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गुजरात: कभी खामोशी के लिए उड़ाया मजाक, अब बीजेपी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बने मनमोहन सिंह!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अतीत में मनमोहन सिंह की चुप्पी पर चोट करते रहे हैं।

Author नई दिल्ली | Published on: December 12, 2017 7:28 PM
देश के पूर्व पीएम मनमोहन सिंह विपक्ष के लिए अब मजबूत आवाज बन चुके हैं। (फाइल फोटो)

भाजपा कांग्रेस के जिस दिग्गज नेता को उनकी खामोशियों के लिए कोसते रहते थे, अब वही उनके लिए सबसे बड़ा सिर दर्द बन गए हैं। जी हां! बात हो रही है दो बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके डॉक्टर मनमोहन सिंह की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अतीत में मनमोहन सिंह की चुप्पी पर चोट करते रहे हैं। उन्हें ‘एक्सिडेंटल प्राइमिनिस्टर’ तक कहा गया था। अब वही मनमोहन सिंह पीएम मोदी के खिलाफ सबसे मजबूत आवाज बन चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री ने भाजपा सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना कर इसको साबित कर दिखाया है।

मनमोहन सिंह सरकार की आलोचना में जितनी बार बोले हैं, भाजपा उतनी बार असहज हुई है। उन्हें काउंटर करने के लिए हर बार प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को सामने आना पड़ा है। मालूम हो कि पूर्व में भाजपा कोई भी ऐसा मौका नहीं चूकती थी जब मनमोहन सिंह को कम करके दिखाया जा सके। उन्हें अब तक का सबसे कमजोर पीएम भी करार दिया गया था। हालांकि, प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद नरेंद्र मोदी ने मई 2015 में उन्हें आर्थिक और विदेश नीति पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया था। तब वह पहली बार भाजपा नेताओं और पार्टी पर नजर रखने वालों की निगाह में आए थे। स्वभाव के लिहाज से मोदी मनमोहन सिंह से ठीक उलट हैं। लेकिन, पिछले कुछ दिनों में उनका कद और ऊंचा हुआ है। पीएम मोदी के पाकिस्तान वाले बयान पर मनमोहन सिंह के अप्रत्याशित तौर पर बेहद सख्त बयान से भाजपा भौंचक्का रह गई थी। मोदी ने कांग्रेस पर पाकिस्तान के साथ मिलकर गुजरात चुनाव के लिए साजिश रचने का आरोप लगाया था। मनमोहन सिंह ने इसके लिए पीएम मोदी की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि राजनीति लाभ के लिए झूठ और अफवाह फैलाया जा रहा है। पूर्व पीएम ने कहा था कि इसके लिए मोदी को माफी मांगना चाहिए।

मोदी की आलोचना करने के लिए मनमोहन सिंह द्वारा चुने गए शब्दों से खुद कांग्रेस के नेता भी चौंक गए थे। उन्होंने कहा था, ‘गुजरात में आसन्न हार के भय से प्रधानमंत्री हर तरह के आरोप लगा रहे हैं, जिसे समझा जा सकता है।’ सूत्र बताते हैं कि पीएम मोदी का बयान सामने आने के बाद मनमोहन सामने आने के लिए तैयार नहीं थे, बल्कि वह चाहते थे कि पार्टी स्तर से ही इसका जवाब दिया जाए। लेकिन, भाजपा की ओर से लगातार हमलों के बाद उन्हें खुद बयान जारी करना पड़ा। मनमोहन सिंह का बयान सामने आने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली को मोर्चा संभालना पड़ा था।

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