झारखंड की राजधानी रांची में धरने पर बैठे छात्रों ने सरकार से बातचीत के लिए 11 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल बनाया है। इस प्रतिनिधिमंडल के 11 सदस्यों में आठ छात्र, एक वकील और दो तकनीकी जानकार (पत्रकार) हैं।

प्रदर्शनकारी छात्रों द्वारा SDO को सौंपी गई लिस्ट के अनुसार, सरकार वार्ता के लिए छात्रों के प्रतिनिधियों के रूप में पीयूष कुमार सिंह, रविंद्र पासवान, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, रविंद्र, अंकित कुमार और शालू सिंह को शामिल किया गया है। ये छात्र सरकार से वार्ता करेंगे।

प्रतिनिधिमंडल में एक वकील और दो तकनीकी जानकार अभिभावक के तौर पर शामिल किए गए हैं। इनकी भूमिका सिर्फ मार्गदर्शन देने तक सीमित होगी।

25 जुलाई को शुरू हुआ प्रदर्शन

‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ के बैनर तले 25 जुलाई को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों ने प्रदर्शन शुरू किया था। यह प्रदर्शन हाल के वर्षों में झारखंड के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक बन गया है।

जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे छात्र 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने और भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CBI या राज्य से बाहर के हाई कोर्ट के रिटायर्ड जजों की समिति से स्वतंत्र जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

महुआ माझी बोलीं- पहली दिन से काम कर ही हमारी सरकार

झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी ने दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि दिल्ली में जंतर मंतर पर 25-30 प्रदर्शन होने के बाद केंद्र सरकार दबाव में आई थी, इसके ठीक उलट हमारी सरकार पहले ही दिन से उनके लिए काम कर रही है, जिम्मेदार लोगों का तुरंत इस्तीफा लिया गया, हर रोज गिरफ्तारियां हो रही हैं। हमारी सरकार गंंभीर है।

उन्होंने कहा कि झारखंड बनने के बाद लंबे समय तक बीजेपी की सरकार रही, उस समय वहां बहुत घोटाले हुए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगातार उस घुन को छुड़ा रहे हैं, जो थोड़ा बहुत बचा था तो ये दुर्घटना हो गई। अब वो चाहते हैं कि शिक्षण विभाग को नए सिरे से स्थापित किया जाए क्योंकि सिंडिकेट की पकड़ बहुत मजबूत होती है, वो आगे तक चलती रहती है।

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।