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जस्टिस कर्णन ने खारिज किया सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर, कहा- मैं नेपोलियन और डॉ. अम्बेडकर का दत्तक पुत्र हूं

जस्टिस कर्णन ने कहा, "क्या मैं असमाजिक तत्व हूं? क्या मैं आतंकी हूं? वो प्रतिबंध का आदेश कैसे दे सकते हैं? बगैर मेरा पक्ष सुने उन्होंने मेरे खिलाफ कई फैसले दिए हैं? मैं गिरफ्तारी या जेल से नहीं डरता।"
कोलकाता उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीश न्‍यायमूर्ति सीएस कर्णन। (PTI Photo)

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी का आदेश दिए जाने के करीब एक घंटे बाद ही कोलकाता हाई कोर्ट के जज सीएस कर्णन ने देश की सर्वोच्च अदालत के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि वो पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश को रद्द करने वाला आदेश दे चुके हैं। जस्टिस कर्णन ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने सुबह 11 बजे आदेश दिया। मैंने सुबह 11.20 पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को रद्द करने का आदेश दिया। वो मीडिया को मेरे बयान न छापने का आदेश कैसे दे सकते हैं?” जस्टिस कर्णन चेन्नई के चेपक गवर्नमेंट गेस्ट हाउस में मीडिया से मुखातिब थे।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (नौ मई) को मीडिया को जस्टिस कर्णन के किसी भी बयान को न छापने के लिए कहा था। कर्णन ने अपने लेटर पैड पर लिखा एक लिखित बयान जारी किया और कहा कि ये उनका आदेश है। जस्टिस कर्णन ने कहा कि उन्होंने सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट के सात जजों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।

जस्टिस कर्णन ने कहा, “क्या मैं असमाजिक तत्व हूं? क्या मैं आतंकी हूं? वो प्रतिबंध का आदेश कैसे दे सकते हैं? बगैर मेरा पक्ष सुने उन्होंने मेरे खिलाफ कई फैसले दिए हैं? मैं गिरफ्तारी या जेल से नहीं डरता। आम जनता मेरे साथ है। ये न्यायिक व्यवस्था की पूर्ण विफलता है। मैं पहले ही जेल देख चुका हूं।” जस्टिस कर्णन ने बताया कि हाई कोर्ट के जज के तौर पर वो करूर, शिवगंगा स्थित जेलों का दौरा कर चुके हैं। जेल जाने से डरने के सवाल पर जस्टिस कर्णन ने कहा, “मैं नेपोलियन की तरह हूं, डॉक्टर अंबेडकर का एक दत्तक पुत्र….वो कहते हैं मैं पागल हूं। अगर मैं पागल हूं तो मुझे जेल क्यों भेजा जा रहा है?”

ये पूछने पर की क्या वो राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने वाले हैं? जस्टिस कर्णन ने कहा कि वो पहले राष्ट्रपति को अपना प्रतिनिधित्व भेज चुके हैं। जस्टिस कर्णन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू होने लायक नहीं है और वो मीडिया पर प्रतिबंध के सर्वोच्च अदालत के आदेश को खारिज करने वाला आदेश दे चुके हैं। जस्टिस कर्णन ने कहा कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट के सात जजों और उनके बीच का नहीं बल्कि न्यायापालिका में भ्रष्टाचार का है जिसकी अनदेखी की जा रही है। जस्टिस कर्णन ने कहा कि एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सर्वोच्च अदालत में मामले को सही तरीके से नहीं रखा।

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  1. Kunal Kamble
    May 13, 2017 at 8:23 am
    Justice Karnan has served his purpose of his life and will go down in history as a martyr... The custodians of the Cons ution cannot absolve themselves of their accountability in performing their cons utional duties and obligations... Those who sacrificed their lives for our freedom were no different from Justice Karnan... They were all deserving mental check up... The imperial mentality has survived the British raj in our esteemed ins utions of the Judiciary and Bureaucracy. The implementation of our Cons ution in its letter and spirit and creation of the egalitarian society as envisioned by the architect of the Indian Cons ution, Dr. Baba sahib Ambedkar, is aptly called the second independence movement. Bravo. Justice Karnan & MP Mr. Udit Raj for taking up the issue in its proper perspective. Hope the Indian Parliament arises to this occasion to uphold the dignity and supremacy of this sovereign Republic by way of implementation of the Cons ution.
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    1. Manish Sarve
      May 11, 2017 at 3:26 pm
      Jab koi rasta nahi Bachata to baba saheb ki Yad aa Jati hai..... Jab Court me khurchi pe baithta tha to Tu judge tha... ab jail Jana hai to dalit Putra ban a......
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      1. Abhay Krishna Gupta
        May 10, 2017 at 8:03 pm
        बड़ी अदालत के बड़े जज - आपस मे इस तरह लड़ रहे है जेसे छोटी क्लासों के बच्चे. तब यह भी मोदी सरकार की उपलब्धि है? सुप्रीम कोर्ट के 7 जजो की बेंच को पूरे मा े से आम जनता को ब् ाना चाहिए.
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        1. L
          LEELA RAM
          May 10, 2017 at 4:42 pm
          मतलब न्यायपालिका पाक साफ है ।
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          1. S
            Sunil
            May 10, 2017 at 2:42 pm
            अगर जस्टिस कर्णन दोषी है तो सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस खेहर भी दोषी है।क्या किसी की शिकायत करना गलत बात है।अगर कर्णन जी ने कोई शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय में कई तो पहले उसकी भी तो जांच करायो।क्या सीधे शिकायत करता को ही जेल भेज दोगे।ये तो न्याय प्रक्रिया का गला घोटना हुआ। अगर कोई जज घोटाला करता है तो उसे अनदेखा किया जाए।कानून सब के लिए बराबर होना चाहिए।
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