Jharkhand Students Protest: भूमि पर बिछी एक पतली-सी चटाई पर रामगढ़ के रहने वाले ब्रह्मानंद कुमार महतो रांची के मशहूर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में ओलंपियन, लेखक और राजनेता जयपाल सिंह मुंडा की प्रतिमा के नीचे लेटे हैं।

उनकी सफेद कमीज पिछले चार दिनों से नहीं बदली है। लगातार हो रही बारिश और पसीने ने उसे पूरी तरह भिगो दिया है। कमीज पर पड़े कीचड़ के निशान ही बताते हैं कि इस भूख हड़ताल को शुरू हुए कई दिन बीत चुके हैं। उनके आसपास बैठे साथी प्रदर्शनकारी धीरे-धीरे उनके हाथ और पैर दबा रहे हैं, जबकि डॉक्टर समय-समय पर उनकी सेहत की जांच कर रहे हैं।

30 वर्षीय महतो धीमी आवाज में कहते हैं, “मुझे तो यह भी नहीं पता था कि भूख हड़ताल कैसे की जाती है। मैंने इससे पहले कभी ऐसा नहीं किया। मैं बस यहां आया, चटाई पर लेट गया और अपना विरोध शुरू कर दिया। मुझे नहीं पता यह कितने दिन चलेगा, लेकिन अगर न्याय पाने के लिए यही करना पड़े, तो मैं यहां पड़े रहने के लिए तैयार हूं।”

महतो उन सात लोगों में शामिल हैं जो पिछले चार दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। यह आंदोलन झारखंड की भर्ती और शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग को लेकर चल रहा है। लंबे समय से इन दोनों व्यवस्थाओं पर गड़बड़ियों और अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं।

विवाद तब शुरू हुआ जब इसी महीने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया। आयोग ने 103 पदों के लिए 2,204 उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए चुना, लेकिन नतीजे आने के तुरंत बाद परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगने लगे। इस परीक्षा में करीब साढ़े तीन लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था।

इस आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का आरोप है। यह विरोध ऐसे समय हो रहा है जब नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी इसी तरह के घटनाक्रम चर्चा में हैं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने मामले में तेजी से कदम उठाने की कोशिश की है। अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने भी कहा है कि उनकी सरकार युवाओं के साथ खड़ी है।

बुधवार को रांची के एसडीएम कुमार रजत और एडीएम धनंजय कुमार प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उनके एक प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री आवास पर बातचीत के लिए बुलाया। प्रदर्शनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को राज्य सरकार से मुलाकात करेगा।

इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन का ऐलान किया है। वहीं, सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सहयोगी पार्टी कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल भी मुख्यमंत्री सोरेन से मिला और उनसे इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।

हालांकि, सरकार की ओर से बातचीत की पहल के बावजूद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा कम नहीं हुआ है।

महतो भी उन्हीं में से एक हैं। तेज बारिश के बावजूद उन्होंने वहां से हटने से इनकार कर दिया है। महतो बताते हैं कि उन्होंने इस आंदोलन में शामिल होने के लिए केंद्रीय रेशम बोर्ड (Central Silk Board) की अपनी संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) वाली सरकारी नौकरी तक छोड़ दी।

वे पढ़ाई में हमेशा प्रथम श्रेणी के छात्र रहे हैं और वनस्पति विज्ञान (बॉटनी) में पीएचडी कर चुके हैं। वर्ष 2023 में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की कीटपालक (रेशम के कीड़े पालने वाले) भर्ती परीक्षा में सफल हुए 150 उम्मीदवारों में उनका भी नाम था। लेकिन वे उन 30 उम्मीदवारों में शामिल हैं जिनकी नियुक्ति अब तक रोककर रखी गई है।

नवंबर 2025 में इन 30 उम्मीदवारों ने झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। यह मामला अभी भी अदालत में विचाराधीन है।

