रांची की एक स्थानीय PMLA अदालत ने बुधवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में आरोप तय कर दिए। यह मामला रांची के बरगाई इलाके की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए।
हेमंत सोरेन ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद और गलत बताया है। अदालत में आरोप तय होने के बाद अब मामले में ट्रायल शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।
हाईकोर्ट में भी दी गई है चुनौती
रांची में मीडिया से बात करते हुए सोरेन के वकील संजीव सहाय ने कहा कि उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है। इसमें PMLA की धारा 44(1)(d) को संवैधानिक रूप से अनुचित बताते हुए चुनौती दी गई है। वकील के मुताबिक, हाईकोर्ट ने बुधवार को इस मामले पर नोटिस जारी किया है। उन्होंने बताया कि सोरेन ने अदालत में अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया।
मामले में 17वें आरोपी हैं हेमंत सोरेन
इस मामले में हेमंत सोरेन 17वें आरोपी हैं। उनके अलावा 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप तय किए जा चुके हैं। यह मामला रांची के बरगेन सर्किल में 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि फर्जी जमीन रिकॉर्ड और दस्तावेजों का इस्तेमाल करके इस जमीन को हासिल किया गया था।
जनवरी 2024 में हुई थी गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हेमंत सोरेन को 31 जनवरी 2024 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जून 2024 में उन्हें जमानत मिल गई थी। हेमंत सोरेन ने झारखंड हाईकोर्ट में दायर अपनी क्रिमिनल रिट याचिका में कहा था कि जांच पूरी होने तक उनके खिलाफ आरोप तय नहीं किए जाने चाहिए। उनकी यह याचिका अभी हाईकोर्ट में लंबित है।
दस्तावेज देखने के लिए मांगा और समय
बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए हेमंत सोरेन ने मामले से जुड़े दस्तावेजों को देखने के लिए अदालत से और समय मांगा। इसके बावजूद अदालत ने उनके खिलाफ आरोप तय कर दिए। अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी और अगली तारीख 30 नवंबर तय की गई है।
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गुजरात हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग वाली आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी व्यक्तिगत सूचना के दायरे में आती है और इसे केवल सार्वजनिक पद पर होने के आधार पर आरटीआई के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
