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कोरोना वैक्सीन ट्रायल के शुरुआती नतीजे 90 फीसदी से ज्यादा असरदार, बोली दवा कंपनी Pfizer

कंपनी ने कहा कि आपूर्ति अनुमानों के आधार पर 2020 में वैश्विक स्तर पर पांच करोड़ वैक्सीन डोज और 2021 में 1.3 अरब डोज तक आपूर्ति करने की उम्मीद है।

Coronavirus Vaccine Tracker, Coronavirus Vaccine Tracker in World, Coronavirus Vaccine Tracker in IndiaCoronavirus Vaccine Tracker: तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण को रोकने पर दवा कंपनी ने बड़ा दावा किया है। कंपनी ने बताया कि शुरुआती नतीजों में ये वैक्सीन 90 फीसदी से ज्यादा असरदार साबित हो सकती है। ये वैक्सीन दुनिया की बड़ी दवा कंपनी फाइजर और बायोनटैक ने बनाई है। बता दें कि कंपनी के अधिकारियों ने कुछ दिन पहले ही कोविड-19 का टीका तैयार होने पर उम्मीद जताई थी।

फाइजर के अध्यक्ष और सीईओ अल्बर्ट बोरला के मुताबिक तीसरे चरण की टेस्टिंग से कोविड-19 को रोकने के लिए हमारे टीके की क्षमता का पता चला है। इधर कंपनी ने कहा कि आपूर्ति अनुमानों के आधार पर 2020 में वैश्विक स्तर पर पांच करोड़ वैक्सीन डोज और 2021 में 1.3 अरब डोज तक आपूर्ति करने की उम्मीद है।

दोनों कंपनियों ने इसे ‘विज्ञान और मानवता के लिए महान दिन’ बताया है। जानकारी के मुताबिक कंपनी इस महीने के अंत तक वैक्सीन के इस्तेमाल की अनुमति पाने के लिए आपात आवेदन करेंगी। इसके टीके को अब तक छह देशों में 43,500 लोगों पर टेस्ट किया जा चुका है। सुरक्षा को लेकर कोई चिंताएं सामने नहीं आई हैं।

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इधर अमेरिका में वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे रासायनिक यौगिकों का पता लगाया है, जो कोरोना वायरस को मानवीय कोशिकाओं में प्रवेश करने और अपने जैसे और वायरस पैदा करने के लिए आवश्यक दो प्रोटीन को बाधित करने में सक्षम हैं। इस यौगिक की मदद से कोविड-19 का प्रभावी टीका बनाने में मदद मिल सकती है।

कोविड-19 के लिए जिम्मेदार ‘सार्स-कोव-2’ वायरस कई चरणों में शरीर पर हमला करता है। यह पहले फेफड़ों में प्रवेश करता है और मानवीय शरीर के कोशिका तंत्र पर कब्जा करके अपने जैसे कई वायरस पैदा कर देता है। ये दोनों शुरुआती चरण संक्रमण के लिहाज से अहम हैं।

‘साइंस एडवांसेज’ पत्रिका में प्रकाशित नए अध्ययन में पाया गया कि कई मौजूदा रासायनिक यौगिक मानव कोशिकाओं में संक्रमण के लिए आवश्यक ‘लाइजोसोमल प्रोटीज कैथेप्सीन एल’ प्रोटीन और कोशिकाओं में और वायरस पैदा करने में अहम भूमिका निभाने वाले मुख्य प्रोटीज ‘एप्रो’ को बाधित कर सकते हैं।

अमेरिका स्थित ‘यूनिर्विसटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा हेल्थ’ में एसोसिएट प्रोफेसर यू चेन ने कहा कि यदि वैज्ञानिक इन दोनों प्रक्रियाओं को रोकने या बहुत हद तक काबू करने में सक्षम यौगिकों को विकसित कर लें, तो इससे कोरोना वायरस संक्रमण के उपचार में मदद मिल सकती है। यह अनुसंधान करने वाली टीम में यूनिर्विसटी ऑफ एरिजोना के अनुसंधानकर्ता भी शामिल हैं। (एजेंसी इनपुट)

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