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Central Vista बना लुटियंस दिल्ली पर ‘अपना ठप्पा’ लगाना चाहते हैं नरेंद्र मोदी- किताब का जिक्र कर लेख के जरिए बोलीं पत्रकार

संजय बारू की नई किताब का जिक्र करते हुए कूमी कपूर कहती हैं- "भारत में अब वैश्विक उच्च वर्ग के बुद्धिजीवी और उदारवादियों को संदिग्ध के तौर पर देखा जाता है और इन्हें मध्यम वर्ग के हिंदू राष्ट्रवादियों से बदलने की कोशिश की जा रही है।"

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: May 9, 2021 12:23 PM
सेंट्रल विस्टा के निर्माण कार्य को लेकर पत्रकार ने मारा सरकार को ताना (फोटो क्रेडिट- इंडियन एक्सप्रेस आर्काइव)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त सिर्फ संस्थानों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि वे सेंट्रल विस्टा को खड़ा कर के लुटियंस दिल्ली पर भी अपना ठप्पा लगाना चाहते हैं। यह कहना है कि पत्रकार कूमी कपूर का, जिन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पूर्व सलाहकार संजय बारू की नई किताब- ‘इंडियाज पावर इलीटः क्लास, कास्ट एंड अ कल्चरल रेवोल्य़ूशन’ की समीक्षा करते हुए मौजूदा सरकार की ओर से भारत के ढांचे में किए जा रहे बदलाव की कोशिशों पर प्रकाश डाला है।

कूमी कपूर कहती हैं- “भारत में सत्ता कुलीन वर्ग के लगातार उभार पर बहस कोई नई धारणा नहीं है। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन में सत्ता कुलीन शब्द का नया मतलब बना है। देश में इस वक्त कुछ हद तक सत्ता संपन्न लोगों के प्रति लोगों का नजरिया भी बदला है और अब इसे बुरी छाया में पेश किया जाने लगा है। बारू जैसा देखते हैं, उसके मुताबिक, मोदी ने दिल्ली में सत्ता कुलीन वर्ग की पुरानी व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है और उसकी जगह एक विचारधारा पर आधारित प्रधानता वाले निर्विवाद वर्चस्व को थोपने की कोशिश में हैं।”

कपूर कहती हैं कि भारत में अब वैश्विक उच्च वर्ग के बुद्धिजीवी और उदारवादियों को संदिग्ध के तौर पर देखा जाता है और इन्हें मध्यम वर्ग के हिंदू राष्ट्रवादियों से बदलने की कोशिश की जा रही है। ऐसे राष्ट्रवादियों से जो जाहिर तौर पर इंडिया के बजाय भारत के बड़े लक्ष्य के लिए काम करें। इस नई आस्था पर किसी भी तरह का प्रतिवाद स्पष्ट शत्रुता के तौर पर देखा जाता है।

“मोदी पहले प्रधानमंत्री नहीं हैं, जिन्होंने अपने रास्ता एक गैर-कुलीन वर्ग से बनाया है। इससे पहले मनमोहन सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी और लाल बहादुर शास्त्री भी नम्र वर्ग से आते थे। हालांकि, वे सभी कभी भी इस बात पर इतना जोर नहीं देते थे। बल्कि मोदी से पहले के नेता आने के बाद लुटियंस दिल्ली का ही हिस्सा बनने की कोशिश में रहते थे और नेहरुकाल के कुलीन वर्ग को खुश करने में लगे रहते थे। उनकी जगह मोदी इस वर्ग में शामिल होने की कोई कोशिश करते नहीं दिखते। वे नेहरु-इंदिरा के समय के कुलीन वर्ग के सभी पुराने ऐतिहासिक चिह्नों को ध्वस्त करने की कोशिश में हैं। नेहरु के प्रति समर्पित मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी को बदलकर सभी प्रधानमंत्रियों के लिए करने का मोदी का फैसला इसी का एक उदाहरण है।”

आज के समय में असल सांस्कृतिक क्रांति और सत्ता परिवर्तन अंग्रेजी जानने वाले बुद्धजीवियों को स्थानीय भाषा जानने वाले लोगों से बदलने की नहीं है। बल्कि यह वैश्विक उच्च-वर्ग के बुद्धजीवियों को हटाकर मध्यम वर्गीय हिंदू राष्ट्रवादियों को लाने की है। अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के आसपास मौजूद ये नए बुद्धजीवी रोमिला थापर, मोंटेक सिंह अहलूवालिया जैसे लेफ्ट और राइट दोनों तरफ के पुराने बुद्धजीवियों को एक ही सामाजिक वर्ग में देखते हैं। वे इन स्थापनाओं को देसी सांस्कृति क्रांति से बदलना चाहते हैं।

मोदी सिर्फ संस्थानों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि वे सेंट्रल विस्टा बनाकर लुटियंस दिल्ली पर अपनी छाप छोड़ना चाहते हैं। आर्टिस्ट अनीश कपूर पीएम मोदी की ओर से लुटियंस दिल्ली की तबाही को उनकी राजनीतिक हठधर्मिता मानते हैं। मोदी इस वक्त खुद को नए हिंदू भारत के केंद्र में देखते हैं। जहां पुरानी व्यवस्था इसे संवेदनशीलता की कमी के तौर पर देख रहे हैं- जैसे दरवाजों पर खड़े बर्बर लोगों की तरह। लेकिन नया अभिलाषी वर्ग मानता है कि उन्हें आखिरकार एक मजबूत हिंदू नेता के जरिए अपना हिस्सा मिल रहा है।

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