झारखंड के गोड्डा जिले में बीजेपी के एक बूथ लेवल एजेंट यानी बीएलए को गिरफ्तार किया गया है। उस पर आरोप था कि उसने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत वोटरों के नाम हटाने के लिए लगभग 200 फॉर्म 7 एप्लीकेशन जमा किए थे। बीएलए विनय कुमार मंडल को फिलहाल जमानत मिल चुकी है।

शिकायतकर्ता और गोड्डा ब्लॉक के पचरुखी गांव के बूथ नंबर 231 के बूथ लेवल ऑफिसर दोनों ने बताया है कि मंडल की ओर से दिए गए सभी आवेदन अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं के नाम पर थे। जिन मतदाताओं के नाम बूथ से कथित तौर पर हटाने का प्रयास किया गया, उनमें बीएलओ साजिदा बीबी और उनके पति भी शामिल हैं।

मंडल के खिलाफ कई धाराओं में केस दर्ज किया गया

गोड्डा मुफस्सिल पुलिस स्टेशन में 3 सितंबर को मंडल (जिसे ‘बीएलए 2’ के रूप में पहचाना गया है) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें जालसाजी और शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान से संबंधित धाराएं हैं। साथ ही लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत भी मामला दर्ज किया गया।

शिकायतकर्ता मुकर्रम अंसारी भी बूथ नंबर 231 के उन वोटरों में शामिल हैं जिनके खिलाफ मंडल ने कथित तौर पर फॉर्म 7 जमा किया था। अपनी शिकायत में अंसारी ने कहा कि जिन वोटरों के खिलाफ मंडल ने फॉर्म 7 जमा किए थे, वे सभी असली वोटर हैं।

अंसारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मंडल ने बूथ नंबर 231 के वोटरों से संबंधित लगभग 200 फॉर्म 7 बीएलओ साजिदा बीबी को सौंपे थे। उन्होंने कहा, “जब हमें पता चला कि इन फॉर्मों के माध्यम से हमारे नाम हटाए जा सकते हैं, तो हमने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया।”

मंडल से फॉर्म के बारे में पूछताछ की

अंसारी के मुताबिक, बाद में मंडल को गांव बुलाया गया और उनसे फॉर्म के बारे में पूछताछ की गई। बताया जाता है कि मंडल ने कहा कि ये फॉर्म उन्हें बीजेपी के बीएलए की एक मीटिंग के बाद दिए गए थे। साजिदा बीबी ने पुष्टि की कि मंडल 29 अगस्त को उनके पास फॉर्म 7 के लगभग 200 आवेदन लेकर आए थे। बीएलओ ने बताया कि मंडल ने फॉर्म उनके पति को सौंपे और कहा कि उन पर साइन कर दिए जाएं और उन्हें इसकी रसीद दे दी जाए। बीबी ने बताया कि उन्होंने साइन करने से मना कर दिया क्योंकि वह पहले फॉर्म की जांच करना चाहती थीं।

उन्होंने कहा, “मैंने बाद में जांच की तो पाया कि वे सभी फॉर्म 7 थे। उनमें कई नाम थे, जिनमें मेरा और मेरे पति का नाम भी शामिल था।” उन्होंने आगे बताया कि सभी फॉर्म मुस्लिम मतदाताओं से संबंधित थे। बीएलओ राज्य सरकार के कर्मचारी हैं।

विनय मंडल ने क्या बताया?

