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वीडियो: अनंतनाग उपचुनाव स्थगित होने पर कांग्रेस-एनसी नेताओं ने लगाए “भारतीय लोकतंत्र मुर्दाबाद, इंडियन डेमोक्रेसी हाय-हाय” के नारे

श्रीनगर लोकसभा उपचुनाव के दौरान रविवार को कई इलाकों में व्यापक हिंसा और बेहद कम मतदान होने के बाद सत्तारूढ़ पीडीपी ने अनंतनाग उपचुनाव टालने की अपील की थी, जिसके बाद चुनाव आयोग ने उपचुनाव की तारीख को 25 मई तक के टाल दिया है।

श्रीनगर उप चुनाव में हुई हिंसा को देखते हुए चुनाव आयोग ने सोमवार को अनंतनाग लोकसभा सीट पर चुनाव को टाल दिया। यह चुनाव 12 अप्रैल को होना था। सत्तारूढ़ पीडीपी ने अनंतनाग उपचुनाव टालने की अपील की थी, जबकि विपक्षी कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस ने 12 अप्रैल को तय समय पर चुनाव कराने की मांग की थी। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के सदस्यों ने चुनाव टाले जाने को लेकर अनंतनाग के डीसी (डिप्टी कमिश्नर) के घेराव किया। यही नहीं दोनों पार्टियों के सदस्यों ने भारतीय लोकतंत्र मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। चुनाव टालने को लेकर दोनों पार्टियों के सदस्य डीसी के दफ्तर पर पहुंच गए और भारतीय लोकतंत्र हाय-हाय और इंडियन डेमोक्रेसी मुर्दाबाद के नारे लगाए। इस विरोध प्रदर्शन का वीडियो भी सामने आया है।

श्रीनगर लोकसभा उपचुनाव के दौरान रविवार को कई इलाकों में व्यापक हिंसा और बेहद कम मतदान होने के बाद सत्तारूढ़ पीडीपी ने अनंतनाग उपचुनाव टालने की अपील की थी, जिसके बाद चुनाव आयोग ने उपचुनाव की तारीख को 25 मई तक के टाल दिया है। जिसका की कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विरोध किया। सोमवार को दिन में अनंतनाग से पीडीपी के उम्मीदवार तसद्दुकमुफ्ती ने चुनाव आयोग से अनंतनाग लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव की तारीख टालने की अपील की। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के छोटे भाई तसद्दुक ने मुख्यमंत्री के घर के परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘मैं चुनाव आयोग से स्थिति सुधरने तक चुनाव टालने की अपील करता हूं। यह मेरा अनुरोध है।’

वहीं, पीडीपी की ओर से की गई इस अपील को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह उनकी बहन के नेतृत्व वाली सरकार पर आक्षेप है। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा, ‘तसद्दुक का बयान उनकी बहन महबूबा मुफ्ती की सरकार और उसकी विफलता पर आक्षेप है। भाजपा इसे कैसे नहीं देख पा रही है।’उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘चुनाव आयोग को अनंतनाग चुनाव स्थगित करने या उसे रद्द करने का अधिकार है लेकिन अगर ऐसा होता है तो महबूबा मुफ्ती को अवश्य इस्तीफा देना चाहिए और राज्यपाल को कार्यभार संभाल लेना चाहिए।’

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