झारखंड के एक प्रवासी मजदूर की मौत सऊदी अरब में हुई थी। इस घटना को करीब 4 महीने हो गए। अब 4 महीने बाद प्रवासी मजदूर का शव झारखंड लाया गया है। 27 वर्षीय विजय कुमार महतो का शव मुंबई के रास्ते रांची पहुंचा। विजय कुमार महतो की मौत सऊदी अरब में पुलिस और एक गैंग के बीच कथित तौर पर हुई गोलीबारी में फंसने से हुई थी। हालांकि मजदूर के परिवार ने उनके मालिक की तरफ से मुआवज़े को लेकर साफ जानकारी न होने का हवाला देते हुए शव लेने से मना कर दिया है।
15 अक्टूबर को हुई थी घटना
गिरिडीह जिले के डुमरी ब्लॉक के दुधपनिया गांव के रहने वाले विजय कुमार महतो पिछले साल 15 अक्टूबर को सऊदी अरब के जेद्दा इलाके में घायल हो गए थे। विजय एक ट्रांसमिशन लाइन प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। विजय के परिवार के मुताबिक लोकल पुलिस और इलाके में एक्टिव एक एक्सटॉर्शन गैंग के बीच गोलीबारी के दौरान उन्हें गोली लग गई थी। बाद में चोटों के कारण उनकी मौत हो गई।
विजय का शव शनिवार को रांची एयरपोर्ट पहुंचा और उसे राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) के मॉर्चरी में ले जाया गया। एक एक्टिविस्ट सिकंदर अली ने कहा कि शव रांची पहुंचने के बाद, एयरपोर्ट पुलिस को शव को रांची एयरपोर्ट से गिरिडीह ले जाने के लिए बुलाया गया। हालांकि, उन्होंने कहा कि परिवार ने बॉडी लेने से मना कर दिया है।
RIMS में रखी है बॉडी
एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन के SHO पंकज शर्मा ने कहा, “बॉडी मिल गई है और RIMS में रखी है। परिवार मुआवजे के मसलों की वजह से इसे लेने को तैयार नहीं है। गिरिडीह में लोकल एडमिनिस्ट्रेशन उनके संपर्क में है।” परिवार वालों ने कहा कि वे बॉडी तभी लेंगे जब कंपनी मुआवजे के बारे में लिखकर भरोसा देगी। मृतक के साले राम प्रसाद महतो ने कहा, “वे साफ-साफ नहीं बता रहे हैं कि क्या मुआवजा दिया जाएगा। उस भरोसे के बिना, हम बॉडी नहीं लेंगे।”
झारखंड लेबर डिपार्टमेंट के तहत स्टेट माइग्रेंट कंट्रोल सेल के अधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार ने तुरंत 5 लाख रुपये की फाइनेंशियल मदद देने का ऑफर दिया है। हालांकि परिवार इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि मालिक ज़िम्मेदारी ले। माइग्रेंट कंट्रोल सेल की हेड शिखा लकड़ा ने कहा कि मुआवज़े का मसला सऊदी अरब में चल रही कानूनी कार्रवाई पर निर्भर कर सकता है। उन्होंने कहा, “यह गोली लगने का मामला था, इसलिए मामला वहां की एक कोर्ट में है। आखिरी मुआवजा कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा। इंडियन एम्बेसी ने राज्य को बॉडी के आने की जानकारी दे दी थी और डिस्ट्रिक्ट प्रशासन के साथ कोऑर्डिनेशन किया गया था। एम्बेसी से जानकारी मिलने के बाद डिपार्टमेंट ने वापस भेजने में मदद की, लेकिन राज्य का रोल ज़्यादातर विदेशी एम्प्लॉयर्स और विदेशी अधिकार क्षेत्र वाले मामलों में कोऑर्डिनेशन तक ही सीमित है।
विजय महतो के परिवार में कौन-कौन?
विजय महतो के परिवार में उनकी पत्नी, पांच और तीन साल के दो बेटे और उनके बुज़ुर्ग माता-पिता हैं। राम प्रसाद ने कहा कि घटना के बाद से उनकी बहन बहुत परेशान है और पड़ोसी घर की रोजाना की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर रहे हैं। परिवार ने एयरपोर्ट अथॉरिटीज को लिखकर बताया है कि वे बॉडी लेने से क्यों मना कर रहे हैं। राम प्रसाद ने कहा, “लगभग चार महीने हो गए हैं और कंपनी ने मुआवजे के बारे में अपनी स्थिति साफ नहीं की है। ऐसा नहीं है कि हम अपने परिवार के सदस्य से प्यार नहीं करते और हमें उसकी बॉडी नहीं चाहिए। हम इसे चाहते हैं, लेकिन हमें उसके बेटों और परिवार के सदस्यों का भविष्य भी देखना है जिन्हें वह पीछे छोड़ गया है। हमें मुआवजे पर साफ बातचीत चाहिए।” पढ़ें दिल्ली में कारोबारी की हत्या मामले में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के पांच गुर्गे गिरफ्तार
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