मणिपुर में हुई जातीय हिंसा की जांच कर रहे ज्यूडिशियल कमीशन के हेड जस्टिस अजय लांबा ने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया। 3 महीने बाद अजय लांबा को इस हिंसा को लेकर केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपनी थी। एक नोटिफिकेशन में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बलबीर सिंह चौहान को नया चेयरमैन अपॉइंट करने की घोषणा की। कमीशन के दूसरे सदस्य रिटायर्ड IAS ऑफिसर हिमांशु शेखर दास और रिटायर्ड IPS ऑफिसर आलोक प्रभाकर कमेरी में काम करते रहेंगे।

गृह मंत्रालय ने जारी किया नोटिफिकेशन

एक गजट नोटिफिकेशन में गृह मंत्रालय (MHA) ने कहा, “4 जून 2023 के नोटिफिकेशन को जारी रखते हुए (जिसे बाद में 13 सितंबर 2024, 3 दिसंबर 2024, 20 मई 2025 और 16 दिसंबर 2025 के नोटिफिकेशन के ज़रिए बदला गया है) और मणिपुर में हिंसा की घटनाओं जैसे एक खास सार्वजनिक महत्व के मामले की जांच करने के मकसद से नियुक्त जांच आयोग के चेयरपर्सन के पद से माननीय जस्टिस अजय लांबा (गुवाहाटी हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस) के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया है। इसके बाद 28 फरवरी से केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस माननीय जस्टिस बलबीर सिंह चौहान को 1 मार्च से जांच आयोग एक्ट, 1952 के सेक्शन (3) के सब-सेक्शन 3 द्वारा दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उक्त आयोग का चेयरपर्सन नियुक्त किया जाता है।”

जांच समिति को नहीं हुआ भुगतान

इससे पहले 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा से जुड़े एक मामले पर नाराजगी जताई थी। मणिपुर हिंसा की जांच और राहत कार्यों की निगरानी के लिए गठित अदालत नियुक्त समिति को 2023 से अब तक कोई भुगतान ही नहीं किया गया था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और कमेटी भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही बनाई गई थी। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अदालत के निर्देशों के बावजूद समिति के सदस्यों को भुगतान न होना गंभीर विषय है।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अंतरिम राहत के तहत समिति के तीनों सदस्यों को 10-10 लाख रुपये दिए जाएं। अदालत ने यह भी कहा कि भुगतान की जाने वाली राशि केंद्र सरकार जारी करेगी और बाद में राज्य सरकार अपने हिस्से का भुगतान शेयर करेगी। पढ़ें मणिपुर के उखरुल जिले में जनजातीय समूहों के बीच झड़प

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मणिपुर के चुराचंदपुर में शुक्रवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। इसमें कुकी-जो पार्टी के तीन विधायकों के पुतले जलाए गए। विधायकों में से एक ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सरकार में शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि हमने सरेंडर कर दिया है और सरकार के बिना शांति नहीं हो सकती। पढ़ें पूरी खबर