विनय मंडल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्हें फॉर्म 7 जमा करने के लिए कहा गया था, जिसके बाद वे बीएलओ के पास गए थे। बीबी ने शुरू में फॉर्म लेने और रसीद देने पर सहमति जताई थी। मंडल ने बताया कि बीबी ने उन्हें गुरुवार को पचरुखी गांव बुलाया था। उन्होंने कहा, “लेकिन वहां कई लोगों ने मुझे घेर लिया और मेरी पिटाई की।” उन्होंने आगे बताया कि उन्हें सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक जबरन रखा गया था और एक ग्रामीण ने बीच-बचाव करके मारपीट को रोका।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें पता था कि वोटर लिस्ट से मतदाता का नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 का उपयोग किया जाता है, तो मंडल ने कहा कि उन्हें पता था कि इस फॉर्म का उपयोग बीएलओ के समक्ष दावा या आपत्ति उठाने के लिए किया जा सकता है और बीएलओ कोई भी कार्रवाई करने से पहले डिटेल की पुष्टि करेगा।

मुस्लिम वोटरों के थे ज्यादा फॉर्म

विनय मंडल ने यह भी माना कि उन्होंने जो लगभग 200 फॉर्म जमा किए थे, उनमें ज्यादातर मुस्लिम वोटर थे। साथ ही उन्होंने बताया कि उनके अपने गांव में भी एक बीएलए ने इसी तरह के फॉर्म जमा किए थे, जबकि उनका गांव मुख्य रूप से हिंदू आबादी वाला है।

इस मामले को उठाने वाले कांग्रेस के जिला महासचिव अकबर अली ने बताया कि बड़ी संख्या में फॉर्म 7 की कॉपियों के बारे में सुनकर वे बीबी के घर गए। अली ने आगे बताया कि स्थानीय लोगों ने मंडल को बुलाकर उनसे पूछताछ करने का फैसला किया। उन्होंने कहा, “हमारे फोन करने के बाद पुलिस और ब्लॉक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। इसके बाद ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज कराई।”

इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच से पहले पता चला था कि गोड्डा जिले के महेशटिकरी ब्लॉक में बीजेपी के बीएलए ने बड़ी संख्या में वोटरों के खिलाफ फॉर्म जमा किए थे। इनमें से ज्यादातर अल्पसंख्यक समुदाय से थे। कम से कम चार बूथों के बीएलए ने फॉर्म स्वीकार करने से इनकार कर दिया और शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद, जिला निर्वाचन अधिकारी ने फॉर्म जमा करने के मामले में जांच के आदेश दिए।

झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के. रवि कुमार ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि बीएलओ फॉर्म लेने से मना नहीं कर सकते और फॉर्म 7 के आधार पर नाम हटाने की प्रक्रिया केवल जांच के बाद ही होती है। गोड्डा के पूर्व बीजेपी विधायक अमित मंडल ने कहा कि पार्टी के बीएलए विनय मंडल को कुछ लोगों ने गलत तरीके से बंधक बना लिया है और आरोप लगाया कि लिंचिंग जैसी घटना का खतरा मंडरा रहा है।

बीजेपी नेता ने आरजेडी की संलिप्तता का दावा किया

बीजेपी नेता ने इस घटना में आरजेडी की संलिप्तता का भी दावा करते हुए कहा, “उन्होंने यह सब गलत तरीके से और जबरदस्ती किया, लेकिन इसके बावजूद नतीजा क्या निकला? कोई मेरे बीएलए को छू भी नहीं सका। मुझे मेरे बीएलए को जमानत पर छुड़वा लिया गया।” झारखंड में सत्ताधारी गठबंधन में आरजेडी भी शामिल है।

पिछले विधानसभा चुनावों में, 2024 में अमित मंडल गोड्डा विधानसभा सीट से आरजेडी के संजय प्रसाद यादव से हार गए थे। यादव के बेटे रजनीश ने अमित मंडल पर निशाना साधते हुए कहा, “क्या उन्हें मॉब लिंचिंग का मतलब पता है? किसी ने भी उनके बीएलए को नुकसान नहीं पहुंचाया।” आरजेडी नेता ने कहा कि यह पूरी घटना चोरी करने और फिर बेशर्मी से अपराध करने जैसी है।

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झारखंड में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए Form 7 के इस्तेमाल को लेकर विवाद सामने आया है। कई ऐसे मामलों का पता चला है जहां बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई जबकि बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने कुछ आवेदनों पर सवाल उठाते हुए उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…