट के बाद की गई नौकरी की पेशकश के दायरे में आता है तो वह बोले- मेरी राय में तो आता है। साथ ही, कहा कि मैं तो इसे न स्वीकार करता। हालांकि, मैं यह भी मानता हूँ कि कोई मुझे इसकी पेशकश भी करने नहीं आ रहा।

न्यायपालिका में सुधार के बारे में क्या सलाह देना चाहेंगे के सवाल पर जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा, ‘मेरे हिसाब से दो बड़ी समस्याएं (लंबित मामले और नियुक्तियों में देरी) हैं। यदि हमारे पास बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर होगा तो हम लंबित मामलों से निपट सकते हैं। स्वतंत्र न्यायपालिका (Independent Judiciary) रखने के लिए हमें बेहतर प्रशिक्षित और ईमानदार जजों की जरूरत है। लंबित नियुक्तियों के मामले में मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि सभी स्तरों पर नियुक्तियां केवल योग्यता के आधार पर ही की जानी चाहिए।’

पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि वे न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच सेतु का काम करेंगे, इस पर आपकी प्रतिक्रिया है? इसके जवाब में जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा, ‘कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सेतु पहले से ही है। जब मैं हाई कोर्टों में मुख्य न्यायाधीश था, तो मैंने मुख्मंत्रियों के साथ विभिन्न मुद्दों पर काम किया।’

‘अमीरों की मुट्ठी में कैद है कानून और न्याय व्यवस्था’, रिटायरमेंट के दिन विदाई भाषण में बोले सुप्रीम कोर्ट जज

मुकदमों को प्रॉयरिटी या नजरअंदाज करने को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट की आलोचना हुई है। चुनावी बॉन्ड जैसे कुछ महत्वपूर्ण मामले वर्षों से सूचीबद्ध नहीं हुए हैं। कई अन्य मामलों को बिना किसी स्पष्टीकरण के फॉस्ट ट्रैक किया गया। क्या आप स्वीकार करते हैं कि यह भी एक मुद्दा है?

इस सवाल पर जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा, ‘मैं करता हूं। सर्वोच्च न्यायालय एक रजिस्ट्री-ड्राइवन कोर्ट है। रजिस्ट्री को और अधिक जीवंत बनाने की जरूरत है। रजिस्ट्रार विभिन्न उच्च न्यायालयों से अलग-अलग अनुभव के साथ आते हैं, लेकिन उनमें प्रबंधकीय कौशल नहीं होता है। मुख्य न्यायाधीश और रजिस्ट्री ही हर चीज तय करते हैं।’

उन्होंने कहा, ‘लिस्टिंग (सूचीबद्ध) को तकनीक से मैनेज करने की जरूरत है। मैंने खुद देखा है कि जब हम चार सप्ताह बाद लिस्टिंग के लिए कहते हैं तो भारी रकम से जुड़े या नामी-गिरामी कानूनी फर्मों के मामले चार सप्ताह में सूचीबद्ध हो जाते हैं, लेकिन चार सप्ताह में सूचीबद्ध करने के हमारे आदेशों के बावजूद छोटे वकीलों के केस 6 महीने तक लिस्टिंग नहीं होते हैं।’

जस्टिस दीपक गुप्ता ने अपने विदाई भाषण में जूडिशरी पर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि देश का कानून और न्याय तंत्र चंद अमीरों और ताकतवर लोगों की मुट्ठी में कैद में है।

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