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झारखंड: जिस OBC वोटबैंक के सहारे बीजेपी ने पाई थी सत्ता, साथी दल उसी में लगा रहे सेंध, विपक्षी गठबंधन ने भी फेंका पासा

भाजपा के बाद अब कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा और राजद द्वारा भी ओबीसी वर्ग के मतदाताओं को लुभाने का प्रयास किया जा रहा है। दोनों पार्टियां राज्य में ओबीसी कोटा बढ़ाने का वादा कर रही हैं।

Author Edited By नितिन गौतम रांची | Published on: December 13, 2019 4:18 PM
भाजपा को रघुबर दास की लोकलुभावन नीतियों के कारण एक बार फिर सत्ता में वापसी की उम्मीद है। (फाइल फोटो)

झारखंड की पहचान एक आदिवासी राज्य के तौर पर है और आदिवासी लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए ही 2000 में इस राज्य का गठन किया गया था। हालांकि अब झारखंड की राजनीति में ओबीसी वोटबैंक का भी काफी अहम रोल हो गया है। दरअसल भाजपा ने 2014 के चुनावों में झारखंड के ओबीसी मतदाताओं पर फोकस किया और इसी का नतीजा रहा कि पार्टी को जीत हासिल हुई। इस जीत के बाद भाजपा ने ओबीसी वोटबैंक को लुभाने के लिए, राज्य के पहले ओबीसी सीएम, रघुबर दास को मुख्यमंत्री बनाया।

अब हालिया चुनावों में भाजपा के साथ ही अन्य राजनैतिक पार्टियां भी आदिवासी वोटबैंक के साथ ही ओबीसी वोटबैंक पर भी फोकस कर रही हैं। ऐसे में राज्य का चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है। बता दें कि जनगणना 2011 के मुताबिक झारखंड में ओबीसी मतदाता 46.1 प्रतिशत हैं। वहीं आदिवासी मतदाता 26.2 प्रतिशत हैं।

भाजपा ने 2014 में सत्ता में आने के बाद 2016 में नई डोमिशिल पॉलिसी लागू की। जिसके तहत झारखंड में 30 साल से रहने वाले और जिनके पास राज्य में अचल संपत्ति है, वह खुद ब खुद राज्य के निवासी बन जाएंगे। इससे पहले 1932 के जमीन दस्तावेजों के आधार पर राज्य का निवासी माना जाता था। इससे राज्य में रहने वाले लाखों गैर-आदिवासी लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। भाजपा के इस कदम को ओबीसी मतदाताओं को लुभाने वाला कदम माना गया।

इसके अलावा भाजपा सरकार ने आदिवासी लोगों द्वारा गैर-आदिवासियों को जमीन बेचने संबंधी नियमों को भी आसान किया था, जो कि छोटा नागपुर टेनेंसी एक्ट और सांथल परगना टेनेंसी एक्ट के तहत मुश्किल था। हालांकि भाजपा सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध हुआ और सरकार को अपने कदम वापस खींचने पड़े।

द प्रिंट की एक खबर के अनुसार, भाजपा के बाद अब कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा और राजद द्वारा भी ओबीसी वर्ग के मतदाताओं को लुभाने का प्रयास किया जा रहा है। दोनों पार्टियां राज्य में ओबीसी कोटा बढ़ाने का वादा कर रही हैं। वहीं भाजपा की सहयोगी पार्टी रही आजसू, जिसकी ओबीसी मतदाताओं में अच्छी पकड़ है, वह भी ओबीसी कोटा बढ़ाने का वादा कर रही है।

झारखंड की राजनीति के जानकारों का कहना है कि जो पार्टी आदिवासी मतदाताओं के साथ ही ओबीसी वर्ग के बड़े वोटबैंक को लुभाने में कामयाब हो जाएगा, चुनावों में उसी को जीत मिलेगी। झारखंड में विधानसभा चुनावों के तीसरे चरण के लिए गुरूवार को वोट डाले गए। राज्य में कुल 5 चरणों में वोट डाले जाएंगे, जिनके नतीजे 23 दिसंबर को घोषित होंगे।

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