ताज़ा खबर
 

जम्मू-कश्मीर: कुछ दिन की हिरासत कह ले गई थी पुलिस, पर तीन महीने रखा नजरबंद, RTI एक्टिविस्ट ने बताई डिटेंशन सेंटर की कहानी

इस सप्ताह के शुरुआत में भट्ट ने इंडियन एक्सप्रेस को कन्वेंशन सेंटर से बनी उप जेल के बारे में विस्तृत विवरण दिए। जहां अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद राजनेताओं और गिरफ्तार लोगों को रखा गया।

RTI activist Raja Muzaffar Bhatआरटीआई एक्टिविस्ट रजा मुजफ्फर भट्ट। (ट्विटर)

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त होने के बाद प्रदेश में कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं, आरटीआई कार्यकर्ताओं और नेताओं सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को हिरासत में ले लिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में आरटीआई एक्टिविस्ट रजा मुजफ्फर भट्ट भी शामिल हैं। पांच अगस्त की सुबह तीन बजे एसएचओ भट्ट के घर पहुंचे और बताया गया कि कुछ दिनों के लिए उन्हें हिरासत में लिए जाने के आदेश मिले हैं। उन्हें बडगाम जिले के स्थानीय चदूरा पुलिस स्टेशन में रखा जाएगा। हिरासत में लिए जाने के आदेश के चलते भट्ट ने अपनी पत्नी, माता-पिता और बच्चों को बताया कि वो कुछ दिन की यात्रा पर जा रहे हैं और जल्द ही लौट आएंगे। हालांकि जब वो घर लौटे तो करीब तीन महीने बीत चुके थे। श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में बने नजरबंदी गृह से भट्ट को 28 अक्टूबर को रिहा किया गया।

इस सप्ताह के शुरुआत में भट्ट ने इंडियन एक्सप्रेस को कन्वेंशन सेंटर से बनी उप जेल के बारे में विस्तृत विवरण दिए। जहां अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद राजनेताओं और गिरफ्तार लोगों को रखा गया। भट्ट कहते हैं जिस एसएचओ ने उन्हें हिरासत में लिया था उसके पास सेटेलाइट फोन था। हिरासत में लिए जाने के उसने लिखित में भी कोई ऑर्डर नहीं दिखाए। वह बार-बार यही कहता रहा, ‘ऊपर से ऑर्डर हैं।’

चदूरा पुलिस स्टेशन में कुछ दिन रखने के बाद भट्ट को भी SKICC भेज जिया गया। पुराने दिनों को याद करते हुए वह कहते हैं ‘बहुत से लड़कों के साथ मुझे रखा गया था, जिन्हें चार अगस्त को उठाया गया था। उस पुलिस स्टेशन में सीआरपीएफ कर्मियों की संख्या आश्चर्यजनक थी।’ चूंकि मकबूल और उन्हें SKICC में स्थानांतरित किया जा रहा था। भट्ट कहते हैं, ‘इस दौरान श्रीनगर की मुख्य सड़क पर पत्थरबाजों ने पुलिस काफिले पर हमला कर दिया। वहां खूब पत्थरबाजी हुई। हालांकि हम बुलेटप्रूफ वाहन में थे, मगर ये भयानक था।’

भट्ट कहते हैं कि जब वो SKICC पहुंचे वहां पहले से दो दर्जन से अधिक राजनेता हिरासत में थे। भट्ट के मुताबिक, ‘हकीम यासीन (पूर्व पीडीपी मंत्री), वहीद पारा (युवा अध्यक्ष और पीडीपी प्रवक्ता), सज्जाद लोन (पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष), इमरान रजा अंसारी (पूर्व मंत्री), अली मोहम्मद सागर, मुबारक गुल (पूर्व विधायक नेशनल कॉन्फ्रेंस)… कुछ दिनों बाद नईम अख्तर (पूर्व मंत्री) को लाया गया। इसके बाद वो शाह फैजल (पूर्व आईएएस अधिकारी और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट के नेता) को ले आए।’

भट्ट कहते हैं, ‘हिरासत में लिए गए लोगों में मैं अकेला था जो राजनीतिक पृष्ठभूमि से नहीं था। एक आरटीआई एक्टिविस्ट के तौर पर मैंने कुछ राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे उठाए थे। एक स्तंभकार के रूप में मैंने अनुच्छेद 370 और 35ए को खत्म करने के खिलाफ कुछ कॉलम लिखे थे। लेकिन मैं समझ नहीं पाया कि मुझे हिरासत में क्यों लिया गया। मुझे साथी कैदियों के लिए अधिक खेद महसूस हुआ। इनमें बहुत से लोग ऐसे थे जिन्होंने कश्मीर में भारतीय झंडा फहराया था। दिल्ली की साइड में आने पर अपनी जान तक जोखिम में डाल दी।’

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 आतंकी हमले का आरोप झेल रही बीजेपी सांसद रक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति में नामित, UAPA में हैं अंडरट्रायल
2 BJP विधायक का आरोप- बेटी की डिलीवरी के लिए करना पड़ा 12 घंटे इंतजार, सरकारी अस्पताल में नहीं मिले डॉक्टर
3 BHU में ज्वाइनिंग के बाद से विरोध झेल रहे मुस्लिम प्रोफेसर थे अंडरग्राउंड, अब घर गए तो समर्थन में उतरा छात्रों का दूसरा ग्रुप
यह पढ़ा क्या?
X