झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार, 20 अगस्त को 11वीं से 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। कोर्ट ने फूड सेफ्टी ऑफिसरों की नियुक्तियां रद्द करने वाले आदेश पर भी रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद छात्र नेता देवेन्द्र नाथ महतो ने हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका से उम्मीद है कि पेपर लीक, धांधली और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मूल मुद्दे पर भी न्याय मिलेगा।
हाईकोर्ट ने सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 15 सितंबर तक का समय दिया है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अमृतांशु वत्स के मुताबिक, अदालत ने प्रथम दृष्टया नियुक्तियां रद्द करने वाली अधिसूचनाओं पर रोक लगाई है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के उल्लंघन की बात कहते हुए मामले में रोक लगाई है। इस आदेश से करीब 450 अभ्यर्थियों को राहत मिलने की बात कही गई है।
‘हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं’
देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि वह हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं और उन्हें पूरा विश्वास है कि अदालत उस मूल सिद्धांत पर भी न्याय करेगी, जिसके लिए छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में पेपर लीक, धांधली, अपारदर्शिता और अनियमितताओं के कारण लाखों संघर्षशील छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
महतो ने कहा कि छात्रों का आंदोलन कभी भी योग्य और निर्दोष अभ्यर्थियों की नौकरी छीनने के लिए नहीं रहा। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है, ताकि योग्य उम्मीदवारों को उनका अधिकार मिल सके।
‘सरकार की ओर से एजी क्यों नहीं पहुंचे?’
हाईकोर्ट के आदेश के बाद महतो ने राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब अदालत ने सरकार को अपना पक्ष रखने का मौका दिया था, तो सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल (एजी) अदालत में क्यों नहीं पहुंचे।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकार की ओर से पेश सरकारी अधिवक्ता ने सीआईडी जांच रिपोर्ट को मजबूती से अदालत के सामने क्यों नहीं रखा। महतो ने कहा कि इन परिस्थितियों से उन्हें सरकार की मंशा पर सवाल उठते दिखाई दे रहे हैं और ऐसा लग रहा है कि मामले में ‘लीपापोती’ की कोशिश हो सकती है।
‘योग्य छात्रों की नौकरी छीनना हमारा उद्देश्य नहीं’
देवेन्द्र नाथ महतो ने स्पष्ट किया कि छात्रों का संघर्ष किसी निर्दोष या योग्य अभ्यर्थी के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र की वर्षों की मेहनत भ्रष्टाचार या अनियमितता की भेंट न चढ़े।
उन्होंने मांग की कि जिन अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, उनकी व्यक्तिगत स्तर पर जांच की जाए। उनके मुताबिक, योग्य और निर्दोष छात्रों के साथ न्याय होना चाहिए, जबकि भर्ती प्रक्रिया में गलत तरीके से शामिल हुए लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
‘लीपापोती हुई तो फिर जारी रहेगा आंदोलन’
महतो ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मामले में धोखा देने या लीपापोती करने की कोशिश की तो छात्र आंदोलन दोबारा तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्र पहले भी भूख हड़ताल, सत्याग्रह और लंबे संघर्ष के जरिए अपनी मांगों को उठा चुके हैं और जरूरत पड़ी तो आगे भी आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि 15 सितंबर को हाईकोर्ट ने सरकार को अपना पक्ष रखने का एक और मौका दिया है। ऐसे में पूरे झारखंड के छात्र और आम लोग इस सुनवाई पर नजर बनाए हुए हैं। महतो ने कहा कि यदि सरकार अपनी जांच रिपोर्ट या पक्ष रखने में किसी तरह की कोताही बरतती है, तो छात्र इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
जेपी आंदोलन की तर्ज पर आंदोलन का ऐलान
देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि अगर सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्र जेपी आंदोलन की तर्ज पर अपने आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने साफ किया कि छात्रों का संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित नहीं हो जाता।
इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 18 अगस्त को राज्य में भर्ती परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया था। सरकार ने टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) द्वारा 2014 से अब तक आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी। सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति गठित करने की बात भी कही थी। इसी क्रम में 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिस पर गुरुवार को अदालत ने अंतरिम रोक लगा दी।
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केंद्र सरकार ने लद्दाख के लोगों को बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट की एक बेंच स्थापित करने का फैसला किया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
