झारखंड में छात्रों का JPSC और JSSC के खिलाफ हो रहे आंदोलन को लेकर सरकार और छात्रों के बीच रविवार को करीब 5 घंटे तक बैठक की गई। हालांकि यह बैठक सरकार की नजरों में बेनतीजा रही क्योंकि छात्र 10 अगस्त यानी सोमवार को झारखंड विधानसभा का घेराव करने की अपनी बात पर अड़े हैं। इधर सरकार ने छात्रों के विधानसभा घेराव के मद्देनजर विधानसभा के 750 मीटर के दायरे में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू कर दी है।
सरकार और छात्रों की यह बैठक रांची के स्टेट गेस्ट हाउस ऑडिटोरियम में की गई। मंत्रियों और विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस बैठक में हिस्सा लिया।
विधानसभा घेराव शांतिपूर्ण ढंग से करेंगे- छात्र नेता
बैठक खत्म होने के बाद प्रदर्शनकारी छात्र नेता कुणाल ने सरकार के प्रतिनिधियों से चली बैठक से जुड़े सवाल पर जवाब दिया और कहा, “मैं एक बात साफ कर दूं कि हमारा विधानसभा घेराव शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगा। हमारी मांग CBI जांच की है; हम इससे कोई समझौता नहीं करेंगे।”
सरकार ने तीन परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया- छात्र नेता
सरकार के प्रतिनिधियों से मिलने के बाद, छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा, “सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत का यह दूसरा दौर था। खास तौर पर 14वीं JPSC, JPSC बैकलॉग 2023 और JPSC बैकलॉग 2025 परीक्षाओं के बारे में, सरकार ने इन तीनों को रद्द करने पर विचार करने का फैसला किया है। इसके अलावा, सरकार ने TDPL एजेंसी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की CID और ED से जांच कराने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, सरकार ने सुधारों से जुड़ी हमारी लगभग सभी मांगें मान ली हैं, सिवाय एक-दो मुद्दों के जैसे उम्र में छूट जिन पर कोई सहमति नहीं बन पाई।
आगे रवींद्र पासवान ने कहा, CGL परीक्षा के बारे में, छात्रों ने CBI जांच की मांग की थी; हालांकि, सरकार इसके लिए सहमत नहीं हुई। इसके बजाय, सरकार ने कहा कि एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच कराई जाएगी, और अगर वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है, तो ED को भी शामिल किया जाएगा। फिर भी, हम छात्र CBI जांच की मांग जारी रखे हुए हैं।”
आगे उन्होंने कहा, “आंदोलन जारी रहेगा; आंदोलन अभी भी चल रहा है।”
सरकार बनाएगी फास्ट ट्रैक कोर्ट- झारखंड सरकार के मंत्री
इधर उम्मीदवारों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा, “तीन दिनों की बातचीत और व्यापक विचार-विमर्श के बाद, और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशों पर अमल करते हुए, सरकार ने 14वीं JPSC और 2023-25 की बैकलॉग भर्तियों से जुड़ी अनियमितताओं को दोतरफा तरीके से हल करने का फैसला किया है। आपराधिक पहलुओं की जांच CID करेगी; इसके अलावा, वित्तीय असर और अवैध वित्तीय लेन-देन के सबूतों को देखते हुए, ED से जांच कराने का अनुरोध किया जाएगा। इसके बाद, एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाई जाएगी और 90 दिनों के भीतर आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
आगे मंत्री ने यह भी कहा, जरूरी सुधारों के बारे में हमारी सरकार ने कहा कि इस प्रक्रिया का मार्गदर्शन करने के लिए IIT-ISM, IIM रांची और XLRI के विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाएगी।
‘प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार किया’
आगे सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा, “छात्रों की एक मांग इन चर्चाओं के बाद, छात्र प्रतिनिधियों ने CGL परीक्षा रद्द करने की मांग की। सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि चूंकि परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आयोजित की गई थी और वर्तमान में उनकी निगरानी में है इसलिए इसे रद्द करने का अधिकार सरकार के पास नहीं है। सरकार ने एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनाकर जांच की देखरेख करने का प्रस्ताव दिया; हालांकि, छात्रों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।”
98 प्रतिशत मांगों पर सहमति- मंत्री
आगे झारखंड मंत्री ने कहा, “हमारा मानना है कि सरकार उठाए गए 98 प्रतिशत बिंदुओं पर सहमत हो गई। बाकी दो प्रतिशत विशेष रूप से CGL परीक्षा रद्द करने की मांग को पूरा नहीं किया जा सका क्योंकि सरकार अदालत के आदेशों के तहत आयोजित परीक्षा को एकतरफा रूप से रद्द नहीं कर सकती, जिसके परिणाम घोषित हो चुके हैं और सफल उम्मीदवार पहले से ही नौकरी कर रहे हैं। छात्रों में विश्वास पैदा करने के लिए, सरकार CID के काम की निगरानी के लिए एक रिटायर जज की अध्यक्षता में समिति बनाने को तैयार थी, ताकि अगर छात्रों को लगे कि CID उनकी बात नहीं सुन रही है, तो वे अपनी चिंताएं व्यक्त कर सकें। कुल मिलाकर, इन प्रक्रियाओं और प्रयासों के बाद, हमारा मानना है कि सरकार ने आंदोलन को समाप्त करने के अपने प्रयास में छात्रों के प्रति सच्ची सद्भावना और संवेदनशीलता दिखाई है।”
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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को राजनीतिक दलों को भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को कथित तौर पर गुमराह करने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि चल रहे आंदोलन का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। सोरेन ने कहा कि सरकार संवाद और पारदर्शिता के माध्यम से प्रदर्शनकारियों की चिंताओं का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों की मांगों का समाधान बल प्रयोग नहीं है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
