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फिर विवादों से घिरा JNU, अब मुजफ्फरनगर दंगों पर डॉक्यूमेंट्री दिखाने का मामला, यूनिवर्सिटी ने पुलिस को भेजी रिपोर्ट

JNU परिसर में बीते 9 फरवरी को हुए विवादास्पद कार्यक्रम के लिए दी गई सजा के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने विरोध करते हुए मुजफ्फरनगर दंगों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया।

Author नई दिल्ली | April 30, 2016 9:55 AM
JNU कैंपस में अनिर्बान भट्टाचार्य और उमर खालिद। (Express Photo by Ravi Kanojia)

JNU परिसर में बीते 9 फरवरी को हुए विवादास्पद कार्यक्रम के लिए दी गई सजा के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने विरोध करते हुए मुजफ्फरनगर दंगों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया। इस बीच, विश्वविद्यालय प्रशासन ने दिल्ली पुलिस की आतंकवाद विरोधी इकाई स्पेशल सेल को अपनी रिपोर्ट भेज दी है जो परिसर में संसद हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी के खिलाफ कार्यक्रम आयोजित किए जाने के संदर्भ में दर्ज देशद्रोह के मामले की जांच कर रही है।

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विश्वविद्यालय प्रशासन ने पिछले साल अगस्त में मुजफ्फरनगर दंगे के संबंध में एक फिल्म के प्रर्दशन में भागीदारी के लिए अनिर्बान भट्टाचार्य को कारण बताओ नोटिस भेजने के एक दिन बाद आज उसी तरह का नोटिस उमर खालिद को भेज उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। कैंपस में 9 फरवरी को हुए विवादास्पद कार्यक्रम के मामले में अनिर्बान और उमर को पहले ही निष्कासित किया जा चुका है। विश्वविद्यालय की इजाजत के बिना डॉक्यूमेंट्री ‘मुजफ्फरनगर अभी बाकी है’ के प्रदर्शन के मामले में दोनों को ताजा नोटिस भेजा गया है।

JNU row: नौ महीने बाद अनिर्बान को मिला कारण बताओ नोटिस

प्रशासन की तरफ से “निशाना” बनाए जाने का आरोप लगाते हुए JNU छात्र संघ ने विरोध में आज रात उसी डॉक्यूमेंट्री का फिर से प्रदर्शन किया। उमर को जारी नोटिस में कहा गया है, “अगस्त 2015 में मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय में आपके खिलाफ एक शिकायत आयी थी। आरोप है कि आप प्रशासन की अनुमति के बिना गोदावरी ढाबा के निकट डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘मुजफ्फरनगर अभी बाकी है’ के प्रदर्शन के आयोजन में शामिल थे।” इसमें कहा गया है, “चार मई को प्रॉक्टर के सामने आपको पेश होने का निर्देश दिया जाता है और इस संबंध में आप स्पष्टीकरण देंगे। अगर आपको अपने बचाव में कुछ कहना या पेश करना है तो आप ला सकते हैं।”

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