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Jharkhand Election Results 2019: हेमंत सोरेन खुद चमकाते हैं गाड़‍ियां, लॉन्ग ड्राइव, गाने और फिल्‍मों के हैं शौकीन, दोस्तों की टोली में भी कहलाते थे लीडर

Jharkhand Assembly Election/Chunav Results 2019: दोस्तों के साथ मस्ती करने वाले हेमंत सोरेन की यह लीडरशिप क्वालिटी उनके कॉलेज के दिनों में भी दिखती थी।

hemant soren, jmmहेमंत सोरेन को अपनी गाड़ी से लॉन्ग ड्राइव पर जाने का शौक भी है। फोटो सोर्स – PTI

Jharkhand Election/Chunav Results 2019: लॉन्ग ड्राइव पर जाते वक्त गाड़ी में गाना सुनना और फिल्में देखना। झारखंड के होने वाले नए सीएम हेमंत सोरेन का यह शौक काफी पुराना है। 10 अगस्त 1975 को जन्मे हेमंत सोरेन, शिबू सोरेन के दूसरे बेटे हैं। शिबू सोरेन को नजदीक से जानने वाले लोगों का कहना है कि हेमंत सोरेन जितनी दिलचस्पी के साथ राजनीति करते हैं मनोरंजन जगत में भी उनकी दिलचस्पी उतनी ही है। बीआईटी मेसरा से इंजीनियरिंग करने वाले हेमंत सोरेन कॉलेज के दिनों में छुट्टियां मिलने पर अक्सर सुजाता या उपहार सिनेमा हॉल में फिल्में देखने जाया करते थे। इतना ही नहीं नई गाड़ियां खरीदना, गाड़ी को खुद चमका कर मेन्टेन रखना और कार से लॉन्ग ड्राइव पर जाते वक्त गाने सुनना भी उनके शौक में शामिल रहा है।

हेमंत सोरेन अब झारखंड के नए मुख्यमंत्री होंगे और उनके आसपास सुरक्षा व्यवस्था बेहद चाक-चौबंद होगी। लेकिन बोकारो में आरंभिक पढ़ाई-लिखाई के दौरान हेमंत सोरेन अपने दोस्तों के साथ साइकिल पर सवार होकर सड़कों पर चक्कर लगाया करते थे। साल 1990 में उन्होंने पटना से मैट्रिक की परीक्षा पास की। वर्ष 1994 में पटना विश्वविद्यालय से आईएससी करने के बाद हेमंत सोरेन ने इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। हेमंत के दादा शोबरन मांझी गोला प्रखंड के नेमरा इलाके के गिने-चुने पढ़े लिखे युवाओं में से एक और पेशे से शिक्षक थे। उनका राजनीति में भी दखल था लेकिन महाजनों- सूदखोरों से उनकी नहीं पटती थी। 4 फरवरी 1973 को हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन किया और अलग राज्य के लिए संघर्ष किया।

कह सकते हैं कि हेमंत सोरेन को राजनीति विरासत में मिली। लेकिन हेमंत सोरेन में लीडरशिप की खूबियां बचपन से ही नजर आती थीं। बचपन के दिनों में बोकारो के चौक-चौराहे पर हेमंत सोरेन अपने दोस्तों के साथ जब कभी मौजूद होते थे तो दोस्तों की इस टोली का लीडरशिप कमांड उनके हाथों में हुआ करता था।

दोस्तों के साथ मस्ती करने वाले हेमंत सोरेन की यह लीडरशिप क्वालिटी उनके कॉलेज के दिनों में भी दिखती थी। बीआईटी मेसरा में पढ़ाई के दौरान हेमंत सोरेन हॉस्टल में रहते थे। यहां दोस्तों के बीच लीडर हेमंत सोरेन ही हुआ करते थे और वजह यह थी कि वो हमेशा सबको साथ लेकर चलने की बात किया करते थे। कॉलेज में अनुशासन का पालन भी वो बड़ी दृढ़ता के साथ किया करते थे।

21 मई 2009 को शिबू के बड़े बेटे और पार्टी के महासचिव दुर्गा सोरेन की बोकारो सिटी में अपने निवास पर संदेहास्पद स्थितियों में मौत देशभर में सुर्खियां बनीं। हालांकि डॉक्टरों ने 39 साल के दुर्गा की मृत्यु का कारण किडनी फेल होना बताया था। हेमंत ने 2003 में छात्र राजनीति से अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया था जबकि उनके बड़े भाई विधायक दुर्गा भी पार्टी को आगे बढ़ा रहे थे। 2009 में उनके असामयिक निधन के पार्टी और परिवार की पूरी जिम्मेदारी हेमंत पर आ गई।

पिता शिबू बीमार रहने लगे और बढ़ती उम्र और कोर्ट की तारीखों ने भी उन्हें राजनीति से किनारा करने के लिए मजबूर कर दिया। हेमंत सोरेन जून 2009 से 4 जनवरी 2010 तक राज्यसभा के सदस्य भी रहे थे. इसके बाद साल 2013 में वो 15 जुलाई को कांग्रेस और आरजेडी की मदद से राज्य के पांचवें सीएम बने थे, लेकिन 2014 के चुनाव में हार के बाद उनकी सत्ता से विदाई हो गई थी। हेमंत की पत्नी कल्पना सोरेन इंजीनियर हैं और फिलहाल एक स्कूल का संचालन करती हैं और इनके दो पुत्र नितिन और विशू हैं।

इन तस्वीरों में हेमंत सोरेन की सादगी जीत रही लोगों का दिल, देखें कैसे रहता है परिवार

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