प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चेन्नई के रॉयपेट्टा से जुड़े कथित अवैध मनी ट्रांसफर मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके तहत सोमवार को ईडी अधिकारियों ने चेन्नई महानगर पुलिस से इस मामले से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां हासिल कीं। इस मामले में पुलिस पहले ही एक संदिग्ध के पास से 60 लाख रुपये की नकदी बरामद कर चुकी है। अब ईडी इस रकम के स्रोत और कथित धन लेनदेन के पूरे नेटवर्क की जांच करेगी।
विधायक ने लगाया 35 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश का आरोप
यह मामला तब सामने आया जब तमिलनाडु की सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के उथनकरई विधानसभा क्षेत्र से विधायक एन. इलैयाराजा ने चेन्नई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
अपनी शिकायत में विधायक ने आरोप लगाया कि तिरुनावुक्करासु नाम के एक व्यक्ति ने खुद को इंडियन पॉलिटिकल डेमोक्रेटिक स्ट्रैटेजीज (IDPS) नामक चुनावी सर्वेक्षण कंपनी का मालिक बताया। विधायक के अनुसार, आरोपी ने उनसे विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के खिलाफ लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए कहा। इसके बदले 35 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की पेशकश की गई। विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि प्रस्ताव ठुकराने पर उन्हें धमकी दी गई।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है जबकि ईडी अब इस कथित धन लेन-देन और बरामद नकदी के वित्तीय पहलुओं की अलग से जांच करेगी।
पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार
विधायक की शिकायत के बाद तिरुवल्लिकेनी (त्रिप्लिकेन) पुलिस की एक विशेष टीम ने मामले की गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने तिरुनावुक्करासु, उसके सहयोगी नरेश (त्रिची) और त्यागराजन (चेन्नई) को गिरफ्तार कर लिया।
जांच के दौरान आरोपियों के ठिकानों से 60 लाख रुपये की नकदी बरामद हुई। सूत्रों के अनुसार, पुलिस को ऐसे सबूत भी मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि यह रकम हवाला के जरिए इधर-उधर की गई हो सकती है।
जांच में सामने आया पूर्व मंत्री के भाई का नाम
पुलिस जांच में यह भी पता चला कि गिरफ्तार आरोपी नरेश ने चेन्नई के मेडावक्कम इलाके में वी. अशोक कुमार से मुलाकात की थी। अशोक कुमार, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के पूर्व मंत्री और वर्तमान कोयंबटूर दक्षिण से विधायक वी. सेंथिलबालाजी के भाई हैं।
पुलिस का दावा है कि जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि वी. सेंथिलबालाजी और उनके भाई अशोक कुमार के कहने पर ही तिरुनावुक्करासु ने विधायक एन. इलैयाराजा को कथित तौर पर रिश्वत देने की कोशिश की थी। हालांकि इस मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और अभी इन आरोपों पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।
सरकार को अस्थिर करने की साजिश
इस पूरे मामले को तमिलनाडु की राज्य सरकार को अस्थिर करने की कथित कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं इस कथित हॉर्स ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) मामले को लेकर तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मामले की जांच तेज करते हुए चेन्नई पुलिस आयुक्त ए. अमलराज को पत्र लिखकर केस से जुड़े सभी दस्तावेज मांगे। पुलिस ने ईडी के अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की पूरी केस डायरी और संबंधित दस्तावेज एजेंसी को सौंप दिए हैं। इसकी पुष्टि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने की है।
इस बीच 8 जुलाई 2026 को मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में आरोपी बनाए गए डीएमके विधायक और पूर्व मंत्री वी. सेंथिलबालाजी तथा उनके भाई वी. अशोक कुमार को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी थी।
अब ईडी इस मामले में कथित रिश्वत, हवाला के जरिए धन के लेन-देन और बरामद नकदी के स्रोत की विस्तृत जांच कर रही है।
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तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों सियासी भूचाल आने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा कि एआईएडीएमके के कई विधायक अपनी विधानसभा सीटों से इस्तीफा दे सकते हैं। साथ ही वे टीवीके में शामिल हो सकते हैं। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की पार्टी TVK गुप्त तरीके से हुई एक कवायद और तेज हो गई है। विजय की पार्टी के अंदरूनी लोग इस कवायद को अनौपचारिक रूप से “ऑपरेशन L” कह रहे हैं।
