TVK-Congress Alliance: तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के नतीजों में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। इसके बाद कांग्रेस ने अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया। इसको लेकर कुछ लोगों ने आश्चर्य जताया लेकिन ये कोई खास आश्चर्य की बात नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह राहुल गाधी और जोसेफ के बीच दोस्ती के 17 साल पुराने संबंध हैं।
राहुल गांधी और जोसेफ विजय के ये संबंध तब के हैं, जबकि विजय अपने स्टारडम की दहलीज पर थे, तो दूसरी ओर राहुल गांधी राजनीति में नए माने जाते थे। विजय के औपचारिक रूप से राजनीति में प्रवेश करने और 2024 में टीवीके की शुरुआत करने से बहुत पहले ही कांग्रेस के नेता उन्हें वैचारिक रूप से कांग्रेस से जुड़ा हुआ मानते थे।
2009 में ही लगने लगीं थी अटकलें
साल 2009 में विजय और राहुल गांधी बीच हुई शुरुआती बातचीत ने एक संभावित राजनीतिक साझेदारी के बारे में अटकलों को हवा दी थी। कांग्रेस नेताओं को अगस्त 2009 में विजय और गांधी की मुलाकात याद है, जो लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की 2004 की तुलना में बेहतर जनादेश के साथ सत्ता में वापसी के कुछ महीनों बाद हुई थी।
विजय उस वक्त लगभग 50 से फिल्मों में अपने अभिनय का दम दिखा चुके थे। वे “इलाया थलपति” के नाम से मशहूर हो चुके थे। उस वक्त को लेकर ये सवाल उठते हैं कि क्या विजय कांग्रेस में शामिल होने के इच्छुक थे, या राहुल गांधी उन्हें पार्टी में लाना चाहते थे? शायद इसका जवाब कहीं बीच में ही छिपा है।
आए दिन करते रहे एक-दूसरे से बातचीत
उस वक्त से ही दोनों (राहुल-विजय) के बीच रुक-रुक कर संपर्क बना हुआ है। विजय ने 2024 में टीवीके की शुरुआत के साथ औपचारिक रूप से राजनीति में प्रवेश करने के बाद गांधी को फोन किया था। विजय ने भी पिछले साल गांधी को उनके जन्मदिन पर बधाई देने के लिए फोन किया था। करूर भगदड़ के बाद भी दोनों ने बात की और हाल ही में तमिलनाडु चुनावों में विजय की शानदार चुनावी शुरुआत के बाद भी दोनों ने बातचीत की।
कांग्रेस की तरफ रहा विजय के पिता का झुकाव
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार 2009 में हुई दोनों दिग्गजों की बैठक तत्कालीन एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव गोपीनाथ पलानियप्पन द्वारा आयोजित की गई थी, जो इस चुनाव में इरोड (पूर्वी) से टीवीके उम्मीदवार से हार गए थे। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विजय के पिता, एस.ए. चंद्रशेखर, कांग्रेस की ओर झुकाव रखते थे और राहुल गांधी से मिलने के लिए ही अपने बेटे के साथ दिल्ली गए थे । इस बैठक ने तमिलनाडु में विजय की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर अटकलों का दौर शुरू कर दिया था।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार विजय को व्यक्तिगत रूप से जानने वाले पलानियप्पन ने इस मुलाकात का आयोजन किया था। राहुल गांधी उस समय युवा कांग्रेस के प्रभारी थे और आंतरिक चुनावों के माध्यम से संगठन का लोकतंत्रीकरण करने का प्रयास कर रहे थे। विजय ने पहले ही विजय मक्कल इयक्कम नामक एक संगठन का गठन कर दिया था, जो ऊपरी तौर पर सामाजिक सेवा पर केंद्रित था, लेकिन व्यापक रूप से इसे अपने प्रशंसक आधार को राजनीतिक आधार में बदलने के प्रयास के रूप में देखा जाता था।
राहुल गांधी को लेकर सकारात्मक रहा विजय का रुख
जोसेफ विजय ने बाद में बताया कि राहुल गांधी की पहल पर हुई इस मुलाकात के दौरान जो कुछ हुआ, वह आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है। विजय ने याद करते हुए बताया कि उनके एक शुभचिंतक ने राहुल गांधी का निमंत्रण उन तक पहुंचाया था। विजय ने कहा, “पहले तो मुझे लगा कि यह कोई मज़ाक हो सकता है। लेकिन यह एक अच्छा अवसर था… ऐसा मौका हर किसी को नहीं मिलता। मैं राहुल गांधी के लिए इतना बड़ा आदमी नहीं हूं कि वे मुझसे मिलें। लेकिन मुझे लगा कि इस अवसर को गंवाना नहीं चाहिए। एक दिन मैंने अपनी शूटिंग रद्द कर दी, अपने पिता के साथ दिल्ली गया और उनके घर पर उनसे मुलाकात की।”
