झारखंड सरकार और छात्र प्रदर्शनकारियों के बीच आज फिर से बातचीत होनी है। इस बारे में बात करते हुए स्टूडेंट लीडर देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि सरकार को इस बातचीत के जरिए छात्रों को संतुष्ट करना चाहिए। हम ऐसा शिक्षा सिस्टम चाहते हैं जिससे मौजूदा स्कूली छात्रों को भविष्य में कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम देते समय कोई परेशानी न हो और उन्हें पेपर लीक या गड़बड़ियों का सामना न करना पड़े। देवेंद्र का कहना है कि मुझे आज की बातचीत से उम्मीद है, अगर सरकार हमारी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती है तो विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

वहीं, इस सबके बीच पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर आंदोलन में केंद्रीय भूमिका निभाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) रांची में राज्य सरकार की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों के निरंतर विरोध प्रदर्शन के दौरान लगभग हाशिए पर ही रही है। दिल्ली में हुए प्रदर्शनों में सीजेपी के जाने-माने चेहरे राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका इस प्रदर्शन में अनुपस्थित रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि सीजेपी के बड़े चेहरे रांची के प्रदर्शन से क्यों गायब हैं? वहीं, सीजेपी का दावा है कि यह जानबूझकर किया गया है।

9 अगस्त को अभिजीत दीपके ने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्र नाथ महतो से वीडियो चैट की थी जो अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। अगले दिन जब उनसे रांची जाने के बारे में पूछा गया तो दीपके ने कहा, “महतो झारखंड में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। वे प्रभावी ढंग से विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। हम विरोध प्रदर्शन को अपने नियंत्रण में नहीं लेना चाहते ।”

सीजेपी की एक टीम झारखंड में है

अभिजीत ने कहा कि वह देवेंद्र महतो और अन्य छात्र नेताओं के संपर्क में हैं और सीजेपी की एक टीम झारखंड में है। 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राजस्थान के कार्यकर्ता मुकेश ऑलराउंडर कर रहे हैं। हालांकि, इन कारणों के बावजूद यह सवाल उठ रहे हैं कि वह संगठन जिसने हाल ही में इतने बड़े छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया और अब पूरे देश में अपनी पहचान बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, रांची के प्रदर्शनों से क्यों दूर रहा।

एबीवीपी नहीं चाहती कि बाहरी लोग विरोध प्रदर्शन में दखल दें

एबीवीपी नेता सत्यम मिश्रा ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान कहा, “हमने देखा है कि यहां के छात्रों ने सीजेपी का समर्थन नहीं किया है अगर वे आना चाहते हैं तो आ सकते हैं लेकिन उन्हें विरोध प्रदर्शन का सही तरीका अपनाना चाहिए। उन्हें दिल्ली के जंतर-मंतर पर वामपंथी संगठनों द्वारा किए गए प्रदर्शन को नहीं दोहराना चाहिए, जहां प्रदर्शन हिंसक हो गया था।” सत्यम मिश्रा ने कहा कि एबीवीपी नहीं चाहती कि बाहरी लोग विरोध प्रदर्शन में दखल दें और यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘आज़ादी’ जैसे नारों की यहां कोई ज़रूरत नहीं है। झारखंड में हमें ऐसे एजेंडे की ज़रूरत नहीं है। हम शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।”

जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन नेतृत्वविहीन आंदोलन था

सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान कहा, “हम कहते आ रहे हैं कि जंतर-मंतर पर हमारा विरोध प्रदर्शन भी नेतृत्वविहीन आंदोलन था और अब आगे चलकर सीजेपी को एक राजनीतिक दबाव समूह की तरह काम करना होगा। हम नहीं चाहते कि लोग किसी व्यक्ति की पूजा करें या उन्हें सिर्फ तीन चेहरों की पार्टी समझें और उनसे हर चीज की उम्मीद करें। 25 जुलाई की जीत (धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे) के बाद से युवाओं को सशक्त बनाया गया है। वे किसी भी सरकार से जवाबदेही मांगने के लिए अपने तरीके से संगठित होने और संघर्ष करने में सक्षम हैं।”

रत्ना सिंह ने कहा, “वहां विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को सशक्त महसूस करना चाहिए न कि उन्हें बहकाया जाना चाहिए। हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि वे बदलाव लाने में सक्षम नहीं हैं। सीजेपी चाहती है कि वे सभी सशक्त महसूस करें और यह सोचें कि वे विरोध प्रदर्शन आयोजित करने और सरकार से जवाबदेही मांगने में सक्षम हैं।” सिंह ने कहा कि वह और अन्य सीजेपी नेता झारखंड के छात्रों के संपर्क में हैं और जरूरत पड़ने पर उनके साथ शामिल होंगी।

मुकेश ऑलराउंडर ने बताया कि रांची पहुंचने पर सीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले छात्रों और स्वयंसेवकों से मुलाकात कर उनकी मांगों और संगठन से उनकी अपेक्षाओं को समझने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि छात्र मुख्य रूप से सुरक्षा व्यवस्था संभालने और विरोध प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने के बारे में जानना चाहते थे। उन्होंने कहा, “सभी का एक ही सवाल था, आपने जंतर-मंतर पर इतनी बड़ी लड़ाई कैसे जीती? हमें आपके प्रबंधन और आपके अनुभव की जरूरत है।” प्रदर्शनकारियों से प्रतिक्रिया मिलने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने सीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श किया जिसने उन्हें निर्देश दिया कि उनका समर्थन मंच से नहीं बल्कि पर्दे के पीछे से होगा।

झारखंड में विरोध स्थल पर राजनीति

रांची में विरोध प्रदर्शन 25 जुलाई को बापू वाटिका नामक एक प्रमुख सार्वजनिक उद्यान में शुरू हुआ और 29 जुलाई को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में स्थानांतरित हो गया। उस समय सभी छात्र परीक्षा अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग को लेकर एकजुट थे। हालांकि, कुछ ही दिनों में प्रदर्शनकारी दो समूहों में बंट गए, जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच और जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यार्थी न्याय मंच।

जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच दूसरे गुट से अलग हो गया, यह आरोप लगाते हुए कि दूसरे गुट से जुड़े छात्र ज्यादातर जेएलकेएम से संबंधित थे। न्याय मंच दूसरे गुट को भाजपा गुट कहता है, क्योंकि भाजपा नेता और कार्यकर्ता नियमित रूप से उससे मिलते रहे हैं। सरकार के साथ उनकी सार्वजनिक बातचीत में भी यह विभाजन स्पष्ट रूप से दिखाई दिया क्योंकि दोनों गुटों ने अलग-अलग जेएमएम-कांग्रेस प्रशासन के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।

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पश्चिम बंगाल में कॉकरोच जनता पार्टी के एक वॉलंटियर के पिता पर हुए कथित हमले के बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई। CJP के वॉलंटियर ने इसका आरोप बीजेपी पर लगाया। इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने घोषणा की है कि उनके संगठन के सदस्यों की एक टीम पश्चिम बंगाल का दौरा करेगा और उस वॉलंटियर से मुलाकात करेगी जिसके पिता की हत्या की गई है। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें