Judge Loya death case: Supreme Court transfers two cases of Bombay High Court to the Supreme Court - सुप्रीम कोर्ट ने कहा: जज लोया की मौत का मामला बेहद गंभीर, सभी कागजात ट्रांसफर करे बॉम्बे हाईकोर्ट - Jansatta
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा: जज लोया की मौत का मामला बेहद गंभीर, सभी कागजात ट्रांसफर करे बॉम्बे हाईकोर्ट

सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि मामले में सरकार ने मीडिया में खबर आने के बाद निष्पक्ष जांच कराई है। राज्य सरकार ने दलील दी है कि जांच के दौरान पूछताछ में चार साथी जजों ने जज लोया की मौत को संदेहास्पद नहीं माना है।

जज लोया की फाइल फोटो (Photo courtesy: Facebook)

सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ केस की सुनवाई करने वाले सीबीआई जज लोया की संदेहास्पद मौत से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई अब सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में होगी। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा समेत तीन सदस्यीय खंडपीठ 2 फरवरी से इस मामले की सुनवाई करेगी। कोर्ट ने सोमवार को कहा है कि जज लोया की मौत से जुड़े किसी भी मामले की सुनवाई अब बॉम्बे हाईकोर्ट ना करे।  कोर्ट ने कहा है कि यह एक बेहद गंभीर मामला है इसलिए इस मामले से जुड़े सभी कागजातों की जांच की जाएगी। बॉम्बे हाईकोर्ट से जज लोया से जुड़े दोनों मामलों को सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर करने को कहा गया है। सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि मामले में सरकार ने मीडिया में खबर आने के बाद निष्पक्ष जांच कराई है। राज्य सरकार ने दलील दी है कि जांच के दौरान पूछताछ में चार साथी जजों ने जज लोया की मौत को संदेहास्पद नहीं माना है। हाई कोर्ट के तीन जजों की खंडपीठ ने इन चार जजों का बयान दर्ज किया है, जिसमें कहा गया है कि जज लोया की मौत हार्ट अटैक से हुई है।

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश उन दो याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आया है जिसे कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला और महाराष्ट्र के पत्रकार बी एस लोन ने दायर किया है और याचिका में जज लोया की मौत की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के लिए 2 फरवरी की तारीख मुकर्रर की है। सोमवार (22 जनवरी) को सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने उन चार साथी जजों का बयान अदालत को सौंपा जिन्होंने जज लोया को हार्ट अटैक के बाद अस्पताल में भर्ती कराया था।

राज्य सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया गया कि राज्य के डीजीपी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के आदेश पर एक गुप्त जांच भी कराई है। बता दें कि 16 जनवरी को जज लोया की मौत की जांच कराने से संबंधित याचिका जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस मोहन एम शांतानागौदार की पीठ के पास आया था लेकिन इस खंठपीठ ने सात दिनों के अंदर मामले से जुड़े सभी कागजात जमा करने का आदेश दिया था साथ ही केस को ऊपरी खंडपीठ भेज दिया था। गौरतलब है कि दिसंबर 2014 में जज लोया की मौत एक शादी समारोह में हो गई थी। जज लोया सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ केस की सुनवाई कर रहे थे। इस केस में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी आरोपी रह चुके हैं।

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