महतो कहते हैं, “आज तक हमें यह नहीं बताया गया कि हमारी नियुक्ति आखिर क्यों रोक दी गई। हमें बस बार-बार इधर-उधर दौड़ाया जाता है, लेकिन कोई यह नहीं बताता कि असली समस्या क्या है।”

एक छोटा विरोध कैसे बड़े आंदोलन में बदल गया

JSSC-JPSC भ्रष्टाचार मुक्त अभियान के नेतृत्व में यह आंदोलन शुरुआत में 25 जून को रांची के बापू वाटिका में एक छोटे से धरने के रूप में शुरू हुआ था। इसका मकसद भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना था। लेकिन धीरे-धीरे यह आंदोलन एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले चुका है। अब इसे सैकड़ों छात्रों, विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है।

धरना स्थल पर पूरे दिन काफी चहल-पहल रहती है। समाजसेवी और स्वयंसेवक लगातार प्रदर्शनकारियों के लिए खाना लेकर पहुंचते रहते हैं। बुधवार को भी सैकड़ों लोग अपना समर्थन जताने वहां पहुंचे।

धरना स्थल के मुख्य प्रवेश द्वार से कुछ ही दूरी पर 37 वर्षीय मोहम्मद शमशेर आलम, जो धनबाद के रहने वाले हैं, पालथी मारकर बैठे हैं। उनके सामने कई दस्तावेज फैले हुए हैं – अंकपत्र, अदालत के आदेश, भर्ती से जुड़ी अधिसूचनाएं और नियुक्ति संबंधी कागजात। पिछले लगभग दस वर्षों में उन्होंने ये सारे दस्तावेज संभालकर रखे हैं।

उर्दू में स्नातकोत्तर और बी.एड. कर चुके आलम ने 2016 में JSSC संयुक्त स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक (TGT) प्रतियोगी परीक्षा पास की थी। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत लगभग 17,786 पदों पर नियुक्तियां होनी थीं और इसकी प्रक्रिया 2019 में शुरू हुई थी। लेकिन आज भी 6,000 से अधिक अभ्यर्थी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

पिछले 12 दिनों से आलम धरना स्थल पर ही हैं। वे अपनी पत्नी और दो बच्चों से दूर रह रहे हैं। घर का खर्च चलाने के लिए वे छोटे-मोटे काम करते हैं।

आलम कहते हैं, “मैं कपड़ों का एक छोटा-सा बैग लेकर यहां आया था। मुझे नहीं पता था कि कब वापस लौटूंगा। मुझसे 50–60 अंक कम पाने वाले उम्मीदवारों को नौकरी मिल गई, लेकिन मुझे नहीं मिली। परीक्षा पास किए हुए 10 साल हो चुके हैं। इस दौरान मेरी शादी हो गई, बच्चे हो गए और परिवार चलाने के लिए मुझे निजी काम करना पड़ा। लेकिन आज तक वह नौकरी नहीं मिली, जिसके लिए मैं योग्य साबित हो चुका था।”

Jharkhand JPSC Protest, JPSC Recruitment Scam
आनंदी कुमारी। (एक्सप्रेस फोटो-शुभम तिग्गा)

उनके पास ही 40 वर्षीय आनंदी कुमारी, जो लोहरदगा की रहने वाली हैं, बैठी हैं। उनकी ढाई साल की बेटी पास में गेंद से खेल रही है। बच्ची अब घर जाने की जिद करने लगी है और बार-बार अपनी मां से पूछती है कि वे कब लौटेंगे। लेकिन आनंदी का कहना है कि जब तक इस मामले का कोई समाधान नहीं निकलता, तब तक वे यहां से नहीं जाएंगी।

आनंदी ने भी वही परीक्षा पास की थी, जो आलम ने दी थी। वह कहती हैं, “पूरा एक दशक बीत गया। अब मेरी उम्र इतनी हो चुकी है कि मैं किसी दूसरी सरकारी भर्ती परीक्षा में भी नहीं बैठ सकती। मेरी बेटी बार-बार कहती है, ‘मम्मी, घर चलो।’ लेकिन जब तक हमें न्याय नहीं मिलेगा, मैं यहां से नहीं जाऊंगी।”

