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2019 में लोकसभा चुनाव लड़ेंगे जज साहब?

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भी राजनीति में आने से पहले बॉम्बे हाईकोर्ट में जज थे। उन्होंने 15 फरवरी 1995 को जज पद से इस्तीफा देकर राजनीति में पदार्पण किया था, बाद में वे चुनाव लड़े।
जस्टिस संतोष हेगड़े और जस्टिस बी जी कोलसे पाटिल रिटायरमेंट के बाद से सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों में जुड़े रहे हैं।

पिछले शुक्रवार (12 जनवरी) को भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने देश के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ बगावत करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेन्स आयोजित किया था और चीफ जस्टिस पर भेदभाव और पक्षपात करने समेत कई आरोप लगाए थे। हालांकि, अभी तक इन जजों के बीच विवाद का मामला नहीं सुलझ सका है। इस बीच दिल्ली के सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा बड़ी जोर-शोर से है कि इनमें से कोई एक जज अगले साल होने वाला लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। ये जज कौन होंगे, इसे लेकर भी अटकलें ही लगाई जा रही हैं। हालांकि, ऐसा हुआ तो किसी जज द्वारा चुनावी राजनीति में उतरने की पहली घटना नहीं होगी। जस्टिस के सदानंद हेगड़े (जस्टिस संतोष हेगड़े के पिता) ने अपने जूनियर जज को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बनाने से नाराज होकर 30 अप्रैल 1973 को सुप्रीम कोर्ट से इस्तीफा दे दिया था। बाद में उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर 1977 का लोकसभा चुनाव बेंगलोर दक्षिण संसदीय सीट से लड़ा था और जीतकर लोकसभा सांसद बने थे। कुछ महीने बाद ही वो लोक सभा के स्पीकर बनाए गए थे।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भी राजनीति में आने से पहले बॉम्बे हाई कोर्ट में जज थे। उन्होंने 15 फरवरी 1995 को जज पद से इस्तीफा देकर राजनीति में पदार्पण किया था, बाद में वे चुनाव लड़े। वो लोकसभा के सांसद भी रह चुके हैं।

ये हैं देश के सबसे महंगे वकील, जानें- राम जेठमलानी के बाद किन-किन का नाम है शामिल?

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हालांकि, कुछ लोगों का रिकॉर्ड उल्टा है। जस्टिस बहरुल इस्लाम और जस्टिस वी आर कृष्णा अय्यर सुप्रीम कोर्ट के दो ऐसे जज रहे हैं जो पहले राज्य सभा या विधान सभा के सदस्य रहे हैं और बाद में पहले हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट के जज बने हैं। जस्टिस वी आर कृष्णा अय्यर तो जज बनने से पहले मद्रास रेजिडेंसी विधान सभा में चुनकर आए और कानून मंत्री भी बने। उसी तरह जस्टिस बहरुल इस्लाम पहले 1962 से 1972 तक राज्य सभा के सदस्य रहे, बाद में असम एवं नागालैंड हाई कोर्ट के जस्टिस, गौहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और बाद में सुप्रीम कोर्ट के जज बने। इनके अलावा जस्टिस संतोष हेगड़े और जस्टिस बी जी कोलसे पाटिल भी रिटायरमेंट के बाद से सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों में जुड़े रहे हैं।

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