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फर्जी डिग्री विवाद: अवध विश्वविद्यालय ने तोमर की डिग्री को बताया जाली

tomar fake degree row: फर्जी डिग्री विवाद में गिरफ्तार किए गए दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जीतेंद्र सिंह तोमर की मुश्किलें बढ़ाते हुए आरएमएल

Author , Updated: June 11, 2015 11:02 AM

फर्जी डिग्री विवाद में गिरफ्तार किए गए दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जीतेंद्र सिंह तोमर की मुश्किलें बढ़ाते हुए आरएमएल अवध विश्वविद्यालय ने बुधवार को इस बात से इनकार किया कि तोमर ने उनके यहां से स्नातक किया है। तोमर ने इसी विश्वविद्यालय से स्नातक करने का दावा किया है।

दिल्ली पुलिस का एक दल तोमर को उत्तर प्रदेश के फैजाबाद ले गया और अवध विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार कार्यालय में और साकेत डिग्री कालेज में दस्तावेजों की जांच की और उन्हें सीलबंद लिफाफे में ले लिया। तोमर को बाद में बिहार के मुंगेर ले जाया गया। फैजाबाद जाते हुए लखनऊ में तोमर ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप झूठे हैं। उन्होंने केंद्र पर साजिश रचने का आरोप लगाया।

मंगलवार को अपनी गिरफ्तारी के बाद दिल्ली के कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे चुके तोमर ने अवध विश्वविद्यालय से बीएससी करने का दावा किया है। आप नेता का दावा है कि उनकी डिग्री सही है। तोमर को आधी रात के करीब ट्रेन से लखनऊ ले जाया गया और बाद में सड़क रास्ते से फैजाबाद ले जाया गया। उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘मेरी डिग्री पूरी तरह सही है। यह भाजपा और केंद्र सरकार की साजिश है। हां, वे आप सरकार को काम नहीं करने दे रहे’।

इस मामले की जांच में सहयोग की इच्छा प्रकट करते हुए विश्वविद्यालय अपने इस रुख पर कायम है कि तोमर की बीएससी की डिग्री फर्जी है। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी एसएन शुक्ला ने कहा, ‘प्रदीप कुमार नामक व्यक्ति ने तोमर की अंकतालिका व डिग्री से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन की मांग करते हुए आरटीआइ आवेदन दिया था। विश्वविद्यालय ने 22 जनवरी को जवाब दिया था कि उसके रिकार्ड में ऐसा कुछ नहीं है। हम अपने पिछले रुख पर कायम हैं। वे तोमर की बीएससी डिग्री के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे।

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तोमर ने बिहार के तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध विधि महाविद्यालय वीएनएसएल स्टडीज से एलएलबी की डिग्री हासिल करने का भी दावा किया था। दिल्ली के त्रिनगर से आप विधायक 49 साल के तोमर को दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था। उन्हें एसीपी स्तर के एक अधिकारी सात अन्य पुलिसकर्मियों के साथ फैजाबाद लेकर गए।

दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि करीब महीने भर चली जांच में पता चला कि तोमर ने बार काउंसिल आॅफ दिल्ली में पंजीकरण के लिए न केवल फर्जी स्नातक डिग्री और विधि की अंकतालिका जमा की बल्कि फर्जी माइग्रेशन प्रमाणपत्र भी दिया। कथित फर्जी डिग्रियों के पीछे कोई संगठित गिरोह होने की आशंका के मद्देनजर भी जांच की जा रही है और दिल्ली पुलिस के आयुक्त बीएस बस्सी ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में पत्रकारों से कहा, ‘क्या उन्होंने इसे खुद तैयार किया अथवा इसे कहीं और से खरीदा। अगर इन्हें कहीं और से खरीदा गया, तब उन लोगों को घेरे में लेना जरूरी होगा, जिन्होंने ये दस्तावेज मुहैया कराए। और अगर कोई गिरोह है तो किन अन्य लोगों को इस तरह के दस्तावेज मुहैया कराए गए’।

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बस्सी ने कहा, ‘इसलिए देश के शैक्षणिक मानकों को बनाए रखने के लिए हम ऐसे गिरोह चलाने वालों को गिरफ्तार करना चाहते हैं और उनसे व्यापक पूछताछ करना चाहते हैं और उन सभी तक पहुंचना चाहते हैं जिन्हें इन लोगों ने ऐसे दस्तावेज मुहैया कराए होंगे और सभी पर मुकदमा चलाना चाहते हैं। हम सभी को पकड़ना चाहते हैं, चाहे वह सरकारी अधिकारी हो या कोई अन्य व्यक्ति’।

इस मामले में हमला बोलते हुए कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन ने मांग की कि तोमर की गिरफ्तारी के मद्देनजर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि तोमर की फर्जी डिग्री का मुद्दा विधानसभा चुनावों से पहले आप के भीतर उठा था, लेकिन केजरीवाल ने इसकी अनदेखी की। तोमर को न केवल आप का टिकट दिया गया, बल्कि उन्हें मंत्री भी बना दिया गया।

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