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किसी का बेटा सिंघु बॉर्डर पर कर रहा प्रदर्शन, तो किसी ने खुद खालिस्तानियों से लिया था मोर्चा, किसान आंदोलन का चेहरा बनकर उभरी ये महिलाएं

आशा संयोजक से लेकर भाकियू की नेता तक, किसान आंदोलन में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हिस्सा ले रहीं महिलाएं।

Farmers Protest, Farm Lawकिसान आंदोलन में पुरुषों के साथ कंधा मिलाकर हिस्सा ले रही हैं महिलाएं। (एक्सप्रेस फोटो)

कृषि कानूनों पर सरकार और किसानों के बीच अभी गतिरोध खत्म नहीं हुआ है। दोनों पक्षों के बीच गुरुवार को हुई बातचीत का भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। हालांकि, किसानों और केंद्रीय मंत्रियों ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में बातचीत से समस्या का कोई हल निकलेगा। इस बीच किसान आंदोलन से अब तक कई ऐसी महिला नेताओं की तस्वीरें सामने आ चुकी हैं, जिससे यह पूरा प्रदर्शन किसी महिला किसान आंदोलन की तरह दिखने लगा है। कई सिख परिवार की महिलाएं लगातार पुरुष प्रदर्शनकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रदर्शनों में साथ खड़ी हैं।

इनमें ही एक नाम है कविता कुरंगुटी का जो कि सरकार के साथ बातचीत के लिए जाने वाले 40 किसान नेताओं में शामिल हैं। बताया जाता है कि कविता 400 संगठनों वाले आशा की संयोजक हैं। इस क्षेत्र में उनका 25 साल का अनुभव है। कविता सरकार की कई कमेटियों में भी पहले सामने रह चुकी हैं। इस आंदोलन में यह नोट करने वाली बात है कि महिलाएं सिर्फ खाना नहीं बना रहीं, पुरुष भी इसमें शामिल हैं। इतना ही नहीं रोटी बनाने वाली महिलाएं पुरुषों के पीछे नहीं हैं, बल्कि वे भी किसान आंदोलन में कार्यकर्ता से लेकर नेता के रूप में सक्रिय हैं। किसानों के इस प्रदर्शन में सभी के लिए जगह है।

इसके अलावा दो अन्य महिलाएं जसबीर कौर और हरिंदर बिन्दु भी इस आंदोलन में उभरे दो चेहरे हैं। अगर इन दोनों महिलाओं के जरिए किसान आंदोलन को देखा जाए, तो हरिंदर के पिता मेघराज आतंकवाद के दौर में हिन्दू और सिख युवाओं के कत्लेआम के ख़िलाफ़ बोलते थे। खालिस्तान के ख़िलाफ़ बोलते थे। खालिस्तानियों ने उनकी हत्या कर दी। पिता की हत्या के बाद भी हरिंदर 1996 तक खालिस्तान के खिलाफ लड़ती रहीं। 1996 में वे पंजाब खेत मजदूर यूनियन में शामिल हुईं और तब से लेकर अब तक महिलाओं को संगठित कर रही हैं।

दूसरी तरफ मनसा की रहने वाली जसबीर कौर 1997 से पंजाब किसान यूनियन में सक्रिय हैं। इस वक्त सूबा कमेटी मेंबर हैं। उनके पति भी किसान नेता हैं। बेटा भी सिंघु बॉर्डर पर बैठा है और बेटी डॉक्टर है। किसान आंदोलन में चंदा लेने और उसका हिसाब रखने की जिम्मेदारी जसबीर कौर पर को ही दी गई है। इससे साफ है कि महिलाएं खेती-किसानी के साथ यूनियनों में भी पुरुषों के साथ बराबरी से आंदोलन में उनका साथ देने में जुटी हैं।

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