AIADMK के बागी तीन विधायकों ने सोमवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया और तमिलगा वेट्री कडगम (टीवीके) में शामिल हो गए। अब टीवीके के इस कदम से तमिलनाडु के राजनीति में चर्चा शुरू हो गई है कि टीवीके अपनी बहुमत जुटाने की योजना में लगी हुई। टीवीके अकेले के दम पर बहुमत के आंकड़े 118 तक पहुंचना चाहती है।

साथ ही उसने अपना पहला कदम सोमवार को दुनिया के सामने ला दिया। AIADMK के तीन विधायक पेरुनदुरई से एस. जयकुमार, मदुरंतकम (SC) से के. मरगथम कुमारवेल, और धारापुरम (SC) से पी. सत्यभामा ने विधानसभा से इस्तीफ़ा दे दिया और उसके तुरंत बाद टीवीके में औपचारिक रूप से शामिल होने से पहले, TVK के वरिष्ठ नेता और मंत्री आधव अर्जुन से मुलाकात की।

विजय का है प्रयोग?

आधिकारिक तौर पर, AIADMK के तीनों बागियों ने विधायक पद से इस्तीफा भले ही दे दिया हो। लेकिन, राजनीतिक रूप से ऐसा लग रहा था कि वे एक अलग प्रयोग के लिए खुद से आगे आ रहे हैं जिससे वह बाद में होने वाले उपचुनावों में विजय के चुनाव चिह्न से फिर से चुनाव लड़ें और जीत सकें।

तमिलनाडु के राजनीति में इस ऑपरेशन को पहले ही उपनाम दिया जा चुका है। AIADMK के पूर्व मंत्री और महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के करीबी एक नेता ने मुस्कुराते हुए कहा, “ऑपरेशन L” जब उनसे पूछा गया कि इस “L” का मतलब क्या है, तो उन्होंने कहा, “लॉटरी या लीमा या लीव (छोड़ना)। आप इसे जिस भी तरह से समझना चाहें, समझ सकते हैं।”

AIADMK के नेता की यह टिप्पणी, कड़वाहट, व्यंग्य और हताशा से भरी हुई थी। यह टिप्पणी कुछ नेताओं पर थी जो उनकी पार्टी से हुए हैं। उनका इशारा TVK में मौजूद शक्तिशाली ‘अर्जुन’ (लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन के दामाद) और AIADMK विधायक लीमा रोज मार्टिन (मार्टिन की पत्नी) की आर्थिक रूप से मजबूत मौजूदगी की ओर था। पार्टी के कुछ तबके लीमा रोज को टीवीके गठबंधन के साथ किसी तरह के तालमेल के पक्ष में मानते हैं।

AIADMK के नेता की टिप्पणी AIADMK के चुनाव चिह्न “दो पत्तियाँ” (Two Leaves) पर किया गया एक गहरा व्यंग्य भी था, जिसका मतलब यह था कि जैसे-जैसे विधायक लगातार पार्टी “छोड़कर” (leaving) जा रहे हैं, पार्टी की उन दो पत्तियों में से एक पत्ती खुद ही झड़ती जा रही है।

रणनीति में बदलाव

TVK और AIADMK के सूत्रों के अनुसार, विजय की पार्टी ने आंतरिक तौर पर गठबंधन की रणनीति से हटकर बहुमत की रणनीति अपना ली है। इन आंकड़ों से ही इस जल्दबाजी की वजह साफ होती है।

TVK की अभी सदन में संख्या 107 है। कांग्रेस, CPI, CPI(M), VCK और IUML के समर्थन से विजय अभी आराम से सरकार चला रहे हैं। लेकिन टीवीके के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना ​​है कि एक ही करिश्माई नेता के इर्द-गिर्द बनी पहली पीढ़ी की कोई भी पार्टी, चुनाव के बाद बने सहयोगियों पर हमेशा के लिए निर्भर नहीं रह सकती इसलिए, लक्ष्य सीधा-सा है अकेले TVK से 118 विधायक।

विजय के इस्तीफे के बाद त्रिची पूर्व में उपचुनाव अब तय हो चुका है, ऐसे में TVK के रणनीतिकारों का मानना ​​है कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में एक साथ होने वाले उपचुनाव धीरे-धीरे गठबंधन सरकार को असल में एक-दलीय सरकार में बदल सकते हैं।

संगठनात्मक योजना से जुड़े TVK के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, “अगर ये सीटें एक साथ जाती हैं, तो गति मायने रखती है।” “जनता का मिजाज तब बदल जाता है, जब मतदाता यह मानने लगते हैं कि सरकार खुद को स्थिर कर रही है।”

और भी इस्तीफे संभव?

