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दबाव में काम करने के बजाय पद छोड़ें नीतीश : मांझी

जीतन राम मांझी ने बिहार में ताज किसी के सिर पर और शासन किसी और का चलने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सलाह दी है कि बेवजह बदनामी मोल लेने के बजाए उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए..

Author पटना | January 7, 2016 9:44 PM
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी। (फाइल फोटो)

राजग के घटक दल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) सेक्युलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार में ताज किसी के सिर पर और शासन किसी और का चलने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सलाह दी है कि बेवजह बदनामी मोल लेने के बजाए उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। पटना स्थित अपने सरकारी आवास पर गुरुवार को पत्रकारों से राजद प्रमुख लालू प्रसाद के हाल में पटना स्थित इंदिरा आयुविर्ज्ञान संस्थान (आइजीआइएमएस) का कथित तौर पर निरीक्षण किए जाने की मीडिया में आई खबरों का जिक्र करते हुए मांझी ने इसे लोकतांत्रिक दृष्टि से अनुचित करार दिया। उन्होंने कहा ‘हिंदुस्तान में मीडिया में बिहार को लेकर चर्चा है कि ताज किसी और का राज किसी और का। बिहार में अगर ताज माना जाए तो नीतीश कुमार के माथे पर है लेकिन राज कौन कर रहा है। आइजीआइएमएस में जाकर जो निर्देश दिया गया उससे न सिर्फ बिहार बल्कि हिंदुस्तान के लोग समझते हैं कि वाकयी राज किसका है।

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मांझी ने कहा ‘अगर नीतीश कुमार बेचारा हो गए हैं। वे किसी के दबाव में इतना हैं कि कोई एक्शन नहीं ले सकते तो मेरी समझ ने उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए ताकि बिहार में सचमुच जिनका राज है वे ही सत्ता चलाएं, नीतीश बदनाम क्यों हो रहे हैं’। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जी से वे हमदर्दी रखते हैं क्योंकि उन्होंने उन्हें बिहार में मुख्यमंत्री बनने का अवसर प्रदान किया था इसलिए वे उन्हें एक बेहतर सलाह दे रहे हैं कि ऐसी परिस्थिति में वे बिहार के मुख्यमंत्री के पद पर बने रहकर अपना नाम बदनाम न करें क्योंकि यह उचित नहीं है। मांझी ने बिहार में महागठबंधन (जद एकी-राजद-कांग्रेस) की सरकार बनने के बाद से बढ़ते अनुचित दबाव के कारण प्रदेश में तैनात करीब 35 आइएएस और आइपीएस के लिखित रूप से इस राज्य में काम नहीं करने और कें्रदीय प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने की इच्छा जताए जाने का दावा करते हुए आरोप लगाया कि इससे भी बिहार में शासन व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

दरभंगा और वैशाली जिलों में अभियंताओं की हत्या सहित प्रदेश में बैंक डकैती, लूट, अपहरण, रंगदारी और हत्या की वारदात का जिक्र करते हुए मांझी ने बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि पिछले 60 दिनों के भीतर प्रदेश में करीब 600 आपराधिक घटनाएं घटी हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ठोस कार्रवाई करने के बजाए ‘गीदड़ भभकी’ देने में लगे हैं। उन्होंने दरभंगा में लेवी (अवैध राशि) नहीं दिए जाने पर दो अभियंताओं की हत्या की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि चिंता की बात यह है कि अब विधायकों से भी रंगदारी की मांग की जा रही है। मांझी का इशारा पूर्वी चंपारण जिले के गोविंदगंज विधानसभा क्षेत्र से लोजपा विधायक राजू तिवारी को धमकी भरा एसएमएस भेजकर उनसे दस लाख रुपए रंगदारी की मांग किए जाने की ओर था।

मांझी ने ‘रोम जल रहा था और पोप बांसुरी बजा रहा था’ उक्ति को दोहराते हुए कहा कि जिस दिन दरभंगा में दो अभियंताओं की हत्या की गई उस दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर्यटन स्थल राजगीर में ‘तितली और गोरैया पालन’ (पक्षी अभयारण्य) की स्थापना में लगे हुए थे। उन्होंने प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति के बदतर होने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब अभियंता और ठेकेदार यहां काम करना नहीं चाहते हैं और मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है।

बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह के निर्देश पर संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत बुधवार को जद (एकी) के बागी सदस्यों नरेंद्र सिंह और सम्राट चौधरी और इससे पूर्व महाचंद्र प्रसाद सिंह की सदन से सदस्यता रद्द किए जाने को अलोकतांत्रिक, सिद्धांत से परे, बेबुनियाद और बिना ठोस आधार के कार्रवाई बताते हुए मांझी ने कहा कि ऐसा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दबाव में किया गया। उन्होंने आरोप लगाते हुए सवाल खड़ा किया कि जद (एकी) ने अपने बागी पूर्व विधायकों अन्नु शुक्ला व रेणु कुशवाहा और पूर्व सांसद ललन सिंह के खिलाफ कार्रवाई की।

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