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5 माह से सैलरी नहीं, पर PM ‘आत्मनिर्भर अभियान’ लाए, ये भी ‘स्किल इंडिया’ जैसे बोगस साबित होगा- रवीश कुमार का FB पोस्ट, वायरल

रवीश कुमार ने कहा कि भारत और अमेरिका में लोगों पर जीडीपी के मुकाबले कर्ज बढ़ रहा है, पर जहां अमेरिका में बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है, वहीं भारत में तो बेरोजगारों को मिली हुई नौकरी नहीं दी जा रही है।

Ravish Kumar, Economyपत्रकार रवीश कुमार ने अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा। (फोटो- NDTVKhabar)

देशभर में कोरोनावायरस के चलते लगे लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। केंद्र सरकार अब इकोनॉमी को पटरी पर लाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। हाल ही में पीएम मोदी ने इसी ओर इशारा करते हुए आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत का ऐलान भी किया था। हालांकि, पत्रकार रवीश कुमार ने कहा है कि सरकार की यह योजना स्किल इंडिया की तरह ही बोगस साबित होगी। रवीश का एक फेसबुक पोस्ट काफी वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अर्थव्यवस्था के बुरे दौर को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।

रवीश ने अपने प्राइम टाइम शो में भाजपा नेताओं के बयानों का जिक्र किया। उन्होंने पीयूष गोयल का स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से सालाना 1 लाख करोड़ की इकोनॉमी पैदा होने के बयान का भी जिक्र किया। रवीश ने कहा कि औद्योगिक राज्य गुजरात का पूरा बजट ही सवा दो लाख करोड़ का है, तो क्या इसका आधा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के इकोसिस्टम से आ सकता है। जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन मूर्तिशास्त्री अर्थशास्त्री कहलाने लगेंगे। पीयूष गोयल ने रेलवे इकोसिस्टम से 10 लाख नौकरियां पैदा करने की बात कही थी, पर अब उस वादे को तीन साल हो गए, क्या वे बताएंगे कि कितने रोजगार रेलवे इकोसिस्टम से पैदा हुए हैं?

रवीश ने आगे कहा, “2015 से 2020 तक हर साल ख़बर छपती है कि इस साल अर्थव्यवस्था का सबसे बुरा दौर गुजर गया। जब 2015 में गुजर गया था तो फिर 2016 में कैसे गुजरा, 2017 में कैसे गुजरा? मीडिया प्रोपेगैंडा के कारण गुजरा। दरअसल, हम कभी बुरे दौर से बाहर ही नहीं।

रवीश ने कहा, “लोगों को काम नहीं मिल रहा है। नौकरियां नहीं मिल रही हैं। पांच-पांच महीने से सैलरी नहीं मिल रही है। प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर अभियान लाए हैं। कुछ ही महीने बाद इसकी बात बंद होगी और यह स्किल इंडिया की तरह बोगस साबित होगा।”

रवीश ने सेवा क्षेत्र में भारी गिरावट की बात करते हुए कहा, “जीएसटी से आमदनी घट गई है। कॉरपोरेट से आमदनी घट गई है। आयकर से भी कम ही मिलेगा, क्योंकि लोग कमा नहीं रहे हैं। साथ ही सरकार ने दो लाख करोड़ रुपए की आर्थिक मदद की है, गरीबों की। यानी अगर सरकार कर्ज न ले, तो भी कर्ज बढ़ ही जाएगा। अमेरिका में भी जीडीपी के अनुपात में कर्ज का हिस्सा 130 फीसदी हो गया है। लेकिन वहां लोगों के हाथ में पैसे दिए जा रहे हैं, बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है। यहां तो बेरोजगारों को मिली हुई नौकरी नहीं दी जा रही है। जाहिर है सरकार के पास पैसे की तंगी है।”

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