Judge Shivpal who convicted Lalu Prasad applied for firearm licence-लालू को सजा सुनाने वाले सीबीआई जज को चाहिए बंदूक का लाइसेंस, कहा था-राजद समर्थक कर रहे फोन - Jansatta
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लालू को सजा सुनाने वाले सीबीआई जज को चाहिए बंदूक का लाइसेंस, कहा था- समर्थक कर रहे फोन

चारा घोटाले में राजद सुप्रीमो लालू यादव को सजा सुनाने वाले सीबीआई जज ने रांची जिला प्रशासन के सामने शस्त्र लाइसेंस का आवेदन किया है, कोर्ट में जज पहले ही कह चुके हैं कि उन्हें लालू के तमाम 'शुभचिंतक' फोन करते हैं।

Author नई दिल्ली | January 20, 2018 4:18 PM
आरजेडी नेता लालू यादव। (फाइल फोटो)

चारा घोटाले के मामले में राजद सुप्रीमो  लालू यादव को हाल ही में सजा सुनाने वाले सीबीआई जज शिवपाल सिंह ने शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। यह आवेदन उन्होंने रांची जिला प्रशासन के सामने कुछ दिनों पहले किया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से आवेदन की पुष्टि जरूर की मगर और अधिक जानकारी देने में असमर्थता जताई। अधिकारी ने यह भी कहा कि- ‘‘ कोई भी व्यक्ति आर्म्स लाइसेंस के आवेदन के लिए स्वतंत्र है। हालांकि मैं नहीं जानता कि आवेदन के पीछे क्या कारण है। ”  चारा घोटाले में सजा सुनाते समय जज शिवपाल सिंह ने कोर्ट में लालू यादव से कहा था कि उनके( लालू) शुभचिंतक उन्हें फोन कर रहे हैं। माना जा रहा है कि आवेदन के पीछे यही कारण हो सकता है, हालांकि आधिकारिक रूप से ऐसी कोई बात सामने नहीं है।

90 के दशक में बिहार में 900 करोड़ रुपये का चारा घोटाला उजागर हुआ था। कैग की रिपोर्ट में हुए इस खुलासे के बाद सीबीआई ने लालू यादव, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा सहित 25 लोगों को आरोपी बनाया। 23 दिसंबर को आरोप तय करने के बाद बीते छह जनवरी को रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को साढ़े तीन साल की सजा के साथ 5 लाख का जुर्माना लगाया था। अगर लालू प्रसाद यादव पांच लाख रुपये का जुर्माना नहीं चुकाते तो उन्हें 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस मामले में कुल 16 लोगों को दोषी ठहराया गया था।

लालू के खिलाफ यह फैसला वर्ष 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से पशु चारे के नाम पर 89 लाख, 27 हजार रुपये के घोटाले से जुडा था। मामला संज्ञान में आने के बाद  सीबीआई ने आरोपियों पर 27 अक्तूबर 1997 को मुकदमा दर्ज किया था। तकरीबन 21 साल बाद  सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के इस मामले में 23 दिसंबर को लालू प्रसाद समेत तीन नेताओं, तीन आईएएस अधिकारियों के अलावा पशुपालन विभाग के तत्कालीन अधिकारी कृष्ण कुमार प्रसाद, पशु चिकित्साधिकारी सुबीर भट्टाचार्य तथा आठ चारा आपूर्तिकर्ताओं सुशील कुमार झा, सुनील कुमार सिन्हा, राजाराम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय कुमार अग्रवाल, ज्योति कुमार झा, सुनील गांधी तथा त्रिपुरारी मोहन प्रसाद को अदालत ने दोषी करार देकर जेल भेज दिया था।

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