Jharkhand News: झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के लगभग 100 प्रवासी आदिवासी श्रमिकों का ग्रुप पिछले दो दिनों में तमिलनाडु से लौटा है। उन्होंने तमिलनाडु के नमक्कल में एक कपड़ा मिल में शारीरिक उत्पीड़न और मजदूरी का पैसा न मिलने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इतना ही नहीं, श्रमिकों का कहना है कि वहां उन्हें खाने पीने से लेकर नियमों तक में समस्या थी।
इस संबंध में चक्रधरपुर इलाके के निवासी अनिल समद ने बताया कि कपड़ा मिल में तनाव बढ़ने के बाद वह और उनके समूह के कई मजदूर वापस लौट आए। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ सालों से कई युवा वहां काम कर रहे हैं। मैं और मेरा समूह तीन-चार महीने पहले वहां गए थे। वहां खाने-पीने, नियमों और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर समस्याएं थीं। जब हमने अपनी चिंताएं जताईं और उन्हें कारखाना छोड़ने के बारे में बताया तो उन्होंने हम पर हमला करना शुरू कर दिया और हमें चेतावनी दी कि हम वहां से न जाएं।”
श्रमिकों की हुई बेतरतीब पिटाई
श्रमिकों का आरोप है कि मिल के अंदर हुए विवाद के बाद स्थिति और बिगड़ गई, जिसके चलते कुछ कर्मचारियों की कथित तौर पर पिटाई की गई। खुत्पानी गांव के एक अन्य श्रमिक, मंकी हेस्सा ने आरोप लगाया कि काम को लेकर हुए मतभेद के बाद मिल के कर्मचारियों ने उन पर हमला किया। उन्होंने कहा, “उन्होंने पहले मुझे थप्पड़ मारे और फिर लाठियों और मशीन के पुर्जों से मेरी पिटाई की। मेरा हाथ सूज गया।” उन्होंने आगे बताया कि इस घटना के बाद चिकित्सा खर्च साथी श्रमिकों को उठाना पड़ा।
महिलाओं का भी हुआ उत्पीड़न
पीड़ित हेस्सा ने कहा कि जब कई सहकर्मियों ने जगह छोड़ने के लिए आवाज उठाई तो कपड़ा मिल के लोगों ने मारपीट शुरू कर दी। श्रमिकों ने आगे आरोप लगाया कि महिला कर्मचारियों को भी उत्पीड़न और शारीरिक हमले का सामना करना पड़ा। हेस्सा के ही गांव की रहने वाली एक महिला कर्मचारी, प्रिस्का होरो पर परिसर छोड़ने की कोशिश करते समय कथित तौर पर हमला किया गया।
इस मुद्दे के संबंध में प्रिस्का ने बताया कि पिछले चार महीनों में कोई समस्या नहीं थी लेकिन हाल ही में मिल के कर्मचारियों ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मिल के एक कर्मचारी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और मारपीट की, जिसका हेस्सा ने वीडियो भी बना लिया। उन्होंने कहा, “मुझे परिसर छोड़ने की अनुमति नहीं दी गई और मेरी पिटाई की गई। जब शुरू में श्रमिकों को परिसर छोड़ने की अनुमति नहीं दी गई, तो कुछ लोग दीवारों पर चढ़कर या चुपके से बाहर निकलकर भागने में कामयाब रहे।”
खुद उठाया यात्रा का खर्च
श्रमिकों ने यह भी दावा किया कि उन्हें यात्रा खर्च खुद ही वहन करना पड़ा। समद ने कहा, “हमें हमारी बकाया मजदूरी नहीं मिली। हमें टिकटों के लिए खुद ही पैसे जुटाने पड़े, कभी-कभी तो परिवार के सदस्यों से उधार भी लेना पड़ा।” उन्होंने बताया कि इस इकाई में झारखंड के लगभग 250-300 लोग कार्यरत थे जिनमें से लगभग आधे अब तक लौट चुके हैं, बाकी लोगों के आने वाले दिनों में पहुंचने की उम्मीद है।
मामला सामने आने और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संज्ञान लिया और प्रशासन को मामले की जांच करने का निर्देश दिया। शनिवार और रविवार को एक बड़ा समूह पहले ही आ चुका है, जबकि बाकी लोगों के आने वाले दिनों में पहुंचने की उम्मीद है।
एजेंट के जरिए हुई थी भर्ती
श्रम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इन श्रमिकों को लगभग तीन से चार महीने पहले एक एजेंट द्वारा नमक्कल इकाई में काम करने के लिए भर्ती किया गया था, जहां वे कपड़ा उत्पादन में लगे हुए थे। इस मामले की सूचना 22 अप्रैल को राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष को दी गई, जिसके बाद श्रम विभाग ने श्रमिकों से संपर्क किया और उनकी वापसी का समन्वय किया।
अधिकारियों ने बताया कि श्रमिकों ने बुनियादी सुविधाओं की कमी और दुर्व्यवहार की शिकायत की थी और पुष्टि की कि वे झारखंड लौटने के लिए सलेम से ट्रेन में सवार हुए थे।
69 करोड़ रुपये का CM आवास, हेमंत सोरेन के ‘शीश महल’ पर सियासी घमासान
झारखंड में मुख्यमंत्री के आवास को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। इस प्रस्तावित निर्माण की अनुमानित लागत 68.91 करोड़ रुपये है जिसे लेकर राजनीतिक दलों में बहस छिड़ गयी है। बीजेपी इसे फिजूलखर्ची बता रही है जबकि सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) इसे जरूरी परियोजना बताकर इसका बचाव कर रही है। पढ़िए पूरी खबर…
