केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा ने असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और कहा कि नुकसान इतना अधिक है कि पुनर्निर्माण में समय लगेगा। जेपी नड्डा ने असम में बाढ़ पीड़ितों से कहा कि केंद्र आपके साथ है, राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराने में कोई कमी नहीं होगी।

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, जेपी नेड्डा ने असम के मुख्यमंत्री के साथ राज्य के शिवसागर जिले के नेपालीखुंटी इलाके का दौरा किया। यह असम और नागालैंड की सीमा पर स्थित है और बाढ़ की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए इलाकों में से एक है।

बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से कहा,”मैंने बाढ़ से प्रभावित नेपालीखुटी इलाके का दौरा किया है। मुख्यमंत्री सरमा के साथ मैंने तबाही का मंजर देखा है। नुकसान इतना ज्यादा है कि इसे ठीक होने में समय लगेगा।”

उन्होंने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से आपको भरोसा दिलाना चाहता हूं कि भारत सरकार कोई कमी नहीं छोड़ेगी। चाहे वह आर्थिक मदद हो, पुनर्वास हो, मुआवजा हो या संपत्ति के नुकसान के लिए सहायता हो, सब कुछ उपलब्ध कराया जाएगा।”

असम में बाढ़ से गंभीर स्थिति

वहीं, दूसरी ओर असम में बाढ़ की स्थिति बुधवार को भी गंभीर बनी रही। रातभर हुई बारिश के कारण निचले इलाकों में एक बार फिर जलभराव का खतरा बढ़ गया है। इस बीच बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 89 हो गई है जबकि पांच जिलों में 1.22 लाख से अधिक लोग अब भी प्रभावित हैं। राज्य में 1,22,100 से अधिक लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं।

इनमें शिवसागर सबसे अधिक प्रभावित जिला है जहां करीब 60,000 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद चराइदेव जिले में 31,000 से अधिक और जोरहाट में लगभग 20,000 लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन चार जिलों में 55 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र संचालित कर रहा है, जहां 17,857 विस्थापित लोग फिलहाल शरण लिए हुए हैं। बाढ़ के कारण 15,342.92 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। इसके अलावा 26,575 पालतू पशु और पोल्ट्री भी इस आपदा से प्रभावित हुए हैं।

शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जैसे जिले हाल के वर्षों में आई सबसे असामान्य बाढ़ का सामना कर रहे हैं लेकिन यह महज मानसून की एक और बाढ़ नहीं है। सामान्य से कम वर्षा के बावजूद, ऊपरी क्षेत्रों में तीव्र बादल फटने से दिखो और धनसिरी जैसी सहायक नदियों में अचानक बाढ़ आ गई। यह बाढ़ का पानी उन क्षेत्रों में भी घुस गया जहां आमतौर पर बाढ़ नहीं आती।

असम भारत के सबसे बाढ़ग्रस्त राज्यों में से एक है जहां लगभग 40 प्रतिशत भूमि बाढ़ के खतरे में है। असम में बाढ़ आना एक आम बात है लेकिन भौगोलिक स्थिति, भारी मानसूनी बारिश, गाद से भरी नदियां, वनों की कटाई और नदी-किनारों के कटाव के कारण यह राज्य विशेष रूप से बाढ़ के प्रति संवेदनशील हो गया है। जानिए बाढ़ लगभग हर साल क्यों आती है और इस साल तबाही इतनी भीषण क्यों रही?

असम में बाढ़ के क्या कारण हैं?

असम हिमालय और पटकाई, नागा, खासी और गारो पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यहां हर साल मानसून की भारी बारिश होती है जबकि इसकी लगभग 40% भूमि ब्रह्मपुत्र और उसकी 33 प्रमुख सहायक नदियों के बाढ़ के मैदानों में स्थित है। मानसून के दौरान, ये नदियां तेजी से उफान पर आ जाती हैं और भारी मात्रा में पानी ब्रह्मपुत्र में डाल देती हैं, जिससे अक्सर नदी उफान पर आ जाती है।

ब्रह्मपुत्र नदी हिमालय से भारी मात्रा में जल और गाद बहाकर लाती है। सियांग, दिबांग और लोहित जैसी नदियां अरुणाचल प्रदेश से ढलान पर उतरती हैं और अंत में मिलकर ब्रह्मपुत्र नदी बनाती हैं। मैदानी इलाकों में प्रवेश करते ही इनका प्रवाह धीमा हो जाता है और गाद नदी तल पर जम जाती है। जमा हुई गाद भारी बारिश के दौरान नदियों की बाढ़ के पानी को ले जाने की क्षमता को कम कर देती है। समय के साथ, इससे नदी तल ऊपर उठ जाता है और बाढ़ का खतरा काफी बढ़ जाता है। बाढ़ और कटाव आपस में जुड़े हुए हैं। तेज़ बहने वाली नदियां हर साल नदी के किनारों को काटती हैं जिससे गांव, खेत और सड़कें बह जाती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1950 के दशक से असम में नदी के किनारों के कटाव के कारण 4.27 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि नष्ट हो चुकी है।

इस साल असम में भीषण बाढ़ क्यों?

असम सरकार के अनुसार, ऊपरी इलाकों में अत्यधिक वर्षा और स्थानीय स्तर पर सामान्य से 436% अधिक बारिश के कारण शिवसागर और चराइदेव में भीषण बाढ़ आ गई। उफनती दिखो नदी ने विशाल क्षेत्रों को जलमग्न कर दिया जबकि गाद की मोटी परतों ने कृषि भूमि और बस्तियों को ढक दिया, जिससे भारी नुकसान हुआ।

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असम के लोअर असम इलाके में बाढ़ लगभग हर साल आने वाली एक सामान्य घटना है। हर साल बाढ़ आती है- कभी कम तबाही मचाती है तो कभी भारी नुकसान पहुंचाती है। लेकिन अपर असम इस तरह की स्थिति का आदी नहीं है। इसलिए जब 19 जुलाई को नागा हिल्स में हुई भारी बारिश का पानी इस क्षेत्र में पहुंचा तो लोगों को इसकी बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें