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चश्मा उतारकर दिखाया कि मैं देख नहीं सकता, फिर भी पीटती रही पुलिस- JNU छात्र की आपबीती

JNU protests: एक दृष्टि बाधित छात्र का कहना है कि उससे मारपीट की गई। एक पूर्व छात्र को सिर में पांच टांके लगे हैं। वहीं, एक अध्यापक का कहना है कि पहचानने के बावजूद उन्हें लात मारी गई और लाठियों से पीटा गया।

Author नई दिल्ली | Updated: November 19, 2019 11:47 AM
इस तस्वीर को आप सांसद संजय सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा- युवाओं छात्रों से इतनी नफ़रत । ये हैं शशिभूषण पांडेय। एक नेत्रहीन JNU का छात्र। किस बर्बरता से दिल्ली पुलिस ने इनको पीटा है आप खुद देखिये।

फीस बढ़ोत्तरी के खिलाफ जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सोमवार को जमकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने संसद भवन तक मार्च निकालने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस का दावा है कि छात्रों को रोकने के लिए किसी तरह का बल इस्तेमाल नहीं किया गया। हालांकि, लहूलुहान चेहरे, फटे कपड़े और लाठी भांजते पुलिसवालों को देख दूसरी ही कहानी समझ में आती है।

एक दृष्टि बाधित छात्र का कहना है कि उससे मारपीट की गई। एक पूर्व छात्र को सिर में पांच टांके लगे हैं। वहीं, एक अध्यापक का कहना है कि पहचानने के बावजूद उन्हें लात मारी गई और लाठियों से पीटा गया। जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के स्टूडेंट यूनियन काउंसलर शशि भूषण ने बताया कि लाठीचार्ज के दौरान वह जमीन पर गिर पड़े और उनके सीने पर पुलिस ने बूटों से वार किया। उन्होंने कहा, ‘मैंने उन्हें बताया कि मैं दृष्टि बाधित हूं। मैंने उन्हें चश्मा उतारकर दिखाया ताकि पुलिसवाले यह समझ जाएं लेकिन वे नहीं रुके। वे मुझे मारते रहे।’ बता दें कि शशि भूषण को एम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराना पड़ा।

लहूलुहान जेएनयू छात्रों की तस्वीरें देखने के लिए फोटो पर करें क्लिक

वहीं, पिछले साल पीएचडी हासिल कर चुके जेएनयू के पूर्व छात्र संदीप के लुईस ने कहा, ‘जैसी ही बैरिकेड टूटा, उन्होंने छात्रों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। मेरे साथ भी पुलिसवालों ने धक्कामुक्की की। उनमें से एक ने मेरा पैर खींचा जिससे मेरा संतुलन बिगड़ा और सिर फुटपाथ से टकरा गया। मेरे सिर में पांच टांके लगाने पड़े।’ स्पेनिश से बीए दूसरे वर्ष के छात्र सुधांशु राज को भी शरीर के ऊपरी हिस्से में काफी चोटें आई हैं। उनका आरोप है कि पुलिसवालों ने उन्हें चेहरे के बल जमीन पर घसीटा।

(एक्सप्रेस फोटो: प्रवीण खन्ना)

छात्रों को रोकने गए कुछ अध्यापकों को भी नहीं बख्शा गया। जेएनयू टीचर्स असोसिएशन के सचिव सुरजीत मजूमदार ने कहा, ‘मुझे लात मारी गई, लाठी से मारा गया और धक्का दिया गया। दूसरे सहकर्मियों को भी सीने पर धक्का मारा गया। उन्हें अच्छी तरह पता था कि हम टीचर हैं, उन्होंने अनजाने में ऐसा नहीं किया। उन्होंने हमसे पूछा कि तुम लोग किस तरह के टीचर हो?’ वहीं, छात्रों को लगी चोटों के बारे में पूछे जाने पर दिल्ली पुलिस के प्रवक्त मंदीप सिंह रंधावा ने दावा किया कि बैरिकेट लांघने और उसे तोड़ने की कोशिश में छात्रों ने खुद को घायल कर दिया।

 

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