विजय ने कहा कि राहुल गांधी ने जिस गर्मजोशी से उनका स्वागत किया, उससे वे बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा, “वे भारत में बदलाव लाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। उनका ध्यान युवाओं पर केंद्रित है। हाल ही में हुए संसद चुनावों के दौरान उन्होंने जो कदम उठाए और उसके परिणामस्वरूप जो परिणाम आए, हम सभी जानते हैं। ऐसे व्यक्ति का मुझसे मिलना मेरे लिए, मेरे प्रशंसकों के लिए और तमिलनाडु के लोगों के लिए गर्व की बात है।”
घंटे भर तक हुई थी बातचीत
खबरों के मुताबिक, दोनों ने राजनीति, सिनेमा और मक्कल इयक्कम के बारे में एक घंटे से अधिक समय तक बातचीत की। कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि राहुल गांधी ने विजय को तमिलनाडु युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद की पेशकश भी की थी। सितंबर 2009 में कोयंबटूर में एक जनसभा में विजय और गांधी के मंच साझा करने की भी योजना थी। हालांकि, विजय ने आखिरी समय में अपना नाम वापस ले लिया और बाद में कांग्रेस में शामिल होने की खबरों का खंडन किया। फिर भी उन्होंने संकेत दिया कि वे भविष्य में राजनीति में आने के लिए तैयार हैं।
कांग्रेस के एक नेता ने दावा किया कि विजय उस समय पार्टी में शामिल होने के इच्छुक थे। नेता ने कहा, “उनकी उम्र 35 के करीब थी। राहुल गांधी ने उन्हें युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने को कहा, जिसे वे आसानी से जीत सकते थे। लेकिन कुछ नहीं हुआ। डीएमके की तरफ से विजय पर चुनाव न लड़ने का दबाव था। तमिल फिल्म उद्योग पर करुणानिधि परिवार का पूरा नियंत्रण है।”
कांग्रेसी विचारधारा के समर्थक विजय
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि टीवीके का कांग्रेस के साथ गठबंधन करने का निर्णय अप्रत्याशित नहीं है, उनका तर्क है कि विजय की वैचारिक स्थिति लंबे समय से कांग्रेस के करीब रही है और उनका गठबंधन एक स्वाभाविक प्रगति थी। कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने कहा, “2009 में जब विजय दिल्ली में थे, तब हमारी उनसे मुलाकात हुई थी। हमने एनएसयूआई के कार्यों और एबीवीपी से उसकी भिन्नताओं पर चर्चा की थी। मुझे पूरी बातचीत याद नहीं है, लेकिन मुझे स्पष्ट रूप से याद है कि उन्होंने कहा था कि धर्मनिरपेक्षता संविधान के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है। वे सांप्रदायिक राजनीति में विश्वास नहीं करते थे।”
रागिनी नायक उस समय एनएसयूआई की महासचिव थीं। उन्होंने तत्कालीन एनएसयूआई अध्यक्ष हिबी ईडन, एनएसयूआई के राष्ट्रीय महासचिव अशोक बसोया और पलानियप्पन के साथ विजय से मुलाकात की। विजय ने तब भी राजनीतिक सूझबूझ दिखाई थी। अप्रैल 2009 में उन्होंने और उनके समर्थकों ने श्रीलंकाई तमिलों के समर्थन में चेन्नई में आठ घंटे का उपवास रखा और घोषणा की कि जब तमिल संकट में होंगे तो वे मूक दर्शक नहीं बने रहेंगे। एक कांग्रेस नेता ने कहा, “वे बीजेपी के बिना एआईएडीएमके के साथ गठबंधन करके सरकार बना सकते थे लेकिन उन्होंने कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चुना क्योंकि हमारी विचारधाराएं मिलती-जुलती हैं।”
‘ब्रह्मांड कभी गलती नहीं करता’, विजय का शपथ ग्रहण समारोह रद्द होने पर बॉडीगार्ड ने किया क्रिप्टिक पोस्ट
हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में इतिहास रचने के बावजूद अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से पीछे रह गए। उनकी पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 108 सीटें जीतीं, लेकिन बहुमत के लिए जरूरी संख्या से 10 सीट कम रह गई। इसी वजह से शनिवार को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह रद्द कर दिया गया, जिससे विजय मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए। पढ़िए पूरी खबर…