धरना स्थल पर 27 वर्षीय रोशन जमीर, जो देवघर के रहने वाले हैं, भी अपने एक दोस्त के साथ मौजूद हैं। उनका दोस्त 13वीं JPSC मुख्य परीक्षा दे चुका है।

ज़मीर अभी भी सरकारी नौकरी पाने की दौड़ में शामिल हैं। उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर किया है। वे रांची में किराए के एक कमरे में रहते हैं। सुबह लाइब्रेरी में पढ़ाई करते हैं और दोपहर में धरना स्थल पर पहुंच जाते हैं।

उन्होंने JPSC प्रारंभिक परीक्षा तीन बार पास की है और मुख्य परीक्षा दो बार दे चुके हैं। इस बार वे तीसरी बार मुख्य परीक्षा देंगे। भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रही अनिश्चितता और विवाद के बावजूद उन्हें अपनी मेहनत पर भरोसा है।

वे कहते हैं, “मुझे आज भी पूरा विश्वास है कि मैं यह परीक्षा पास कर सकता हूं। लेकिन अगर पूरी भर्ती प्रक्रिया ही पारदर्शी नहीं होगी, तो इसका नुकसान हर उस अभ्यर्थी को होगा जो ईमानदारी से तैयारी कर रहा है।”

इस आंदोलन की वजह से कई राजनीतिक नेता भी धरना स्थल पर पहुंचे। बुधवार को वहां पहुंचे विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने प्रदर्शनकारियों की मांगों को “पूरी तरह जायज़” बताया।

उन्होंने कहा, “सरकार को 14वीं JPSC परीक्षा रद्द कर देनी चाहिए और पूरे मामले की जांच CBI से करानी चाहिए। अभी इस मामले की जांच CID कर रही है, लेकिन उसे सच्चाई सामने लाने के बजाय मामले को दबाने के लिए लगाया गया है।”

वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार इस मामले में पूरी गंभीरता से काम कर रही है।

उन्होंने कहा, “हमारी सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रही है। जांच एजेंसियां दिन-रात काम कर रही हैं और जो भी दोषी हैं, उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है।” लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए।

Jharkhand JPSC Protest, JPSC Recruitment Scam
प्रदर्शन स्थल पर छात्रों को लंच बांटती अर्चना कुमारी। (Express Photo: Shubham Tigga)

धरना स्थल पर बने भोजन वितरण केंद्र पर 32 वर्षीय अर्चना कुमारी, जो पलामू की रहने वाली हैं, धैर्य के साथ लंबी कतार में खड़े लोगों को खाना परोस रही हैं। अर्चना ने कानून (लॉ) की पढ़ाई की है और वे भी झारखंड सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। पूरी सुबह वे लगातार इधर-उधर दौड़ती रहीं। कभी लोगों को खिचड़ी के पैकेट और पानी बांटतीं, तो कभी सैकड़ों अभ्यर्थियों के लिए भोजन की व्यवस्था संभालतीं। अर्चना बेहद थकी हुई दिखाई देती हैं। बातचीत के दौरान अचानक उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं।

वे भावुक होकर कहती हैं, “सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती है, जब उन छात्रों को देखती हूं जिनके पास अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करने तक के पैसे नहीं हैं। कुछ को तो यह भी नहीं पता कि उनका अगला खाना कहां से आएगा। फिर भी वे यहां डटे हुए हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं की है जो ईमानदारी से मेहनत करके अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।”

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रांची में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर पिछले 12 दिनों से आंदोलन कर रहे झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के अभ्यर्थी आखिरकार झारखंड सरकार से बातचीत के लिए तैयार हो गए हैं। हालांकि छात्रों ने साफ कर दिया है कि सरकार के साथ होने वाली पूरी बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए, ताकि बातचीत पूरी तरह पारदर्शी रहे और बाद में किसी तरह का विवाद न हो। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक