झारखंड सरकार ने जब 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया तो रांची में जुटे प्रदर्शनकारियों ने इसे अपनी जीत बताया लेकिन दूसरी ओर, 2,200 से ज्यादा उम्मीदवारों के लिए यह बहुत निराश करने वाला निर्णय था। ऐसा इसलिए क्योंकि वे प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) पास कर चुके थे।

द इंडियन एक्सप्रेस ने ऐसे आठ अभ्यर्थियों से बात की है। इनमें एक इंजीनियर भी हैं, जिन्होंने इस परीक्षा की तैयारी के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी थी। इसके अलावा एक आदिवासी महिला और व्हीलचेयर पर बैठी अभ्यर्थी भी हैं, जिन्होंने कई साल तक परीक्षा की तैयारी की।

इनका कहना है कि वे पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ की जाने वाली किसी भी सख्त कार्रवाई का समर्थन करते हैं लेकिन उनका सवाल है कि बिना पूरी जांच के परीक्षा रद्द करना ठीक नहीं है।

JPSC की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के लिए इस साल जनवरी में 103 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया था। प्रारंभिक परीक्षा 19 अप्रैल को हुई और नतीजे 2 जुलाई को आए, जिसमें 2,204 उम्मीदवार पास हुए।

गड़बड़ी के आरोपों के सामने आने के बाद झारखंड सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी। सीआईडी ​​ने प्रारंभिक परीक्षा पास करने वालों से अपनी ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी जमा करने को कहा। सूत्रों का कहना है कि लगभग 1,800 उम्मीदवारों ने कार्बन कॉपी जमा कर दी है।

मुद्दा क्या है?

जिन उम्मीदवारों ने प्रीलिम्स पास कर लिया था, उनके लिए परीक्षा रद्द होने के ऐलान से मुसीबत खड़ी हो गई है क्योंकि अब उन्हें फिर से पूरी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

परीक्षा के लिए नौकरी तक छोड़ दी

अजित कुमार और उनकी पत्नी नेहा केसरी ने प्रीलिम्स पास कर लिया था और उन्हें 25 से 27 जुलाई के बीच होने वाली मुख्य परीक्षा से काफी उम्मीद थी। 22 जुलाई को वे ट्रेन से महाराष्ट्र से झारखंड जा रहे थे लेकिन जब वे दोनों ट्रेन में थे तभी अजित ने व्हाट्सएप पर एक मैसेज देखा। इसमें JPSC परीक्षा में ओएमआर शीट से जुड़ी गड़बड़ी की बात कही गई थी।

32 साल के अजित ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “पहले तो मुझे भरोसा ही नहीं हुआ और फिर मैंने JPSC की वेबसाइट पर जाकर जांच की। वहां लिखा था कि JPSC की 14वीं मुख्य परीक्षा स्थगित कर दी गई है।”

अजित ने 2015 में हजारीबाग से B.Tech किया था और फिर प्राइवेट सेक्टर में कई नौकरियां कीं। अजित ने अपना कोचिंग इंस्टीट्यूट भी शुरू किया और फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने का फैसला किया। 2024 में अजित ने प्रीलिम्स पास कर लिया था लेकिन तब वह मेन परीक्षा में पास नहीं हो सके थे। अजित बताते हैं, “मैंने फिर से तैयारी शुरू की और 14वीं JPSC प्रीलिम्स पास कर लिया।”

2 जुलाई को परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद अजित ने महाराष्ट्र की अपनी प्राइवेट सेक्टर की नौकरी छोड़ दी और ऐसा इसलिए किया कि वह मेन एग्जाम की तैयारी पर पूरा ध्यान दे सकें लेकिन अब परीक्षा रद्द हो चुकी है। अजित बताते हैं कि उनके पास वक्त नहीं था और उन्हें 30,000 रुपये की फ्लाइट लेनी पड़ी।

नेहा ने कहा, “मैं 7वीं से 10वीं JPSC परीक्षा के इंटरव्यू तक पहुंच गई थी, लेकिन सफल नहीं हो पाई। इसलिए यह मेरे लिए दूसरा मौका था।”

फैसले के खिलाफ एकजुट हुए लोग

परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले के बाद अजित ने 200 अभ्यर्थियों को इस फैसले के खिलाफ एकजुट किया। ये लोग आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठकें कर रहे हैं।

आदिवासी समुदाय से आने वाली 26 साल की माधुरी ऐंद के लिए JPSC परीक्षा पास करना एक सपना था। माधुरी और उनका परिवार रांची में एक ठेले पर घरेलू सामान बेचकर अपना गुजारा करते थे और कुछ साल पहले ही काम की तलाश में यहां आया था।

JPSC की पढ़ाई करना उनके लिए आसान नहीं था। दूसरे अभ्यर्थियों की तरह कोचिंग लेने के बजाए उन्होंने लाइब्रेरी और इंटरनेट का इस्तेमाल किया। इसलिए, परीक्षा के रद्द होने से उन्हें बहुत झटका लगा है। माधुरी ने कहा, “मुझे लग रहा है कि मैं निराश हो गई हूं। यहां तक पहुंचने के लिए मैंने बहुत मेहनत की है। मैंने 2025 के JPSC बैकलॉग और 14वें JPSC प्रीलिम्स की परीक्षा पास कर ली थी। अब जब ये परीक्षाएं रद्द हो गई हैं, तो मुझे नहीं पता कि कब मेरा आत्मविश्वास वापस आएगा।”

व्हीलचेयर पर हैं अनामिका तिवारी

व्हीलचेयर पर बैठीं अनामिका तिवारी भी परेशान हैं। अनामिका कहती हैं “जो व्यक्ति व्हीलचेयर पर है और अक्सर दूसरों पर निर्भर है, उसके लिए यहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल होता है। जब ऐसा व्यक्ति इतनी बड़ी परीक्षा की तैयारी करता है और उसे पास करता है और यह रद्द हो जाती है, तो यह शरीर से ही नहीं, मानसिक रूप से भी बहुत बड़ी चुनौती होती है।”

इन लोगों के अलावा कई ऐसे अभ्यर्थी भी हैं जिन्होंने कई साल भर्ती प्रक्रिया में गंवा दिए हैं। 31 साल के हजारीबाग के रहने वाले कुणाल प्रसाद भी इन लोगों में हैं। कुणाल के पास इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री है। इस साल का प्रीलिम्स उनकी दूसरी कोशिश ती। इससे पहले उन्होंने 2016 में प्रीलिम्स पास किया था लेकिन मेन परीक्षा में वह पास नहीं हो सके थे।

…दूसरों की गलती की सजा नहीं मिले

कुणाल प्रसाद बताते हैं, “मैंने जानबूझकर साइंस से ह्यूमैनिटीज का विषय चुना ताकि सिविल सेवा परीक्षा पास कर सकूं। नेचुरल जस्टिस कहता है कि जिन लोगों ने कोई गलती नहीं की, उन्हें दूसरों की गलती की सजा नहीं मिलनी चाहिए।”

38 साल के प्रदीप राम लोहड़ा कहते हैं कि 2009 में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने सरकारी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। उन्होंने 2016 में छठी JPSC परीक्षा का प्रीलिम्स, मेन परीक्षा और इंटरव्यू तीनों पास किए थे लेकिन मेरिट लिस्ट को लेकर कानूनी विवाद हो गया।

सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित मेरिट सूची जारी करने का आदेश दिया, जिसमें उनका नाम नहीं था और उन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ी। महिला अभ्यर्थियों के सामने और ज्यादा चुनौतियां हैं।

26 साल के रोशनी सिन्हा ने कहा, “अगर मैं अपनी कमियों की वजह से फेल होती हूं, तो मैं इसे स्वीकार कर लूंगी लेकिन अभी ऐसा लग रहा है कि मेरी सारी मेहनत किसी और की वजह से बेकार चली जाएगी।” दुमका की 31 साल की श्वेता मरांडी की भी परेशानी ऐसी ही है।

श्वेता कहती हैं कि उन्होंने एग्जाम के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी थी और रिजल्ट आने के बाद वह रो पड़ी थीं। श्वेता कहती हैं कि अब उन्हें दूसरे विकल्प खोजने होंगे।

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आज जब झारखंड के हजारों छात्र JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, तो सवाल सिर्फ एक परीक्षा का नहीं है। यह उन लाखों युवाओं की नाराजगी है, जो पिछले दो दशकों से सरकारी नौकरी का सपना लेकर तैयारी करते रहे, लेकिन समय पर परीक्षा, रिजल्ट और नियुक्ति का इंतजार करते-करते उनकी उम्र और उम्मीदें दोनों बढ़ती चली गईं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।