झारखंड के हजारीबाग में मंगलवार को दो पत्रकारों की पिटाई कर दी गई। कथित तौर पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और कांग्रेस नेता इरफान अंसारी के समर्थकों ने घटना को अंजाम दिया। आरोप है कि पत्रकार ने मंत्री से कुछ सवाल पूछे थे, जो उन्हें अच्छा नहीं लगा। ऐसे में समर्थकों ने दोनों की पिटाई कर दी।

मारपीट का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। इस घटना ने स्थानीय पत्रकारों के बीच आक्रोश फैला दिया है। साथ ही विपक्ष ने भी अब इस मामले पर स्वास्थ्य मंत्री के साथ-साथ राज्य की हेमंत सोरेन सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पूरी घटना पर तीखी टिप्पणी की है।

बाबूलाल मरांडी ने साधा निशाना

उन्होंने एक्स पर घटना का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “हजारीबाग में सवाल पूछने पर नाराज स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के इशारे पर उनके एक दर्जन समर्थकों द्वारा पत्रकार के साथ मारपीट किए जाने की चिंताजनक सूचना मिली है। लोकतंत्र में सवाल पूछना पत्रकारों का अधिकार है, लेकिन वंशवाद के सहारे राजनीति करने वाले इरफान अंसारी जैसे लोग खुद को लोकतंत्र से ऊपर समझने लगते हैं और जनता को तुच्छ मानते हैं।”

नेता प्रतिपक्ष ने लिखा, “उनके द्वारा आए दिन आम जनता और पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन यदि आपके मंत्री को जनता के सवाल चुभ रहे हैं, तो उन्हें सलाह दें कि राजनीति छोड़कर घर बैठ जाएं। पत्रकारों के साथ मारपीट को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हजारीबाग पुलिस इरफान अंसारी के बदमिजाजी का इलाज बेहद जरूरी है। तत्काल इरफान अंसारी और उनके समर्थकों पर केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करें। हजारीबाद के डिप्टी कलेक्टर घायल पत्रकार के इलाज की समुचित व्यवस्था सुनिश्चत करें।”

दरअसल, मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे, जहां उन्होंने विभिन्न पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने पत्रकारों को संबोधित किया। इस दौरान पीड़ित पत्रकार ने चतरा एयर एंबुलेंस क्रैश के बारे में पूछा था और पीड़ितों को मुआवजा मिलने में देरी की बात कही थी। कथित तौर पर इस सवाल से मंत्री के समर्थक नाराज हो गए और देखते ही देखते माहौल बिगड़ गया।

बातचीत के बीच ही समर्थकों को एक समूह ने पत्रकार सुशांत सोनी और आशीष साव की पिटाई कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिस और मंत्री के आगे पूरी घटना हुई। उन्होंने एक बार भी बीच-बचाव की कोशिश नहीं की। बाद साथी पत्रकारों ने उन्हें बचाया और अस्पताल लेकर गए।