झारखंड में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए Form 7 के इस्तेमाल को लेकर विवाद सामने आया है। कई ऐसे मामलों का पता चला है जहां बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई जबकि बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने कुछ आवेदनों पर सवाल उठाते हुए उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
गोड्डा में कम से कम चार बूथों के बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) ने बताया है कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने कई नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 जमा किए हैं । उन्होंने यह भी दावा किया है कि ये फॉर्म सही प्रारूप में नहीं थे और ब्लॉक विकास अधिकारी श्रीमान मरांडी के निर्देशानुसार इनमें से कई फॉर्म खारिज कर दिए गए।
ऐसे में सवाल उठता है कि फॉर्म 7 के जरिए किसी मतदाता का नाम हटाने की प्रक्रिया क्या है, इसके लिए किन शर्तों को पूरा करना होता है और बड़े पैमाने पर आपत्तियां दाखिल होने पर चुनाव आयोग की भूमिका क्या होती है?
मतदाता सूची से नाम हटाने के कानूनी प्रावधान
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 22 के तहत मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को मतदाता सूची में सुधार और नाम हटाने का अधिकार दिया गया है, चाहे वे खुद ऐसा करें या उन्हें प्राप्त आवेदनों पर कार्रवाई करें। प्रत्येक मामले में उन्हें जांच करनी होगी, संबंधित मतदाता को जवाब देने के लिए समय देना होगा और फिर आदेश पारित करना होगा। किसी व्यक्ति की मृत्यु हो गई है या वह अब उस निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी नहीं है या उसे अपात्र पाया गया है तो ईआरओ मतदाता सूची से उसका नाम हटा सकता है।
मतदाता अपना नाम हटवाने के लिए कैसे आवेदन कर सकते?
मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत मौजूदा मतदाता सूची में नाम शामिल करने/हटाने के प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज करने के लिए फॉर्म 7 का इस्तेमाल करना जरूरी है। मतदाता अगर अपना नाम हटवाना चाहते हैं या अपने निर्वाचन क्षेत्र के किसी अन्य मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज कराना चाहते हैं तो वे फॉर्म 7 दाखिल कर सकते हैं। यह फॉर्म ईसीआई के मतदाता पोर्टल (voters.eci.gov.in) से डाउनलोड किया जा सकता है और संबंधित बीएलओ को सौंपा जा सकता है या ऑनलाइन जमा किया जा सकता है। फॉर्म ऑनलाइन जमा करने के लिए ECINet ऐप का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
फॉर्म 7 को ऑनलाइन कैसे भरा जाता है?
फॉर्म 7 ऑनलाइन जमा करने के लिए सबसे पहले मतदाता पोर्टल या ऐप पर अकाउंट बनाना होगा और अपने फोन नंबर को अपने मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) नंबर से लिंक करना होगा। केवल उसी निर्वाचन क्षेत्र में रजिस्टर्ड व्यक्ति ही किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र से अपना नाम हटवाने के लिए फॉर्म 7 जमा कर सकते हैं। फॉर्म 7 में आवेदक को अपना नाम, EPIC नंबर और फोन नंबर, साथ ही उस व्यक्ति का नाम, ईपीआईसी नंबर (यदि उपलब्ध हो) और पता देना होता है जिसके खिलाफ वे आपत्ति जता रहे हैं।
आवेदक को मतदाता के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने के लिए पांच कारणों में से एक का चयन करना होगा, मृत्यु, नाबालिग, अनुपस्थित/स्थायी रूप से स्थानांतरित, पहले से नामांकित या भारतीय नागरिक नहीं। इस फॉर्म में किसी भी प्रकार के प्रमाण की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, आवेदक को एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करना होगा। फॉर्म पूरा हो जाने के बाद इसे बीएलओ को ऑफलाइन या ऑनलाइन जमा किया जा सकता है।
फॉर्म कैसे प्रोसेस होता है?
साल 2018 से ईसीआई के पास देशभर के ईआरओ के लिए एक सेंट्रलाइज्ड पोर्टल है जिसे ERONet के नाम से जाना जाता है। इससे पहले, राज्यों के पास फॉर्म प्रोसेस करने के लिए अपने-अपने एप्लिकेशन थे। हालांकि, प्रत्येक फॉर्म की प्रक्रिया संबंधित ईआरओ स्तर पर की जाती है न कि केंद्रीय स्तर पर। 2025 में ईसीआई ने इस पोर्टल का एक नया वर्जन लॉन्च किया जिसमें मतदाताओं और अधिकारियों के लिए इसके लगभग 40 मौजूदा ऐप्स और पोर्टलों को कंबाइन किया गया है।
ईआरओ और सहायक ईआरओ अपने-अपने क्षेत्रों में आवेदन पोर्टल के माध्यम से फॉर्म प्राप्त करते हैं। प्रत्येक आवेदन के लिए ईआरओ को उस मतदाता को नोटिस जारी करना होता है जिसके विरुद्ध आपत्ति दर्ज की गई है, जवाब देने के लिए सात दिन का समय देना होता है, सुनवाई करनी होती है और आदेश पारित करना होता है। बीएलओ को सत्यापन के लिए फील्ड विजिट करना भी आवश्यक है। पोर्टल पर फॉर्म भरते समय किसी भी प्रकार के प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है। साथ ही, यह भी सत्यापित नहीं किया जाता है कि आवेदकों के EPIC कार्ड और फोन नंबर वास्तव में उन्हीं के हैं या नहीं।
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