झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (JSSC) की जूनियर इंजीनियर (डिप्लोमा) भर्ती परीक्षा 2022 के पेपर लीक मामले में विशेष जांच दल (SIT) को बड़ी सफलता मिली है। SIT ने परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी के फरार निदेशक अरुण कुमार को मुंबई से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी को 10 अगस्त को गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

अरुण कुमार नई दिल्ली स्थित ‘बिन्सिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड’ का निदेशक है और मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले का रहने वाला है। जांच एजेंसी के अनुसार, पेपर लीक की साजिश में परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आई है।

परीक्षा शुरू होने से पहले लीक हुई थी आंसर की

JSSC ने 3 जुलाई 2022 को जूनियर इंजीनियर के 1,279 पदों पर भर्ती के लिए प्रतियोगी परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा के पहले ही दिन पहली शिफ्ट शुरू होने से पहले प्रश्नों के उत्तर और आंसर की ऑनलाइन लीक होकर प्रसारित होने की खबर सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए JSSC ने तत्काल परीक्षा रद्द कर दी थी।

इसके बाद अभ्यर्थी मिथिलेश कुमार महतो की लिखित शिकायत पर 14 जुलाई 2022 को नामकुम थाने में FIR दर्ज की गई। मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420, 467, 468 और 120(B), IT Act की धारा 66 और बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम की धारा 10 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

परीक्षा एजेंसी से जुड़े सिंडिकेट का खुलासा

जांच के दौरान SIT को पता चला कि पेपर लीक एक संगठित सिंडिकेट के जरिए किया गया था, जिसका संबंध परीक्षा आयोजित कराने वाली कंपनी बिन्सिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड से था। जांच में सामने आया कि अभ्यर्थियों को पटना में एकत्र किया गया था। वहां उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी याद कराई गई थी।

अरुण कुमार की गिरफ्तारी से पहले SIT इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज चुकी है। इनमें अभ्यर्थी और नामजद आरोपी रंजीत मंडल, सिंडिकेट से जुड़े दीपक कुमार, अभिषेक कुमार, दीपक श्रीवास्तव और बिन्सिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के सीनियर मैनेजर कृष्ण कुमार शामिल हैं।

पुलिस के मुताबिक, पेपर लीक मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का भी पता लगाने में जुटी हैं।

JPSC भर्ती विवाद के बीच कार्रवाई

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर अलग-अलग मामलों में विवाद चल रहा है। रविवार को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के तीन सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, अनीमा हांसदा और जमाल अहमद ने इस्तीफा दे दिया था।

वहीं, राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए कई स्तरों पर कार्रवाई की घोषणा की है। सरकार की योजना के तहत क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से भी कथित भर्ती अनियमितताओं की जांच कराई जा रही है।

हालांकि, प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी इससे संतुष्ट नहीं हैं। वे पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग पर कायम हैं। 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम 5 जुलाई को घोषित किए जाने के बाद अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।

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नीट पेपर लीक मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान झारखंड पेपर लीक विवाद को लेकर कांग्रेस पर हमलावर हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।