पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण देशभर में ईंधन की समस्या उतपन्न हो गई है। आम लोगों को पेट्रोल-डीजल के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है। ऐसे में इन परेशानियों के बीच रोजमर्रा के कामों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। हालांकि, झारखंड के एक शिक्षक ने इन परेशानियों का ऐसा अनोखा तरीका निकाला है, जिस कारण वह सोशल मीडिया पर छा गए हैं।
राज्य के कई पेट्रोल पंपों पर फ्यूल की कमी के बीच गढ़वा जिले के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक अपनी जनगणना ड्यूटी के लिए घोड़े पर सवार होकर जा रहे हैं। उन्होंने मोटरसाइकिल की जगह अपने पुराने पारिवारिक घोड़े का इस्तेमाल कर दूरदराज गांवों में सर्वे का काम शुरू कर दिया है।
गढ़वा के धुरकी प्रखंड के तातिदीरी गांव स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय में सहायक शिक्षक 43 वर्षीय मुन्ना प्रसाद गुप्ता ने बताया कि हाल के दिनों में पेट्रोल की कमी और लंबी कतारों के कारण उन्होंने घोड़े से जनगणना कार्य करने का फैसला लिया। उन्होंने कहा, “पेट्रोल आसानी से नहीं मिल रहा था। पंप पर लंबी लाइनें लग रही थीं। मैंने सोचा कि लाइन में समय बर्बाद करने के बजाय कोई दूसरा तरीका अपनाया जाए। हमारे परिवार में यह घोड़ा कई वर्षों से है, इसलिए मैंने इसी से जाना शुरू किया।”
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मुन्ना प्रसाद सफेद ड्रेस और सरकारी जनगणना कैप पहनकर भूरे रंग के घोड़े पर गांवों की पगडंडियों से गुजरते नजर आ रहे हैं। उनके साथ सर्वे से जुड़ा सामान भी दिख रहा है। मुन्ना ने बताया कि घोड़ा उन गांवों तक पहुंचने में भी मददगार साबित हो रहा है जहां कच्चे और संकरे रास्तों पर बाइक से जाना मुश्किल है।
उन्होंने कहा, “ऐसी जगहों पर हम घोड़े से घर-घर जाकर लोगों की स्थिति समझ सकते हैं और नक्शा तैयार कर सकते हैं।” उन्होंने बताया कि उनके परिवार में पहले से घोड़े रखने की परंपरा रही है। बचपन में उन्होंने अपने पिता से घुड़सवारी सीखी थी। गांवों में घोड़े पर पहुंचने पर बच्चे काफी उत्साहित हो जाते हैं।
मुन्ना ने कहा, “2018-19 के बाद जन्मे कई बच्चों ने घोड़ा सिर्फ तस्वीरों में देखा था। वे पास आकर उसे देखकर बहुत खुश होते हैं।” 25 नवंबर 2003 से शिक्षक के रूप में कार्यरत मुन्ना प्रसाद ने बताया कि यह उनकी पहली जनगणना ड्यूटी है। उन्होंने स्कूल की छुट्टी होने के बावजूद शनिवार से ही काम शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा, “मैंने सोचा कि अगर भारत सरकार ने मुझे यह जिम्मेदारी दी है तो इसे पूरी ईमानदारी से तुरंत शुरू करना चाहिए।” गौरतलब है कि जनगणना के इस चरण में घरों की सूची तैयार करना और ‘नजरी नक्शा’ बनाना शामिल है। मुन्ना के मुताबिक यह काम करीब एक महीने तक चल सकता है और रोजाना 5 से 20 घरों तक जाना पड़ सकता है।
झारखंड में 16 मई से जनगणना 2027 के पहले चरण ‘हाउस लिस्टिंग एंड हाउसिंग सेंसस’ की शुरुआत हुई है, जो 14 जून तक चलेगी। पहली बार मोबाइल ऐप के जरिए डिजिटल तरीके से डेटा जुटाया जा रहा है। मुन्ना प्रसाद ने कहा कि वह शुरुआती चरण में घोड़े का इस्तेमाल जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, “यह घोड़ा मुझे ईंधन संकट से निपटने में मदद करेगा।”
