झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मंगलवार को आंदोलन समाप्त कर दिया। राज्य सरकार के 2014 से आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की जिनमें झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तर (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा भी शामिल है। यह घोषणा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सोमवार को यहां राज्य सचिवालय में हुई लंबी कैबिनेट बैठक के बाद की गई। जिसके बाद जेएसएससी-सीजीएल भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्त सरकारी कर्मचारी राज्य सचिवालय (प्रोजेक्ट भवन) के बाहर बारिश में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन राज्य मंत्रिमंडल द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने के निर्णय के बाद किया गया है।
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ इस परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों ने भी प्रदर्शन शुरू कर दिया। परीक्षा में सफल होकर सरकारी नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों का एक समूह राज्य सचिवालय के बाहर एकत्र हुआ और मुख्यमंत्री सोरेन से परीक्षा रद्द नहीं करने की अपील की। उनका दावा था कि परीक्षा रद्द होने से करीब 2,000 लोगों की नौकरी चली जाएगी।
सफल छात्र सरकार के फैसले से आहत
राज्य मंत्रिमंडल द्वारा JSSC-CGL भर्ती परीक्षा रद्द करने के फैसले पर खूंटी में श्रम प्रवर्तन अधिकारी के पद पर नियुक्त आशीष मिंज ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान कहा, “हम सरकार के इस फैसले से बेहद आहत हैं। इससे पहले मैंने 2019 से 2022 तक LIC में विकास अधिकारी के रूप में और फिर 2022 से जनवरी 2026 तक भारतीय खाद्य निगम में काम किया जिसके बाद मैंने यहां नियुक्ति की। मैंने अन्य नौकरियां करते हुए इस पद के लिए पढ़ाई की और चयन प्रक्रिया के माध्यम से यह पद हासिल किया। अब हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है, हम बिल्कुल खाली हाथ हैं।”
आशीष ने आगे कहा, “अचानक रातों-रात हमें यह बता दिया गया कि हमारी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, यह हमारे लिए बेहद चिंता का विषय है। साबित करें कि मैंने कोई गलत काम किया है, तभी मुझे हटाया जाए।” विरोध करने वाले सहायक अनुभाग अधिकारी (ASO) के पद पर नियुक्त प्रिंस प्रियदर्शी ने कहा, “JSSC-CGL भर्ती के संबंध में जिसमें ASO, CI, BSO, BWO, LEO, योजना सहायक और JSA जैसे सात पद शामिल थे हमने अदालती कार्यवाही के बाद सेवा में कार्यभार संभाला था। फैसला आ चुका है। 141 पन्नों का फैसला सुनाया गया जिस पर सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट मुहर लगी हुई है। मैं मुख्यमंत्री से पूछता हूं, मेरे नियुक्ति पत्र में लिखा है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अगर मैं दोषी हूं तो मैं प्रोजेक्ट भवन के सामने ही किसी भी सजा का सामना करने को तैयार हूँ। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है, हम और क्या कर सकते हैं?”
क्या थी छात्रों की मुख्य मांग?
वहीं, दूसरी ओर सीएम सोरेन ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ”सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तर (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है, जो प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगों में से एक थी। हमने आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल (टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा जारी नतीजों को भी रद्द करने का फैसला किया है।”
यह फैसला ऐसे समय लिया गया, जब छह प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर थे। सरकार की घोषणा के बाद हम यह फैसला ले सकते हैं कि आंदोलन जारी रखना है या इसे समाप्त करना है।” परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 16 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र महतो ने सोमवार आधी रात के आसपास अपना अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने बताया कि पांच अन्य छात्र अब भी भूख हड़ताल पर हैं। घोषणा के बाद छात्रों को जश्न मनाते और तिरंगा लहराते हुए देखा गया।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के जरिए महतो को बधाई दी और सरकार के फैसले को सभी की जीत बताया। हालांकि, सोमवार रात सरकार के इस फैसले के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी प्रमुख मांग कथित परीक्षा अनियमितताओं की सीबीआई जांच कराना है जिसे सरकार ने स्वीकार नहीं किया है।
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झारखंड में स्टूडेंट प्रोटेस्ट के आगे हेमंत सोरेन सरकार झुक गई है। सरकार ने उनकी मांगों को पूरा करते हुए सोमवार देर रात 2014 से लेकर अब तक की TDPL द्वारा आयोजित कराई जाने वाली सभी परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान कर दिया। जहां एक तरफ सीएम के इस फैसले से छात्रों का एक खेमा खुशी मनाता नजर आया तो वहीं दूसरी तरफ इस फैसले से उन उम्मीदवारों को निराशा हुई जिन्होंने एग्जाम क्लियर करने के बाद नौकरी हासिल की थी या नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
(इनपुट- एएनआई+ पीटीआई)
