Jharkhand Student Protest: झारखंड में परीक्षा भर्ती प्रक्रिया में कथित धांधली और पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्रों के अनिश्चितकालीन अनशन के 15 दिन हो चुके हैं। रविवार को 16 वां दिन है। भूख हड़ताल में शामिल राहुल क्रांति ने कहा है कि भर्ती प्रणाली से वे पिछले एक दशक से निराशा है। राहुल क्रांति ने कहा कि बार-बार होने वाली परीक्षाओं के अदालती मुकदमों में उलझने और होने वाली समस्याओं के चलते ही अभ्यर्थियों के सड़कों पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा है।
राहुल क्रांति की तरह मंच पर झारखंड में नौकरी चाहने जितने भी अभ्यर्थी पर जितने भी छात्र मौजूद हैं, वे परीक्षा प्रणाली से परेशान है। पहली बार विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाली एक महिला से लेकर अदालत में अनगिनत घंटे बिताने वाले एक व्यक्ति तक ने इस मुद्दे पर अपना-अपना पक्ष रखा है।
राहुल क्रांति कौन है?
राहुल क्रांति ने 2010 में भूगोल में स्नातकोत्तर डिग्री पूरी की और बाद में इग्नू से ग्रामीण विकास में स्नातकोत्तर डिप्लोमा के साथ-साथ बी.एड. की डिग्री भी हासिल की, इस उम्मीद में कि कई योग्यताएं सरकारी शिक्षण नौकरी पाने की उनकी संभावनाओं को बेहतर बनाएंगी। छह साल की बच्ची के पिता राहुल क्रांति अपना जीवन सरकारी परीक्षाओं के बीच बांटते हैं। 2016 में उन्होंने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
मेरिट के बावजूद नहीं हुआ चयन
राहुल क्रांति ने अपने फोन पर अपनी मेरिट सूची दिखाते हुए कहा, “ओबीसी श्रेणी में मैंने अंतिम चयनित उम्मीदवार से 20 अंक अधिक प्राप्त किए, फिर भी मुझे कभी नियुक्ति नहीं मिली।” उन्होंने कई अन्य उम्मीदवारों के साथ झारखंड उच्च न्यायालय का रुख किया। उन्होंने बताया, “नवंबर 2025 में न्यायालय ने सरकार को शेष उम्मीदवारों की नियुक्ति छह महीने के भीतर करने का निर्देश दिया था, लेकिन राज्य ने इस आदेश को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी। फैसले के छह महीने बाद भी जब नियुक्तियां नहीं हुईं, तो मैंने जून में अवमानना याचिका दायर की, जो अभी भी लंबित है।”
देरी यहीं नहीं रुकी। क्रांति ने 2024 की सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली, लेकिन उनका आरोप है कि सभी 26,001 विज्ञापित रिक्तियों को एक बार में भरने के बजाय नियुक्तियां चरणबद्ध तरीके से की गई हैं।
‘हजारों पद खाली फिर नहीं हो रही नियुक्ति’
राहुल क्रांति ने दावा किया, “अभी तक केवल लगभग 11,500 नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं, जबकि हजारों पद अभी भी खाली हैं।” जेपीएससी परीक्षा के आयोजन में बार-बार देरी होने के कारण निर्धारित आयु सीमा पार कर जाने पर क्रांति ने उम्मीदवारों के लिए आयु में छूट की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में मुख्य याचिकाकर्ता के रूप में याचिका दायर की।
इस फरवरी में न्यायालय ने क्रांति सहित 264 याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया। उन्होंने कहा, “इसकी वजह से हम 14वीं जेपीएससी परीक्षा में बैठ पाए। लेकिन जेपीएससी भर्ती में मौजूदा घटनाक्रम ने उन सपनों को चकनाचूर कर दिया है और मेरी सारी उम्मीदें खत्म हो रही हैं।”
‘विरोध करना ही मेरी ताकत है’
छात्रों के इस विरोध प्रदर्शन में बोकारो की 27 साल की उन्ने हबीबा ने संविधान की एक प्रति मजबूती से अपने हाथ में पकड़ रखी थी। उनके बगल में बीआर अंबेडकर की एक तस्वीर रखी थी। हबीबा 29 जुलाई से ही विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं और अपनी भूख हड़ताल के दौरान पानी के सहारे जीवित हैं। उन्होंने बोकारो में पढ़ाई की और 2019 में अंग्रेजी में बीए की डिग्री पूरी की।
उन्होंने बताया कि वह अपने कॉलेज में शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में से थीं और जिले के शीर्ष 10 छात्रों में भी शामिल थीं। 2017 में कॉलेज के पहले वर्ष में रहते हुए उन्होंने पंचायत सचिव भर्ती की तैयारी शुरू की, जिसके लिए आवश्यक योग्यता कक्षा 12वीं उत्तीर्ण होना था। उन्होंने कहा, “मैंने परीक्षा उत्तीर्ण कर ली।”
‘भ्रष्टाचार के बाद आएगी उम्मीद’
दूसरी ओर भर्ती प्रक्रिया लंबी खिंचती चली गई। जब तक प्रक्रिया आगे बढ़ी, हबीबा को पता चला कि लोअर डिविजन क्लर्क (एलडीसी) पद समेत दो पदों के लिए उनकी आयु पात्रता से सिर्फ एक दिन कम है। उन्होंने कहा, “मैंने परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी और एलडीसी पद के लिए आवश्यक हिंदी टाइपिंग टेस्ट भी पास कर लिया था।” हबीबा के अनुसार 2017 की भर्ती में पांच पदों पर 3,088 रिक्तियां थीं। उन्होंने कहा कि दो सूचियां जारी हो चुकी हैं, जबकि मैं लगभग तीन साल से तीसरी सूची का इंतजार कर रही हूं। इन सभी घोटालों और भ्रष्टाचार के बाद मुझे यकीन नहीं है कि मेरा नाम अंतिम सूची में आएगा भी या नहीं।
उसने कहा कि उसने लगभग 322 के कट-ऑफ के मुकाबले 349 अंक प्राप्त किए लेकिन भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में देरी के कारण आयु पात्रता एक बाधा बन गई। बाद में उन्होंने अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर रुख किया। 2021 में जेपीएससी की तैयारी शुरू की और 14वीं जेपीएससी सहित कई परीक्षाओं में भाग लिया। उन्होंने कहा, “घर पर मेरे पिता कभी छोटे किसान थे, अब बूढ़े हो चुके हैं और काम करने में असमर्थ हैं। मेरे भाई निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं और घर चलाने में मदद करते हैं। हालांकि अल्पसंख्यक समुदाय से होने के नाते, मैं अपने परिवार और खुद की मदद करना चाहती थी।”
कई अन्य लोगों के विपरीत उनका मामला अदालत में नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान मुझे विरोध करने का अधिकार देता है। यही मेरी शक्ति है।
लंबी कानूनी लड़ाई लड़ रहे अभ्यर्था
गढ़वा के रहने वाले 30 वर्षीय रूपेश कुमार पाल की स्थिति भी ऐसी ही है, जो कि उन छात्रों में से हैं जिन्होंने सरकारी नौकरियों की तैयारी में कई साल बिताए हैं। उन्होंने 2018 में अंग्रेजी में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और 2020 में बी.एड. की उपाधि पूरी की। इसके बाद उन्होंने 2022 में अंग्रेजी में मास्टर डिग्री और फिर 2024 में राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री प्राप्त की।
रूपेश कुमार अपनी पढ़ाई के साथ-साथ वह सरकारी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था लेकिन जेएसएससी सीजीएल भर्ती ने उसे राज्य भर्ती प्रणाली के साथ कानूनी लड़ाई में घसीट लिया। 2016 में विज्ञापित JSSC CGL परीक्षा अनियमितताओं के आरोपों के कारण बार-बार देरी के बाद अंततः 2024 में आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया और लगभग 83 प्रतिशत अंक प्राप्त किए लेकिन उनका परिणाम घोषित नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि अंततः कम अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों का चयन किया गया।
इस विवाद के चलते उन्होंने सितंबर 2025 में झारखंड उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसमें 100 से अधिक उम्मीदवार चुनौती में शामिल हुए। यह परीक्षा पहले से ही विवादों के केंद्र में थी। उन्होंने कहा, “2024 की परीक्षा के बाद सभी ने आरोप लगाया कि प्रश्नपत्र लीक हो गया था। छात्रों ने आयोग से संपर्क किया और सामग्री और सबूत प्रस्तुत किए। आयोग ने शुरू में इस आरोप से इनकार किया।”
सरकार ने बनाई थी SIT
रांची में एफआईआर दर्ज होने के बाद छात्रों ने अदालत का रुख किया जिसके परिणामस्वरूप एक एसआईटी का गठन हुआ। उन्होंने दावा किया कि सीआईडी की पहली टीम को आरोप का समर्थन करने वाले सबूत मिले। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पिछले साल के अंत में सरकार ने पहली जांच टीम के निष्कर्षों को खारिज कर दिया और एक अन्य टीम का गठन किया जिसके निष्कर्ष पहली टीम के निष्कर्षों से भिन्न थे। यह मामला अभी भी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
रूपेश कुमार पाल ने कहा कि पिछले साल की आखिरी सुनवाई में अदालत ने मामले को सीबीआई को सौंपने की मांग को खारिज कर दिया था। 2024 में जेएसएससी सीजीएल की भर्ती के लिए शुरुआती विज्ञापन में लगभग 800 पदों की घोषणा की गई थी, जो बढ़कर 2,000 से अधिक हो गए। उन्होंने बताया कि लगभग 1,800 उम्मीदवारों की नियुक्ति हो चुकी है, जबकि कई सौ पद अभी भी रिक्त हैं। रूपेश प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखे हुए है। वह अब अपनी भूख हड़ताल के पांचवें दिन में हैं।
असफलता की पराकाष्ठा
रांची की रहने वाली 28 वर्षीय सविता कुमारी के लिए भूख हड़ताल कई असफलताओं की पराकाष्ठा है। रांची महिला महाविद्यालय से स्नातक सविता ने बताया कि उन्होंने 2020 में डिग्री प्राप्त करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी, ताकि उन्हें नौकरी मिल सके और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकें। तब से वे दो बार जेएसएससी सीजीएल परीक्षा, नगर निगम भर्ती परीक्षा, आबकारी कांस्टेबल भर्ती और जेपीएससी परीक्षा में शामिल हो चुकी हैं।
झारखंड उत्पाद शुल्क कांस्टेबल भर्ती उनकी लंबी प्रतीक्षा का प्रतीक बन गई है। इस परीक्षा को झारखंड उत्पाद शुल्क कांस्टेबल प्रतियोगी परीक्षा (जेईसीसी) 2023 के रूप में अधिसूचित किया गया था लेकिन प्रक्रिया वर्षों तक खिंचती रही। अगस्त 2024 में राज्य भर के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित शारीरिक परीक्षणों के दौरान दौड़ परीक्षा देते समय 11 उम्मीदवारों की मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा, “मैंने शारीरिक परीक्षा तो पास कर ली लेकिन लिखित परीक्षा का इंतजार करती रही, जो आखिरकार इस साल अप्रैल में आयोजित हुई।”
हालांकि, परीक्षा के दौरान ही एक और विवाद खड़ा हो गया जब पुलिस ने रारगांव में एक निर्माणाधीन इमारत पर छापा मारा जहां कथित साजिशकर्ताओं सहित 159 उम्मीदवारों को परीक्षा से कुछ घंटे पहले हिरासत में लिया गया। अपनी भूख हड़ताल के पांचवें दिन, सविता ने कहा कि उन्होंने इससे पहले कभी इस तरह के विरोध प्रदर्शन में भाग नहीं लिया था।
सविता ने बताया कि उसका परिवार उस पर शादी करने का दबाव डाल रहा है क्योंकि वह इकलौती अविवाहित बहन बची है। उसकी मां का 2018 में निधन हो गया था। उसने कहा, “मैं सरकारी नौकरी पाना चाहती हूं और अपनी मां के लिए देखे सपने को पूरा करना चाहती हूं। मैं कुछ ऐसा करना चाहती हूं जिससे उनकी आत्मा को शांति मिले।”
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