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झारखंड मॉब लिंचिंग: परिजन बोले- यदि समय पर इलाज होता तो बच सकती थी तबरेज की जान

तबरेज के परिवारवालों के अनुसार, 17 जून को वह जमशेदपुर से अपनी चाची से मिलने के बाद वापस लौट रहा था, तभी धतकीडीह गांव के लोगों ने उसे पकड़ लिया और चोर बता पिटाई की।

झारखंड मॉब लिंचिंग के शिकार तबरेज अंसारी। (Photo: Video Grab)

झारखंड में कथित तौर पर उन्मादी भीड़ द्वारा 24 वर्षीय तबरेज अंसारी की इतनी पिटाई की गई कि उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया। बावजूद तबरेज की सास बोलने की हिम्मत कर रही हैं। अपनी विधवा बेटी को बाहों में जकड़े हुए शहनाज बेगम कहती हैं कि यदि प्रशासन ने थोड़ी भी सहानुभूति दिखाई होती और उसके इलाज पर थोड़ा भी ध्यान दिया जाता तो आज तबरेज जिंदा होता। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, बेगम कहती हैं, “पहली बात ये कि भीड़ धर्म से प्रेरित थी, जो तत्काल न्याय से बाहर हो गई थी। दूसरी बात ये कि प्रशासन ने तबरेज को दर्द से मरने दिया। उसे बचाने के लिए पुलिस कम से कम अस्पताल में भर्ती करवा सकती थी।”

तबरेज का परिवार झारखंड के सरायकेला जिला मुख्यालय शहर से 15 किलोमीटर दूर कदामडिया गांव में रहता है। तबरेज की मौत के तीन दिन बाद सरायकेला-खरसावां के जिलाधिकारी छबी रंजन और पुलिस अधीक्षक कार्तिक एस सोमवार को देर शाम कदामडिया पहुंचे, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके, जबकि जिले के अधिकारियों का एक अन्य समूह मंगलवार सुबह गांव में पहुंचा। शहनाज बेगम सभी से कहती हैं, “मेरे दामाद की इस तरह मौत नहीं होनी चाहिए थी।”

बचपन में ही माता-पिता को खोने के बाद आठ साल पहले तबरेज पुणे चला गया था। अप्रैल महीने में वह शादी के लिए घर लौटा था। 27 मई को तबरेज की शादी 19 वर्षीय शाहिस्ता परवेज से हुई थी। कुछ ही दिनों बाद दोनों पुणे जाने वाले थे।

तबरेज के परिवारवालों के अनुसार, 17 जून को वह जमशेदपुर से अपनी चाची से मिलने के बाद वापस लौट रहा था, तभी धतकीडीह गांव के लोगों ने उसे पकड़ लिया और चोर बता पिटाई की। तेबरेज के चाचा मंसूर आलम, जो उसे बचाने के लिए पुलिस थाने गए थे, कहते हैं, “कुछ थप्पड़ लगाने के बाद तबरेज को जाने दिया जा सकता था, लेकिन नाम बताने के बाद उसे बिजली के पोल से बांध दिया गया और पूरी रात पिटाई की गई। बाद में उसे जंगली क्षेत्र में ले जाया गया और फिर पिटाई की गई। उसे ‘जय श्री राम और जय हनुमान’ का नारा लगाने को मजबूर किया गया।

तबरेज के परिवारवाले जब उससे सरायकेला पुलिस थाने में मिले तो वे हैरान रह गए। शहनाज बेगम कहती हैं, “शुरूआत में मुझे पुलिस थाने में नहीं जाने दिया जा रहा था। तब मैंने किसी को कहते हुए सुना ‘अब तक ये मरा क्यों नहीं?’ जब मैंने जांच कि तो पाया कि वह मुख्य आरोपी पप्पू मंडल है, जो पुलिस थाने के अंदर चिल्ला रहा था। मैं खुद को रोक नहीं सकी और जबरदस्ती पुलिस थाने में घुस गई। वहां देखा कि उसके पूरे शरीर पर चोट के निशान हैं। चेहरे, हाथ और पैर पर खून के धब्बे हैं।” एक दिन बार परिजन फिर जेल में मिलने गए। बेगम ने कहा, “उसकी हालत काफी खराब थी। मैंने वहां के अधिकारियों से उसे अस्पताल में भर्ती करवाने का आग्रह किया लेकिन किसी ने नहीं सुनी।”

इस मामले में पुलिस अधीक्षक कार्तिक एस कहते हैं, “हमने अभी तक मुख्य आरोपी पप्पू मंडल सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच जारी है और आगे कई और लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है।”

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