TVK के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में कम से कम सात या आठ और विधायकों के इस्तीफा देने की उम्मीद है। ये बातें राजनीतिक तौर पर काफी चौंकाने वाली है क्योंकि कुछ ही दिन पहले, सीवी शनमुगम और एसपी वेलुमणि के नेतृत्व वाला AIADMK का बागी गुट यह मान रहा था कि वे विजय के मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए बातचीत कर रहे हैं। बताया जाता है कि बातचीत के कई दौर मंत्री पदों के बँटवारे पर केंद्रित रहे, लेकिन वामपंथी दलों, VCK और अपने ही नेतृत्व के कुछ वर्गों के दबाव में आकर TVK ने अचानक यह विचार त्याग दिया। अब कई बागी विधायक खुद को फँसा हुआ महसूस हो रहा है।

विद्रोही गुट के एक वरिष्ठ नेता ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, “हम हैरान हैं। कई दिनों तक वे हमसे गठबंधन की व्यवस्थाओं के बारे में बात करते रहे। फिर अचानक वह योजना गायब हो गई और यह सब शुरू हो गया।”

TVK के भीतर भी बहस काफी तेज हो गई थी। जॉन अरोकियासामी और एन बुसी आनंद जैसे नेता कथित तौर पर AIADMK के बागियों को सरकार में शामिल करने के खिलाफ थे। उनका तर्क था कि इससे TVK की भ्रष्टाचार-विरोधी छवि कमज़ोर होगी और उन पर राजनीतिक सौदेबाजी के आरोप लगेंगे। वहीं, आधव अर्जुन और अन्य नेताओं ने स्थिरता और चुनावी समीकरणों का हवाला देते हुए उन्हें साथ लाने पर जोर दिया।

आखिरकार, विजय ने एक दूसरा रास्ता चुन लिया है। कैबिनेट के भीतर धर्मनिरपेक्ष सहयोगी, या कैबिनेट के बाहर AIADMK के बागी। लेकिन साथ ही व्यक्तिगत दलबदल के लिए दरवाजा खुला रखा।

दिलचस्प बात यह है कि TVK की पहुँच खास तौर पर उन विधायकों तक लग रही है जो राजनीतिक रूप से कमजोर हैं या तो वे AIADMK के अंदर सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ गए हैं, या फिर उनके पास मजबूत आर्थिक सहारा नहीं है। मरागाथम कुमारवेल और सत्यभामा, दोनों ही दलित विधायक हैं। TVK के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, सेलम और नामक्कल जिलों के दो और दलित AIADMK विधायक भी बातचीत कर रहे हैं। TVK के एक वरिष्ठ सूत्र ने माना, “सभी राजनीतिक दाँव-पेचों की तरह, इसमें भी एक सामाजिक समीकरण काम कर रहा है।”

AIADMK अब पार्टी जोड़ने में जुटी

इसी बीच, AIADMK खुद ही अब अपने घर के आग पर काबू करने की कोशिश में जुटी दिखी। जहां एक गुट इस्तीफा दे रहा है तो दूसरा गुट यानी बागी खेमा EPS के नेतृत्व के साथ सुलह करने के तरीके तलाश रहा है।

सोमवार को, जब तीन विधायकों ने पार्टी छोड़कर TVK में शामिल होने का फैसला किया, उसी समय बागी गुट के कम से कम पाँच विधायक EPS से उनके ग्रीनवेज़ रोड स्थित आवास पर मिले; पार्टी नेताओं ने इस मुलाक़ात को सुलह की एक कोशिश बताया। इसके साथ ही, EPS खेमे का दावा है कि पार्टी के मूल 47 विधायकों में से 27 का समर्थन उन्हें हासिल है।

लेकिन टीवीके के रणनीतिकारों ने इस कानूनी बाधा का समाधान ढूंढ लिया है। जिसमें बागी विधायकों को सीधे दल-बदल करने और अयोग्यता के मुकदमे का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा, बल्कि उन्हें नया मॉडल के तहत पहले इस्तीफा और बाद में उपचुनाव में लड़ाई का अपनाना है। यह रास्ता भले ही यग नैतिक रूप से उतना सरल न हो लेकिन कानूनी रूप से अधिक सुरक्षित है।

यह भी पढ़ें: ‘गहरा दुख और सदमा लगा’, 10 साल की बच्ची की किडनैपिंग और हत्या पर मुख्यमंत्री विजय बोले- ये बर्दाश्त नहीं

तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के अंतर्गत आने वाले सुलूर क्षेत्र की कन्नामपलयम झील के पास शुक्रवार को एक 10 साल की बच्ची घायल अवस्था में मृत पाई गई थी। बच्ची गुरुवार शाम से लापता था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने कथित तौर पर इस बच्ची का अपहरण किया और बाद में उसकी हत्या कर दी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें